पूर्व भारतीय क्रिकेटर और BCCI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के हेड वीवीएस लक्ष्मण ने खिलाड़ियों की लगातार बढ़ती चोटों के बीच बेंगलुरु स्थित इस सुविधा का बचाव किया है. लक्ष्मण ने कहा कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को सिर्फ खिलाड़ियों के रिहैबिलिटेशन सेंटर के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. इसका काम खिलाड़ियों को चोट से उबरने में मदद करने के साथ-साथ उन्हें बेहतर प्रदर्शन के लिए तैयार करना भी है. हाल के दिनों में कई भारतीय खिलाड़ियों के चोटिल होने के बाद सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के काम करने के तरीकों पर सवाल उठे हैं.
बेंगलुरु में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान लक्ष्मण ने कहा कि चोटें किसी भी खिलाड़ी के करियर का हिस्सा होती हैं और इसलिए खिलाड़ियों की लगातार निगरानी बेहद जरूरी है. उन्होंने कहा, “सेंटर ऑफ एक्सीलेंस सिर्फ रिहैब सेंटर नहीं है. खिलाड़ियों को बेहतर बनाने और उन्हें श्रेष्ठता हासिल करने में मदद करने के लिए इसकी बड़ी भूमिका है.” लक्ष्मण ने यह भी कहा कि इस मामले में किसी को दोषी ठहराने या बलि का बकरा बनाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए.
चोटों से जूझ रहे कई भारतीय खिलाड़ी
इस समय जसप्रीत बुमराह, हर्षित राणा और नितीश कुमार रेड्डी समेत कई भारतीय खिलाड़ी बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में रिहैब से गुजर रहे हैं. श्रीलंका के खिलाफ 15 अगस्त से शुरू होने वाली दो मैचों की टेस्ट सीरीज से पहले बुमराह की गैरमौजूदगी भारत के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है. टीम के लिए विश्व टेस्ट चैंपियनशिप चक्र में मजबूत प्रदर्शन करना भी महत्वपूर्ण है.
हर्षित राणा की चोट ने बढ़ाई चिंता
तेज गेंदबाज हर्षित राणा की चोट ने भारत के चोट प्रबंधन पर चल रही बहस को और बढ़ा दिया है. राणा करीब चार महीने तक मैदान से बाहर रहने के बाद वापस लौटे थे, लेकिन वापसी के दो सप्ताह के अंदर ही उन्हें फिर हैमस्ट्रिंग की चोट लग गई. खिलाड़ियों की लगातार चोटों के बीच बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया के वीवीएस लक्ष्मण से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में मुलाकात करने की उम्मीद है. इस बैठक में रिहैब प्रक्रिया, चोट प्रबंधन और राष्ट्रीय टीम के साथ तालमेल की समीक्षा की जा सकती है.