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15 अगस्त पर किस PM ने दिया सबसे लंबा भाषण? मोदी से लेकर नेहरू-इंदिरा तक, जानें किसका रिकॉर्ड कितना लंबा

Independence Day Longest Speech | Swatantrata Diwas par sabse bada bhashan:15 अगस्त को लाल किले से प्रधानमंत्री का देश के नाम संबोधन आजादी के बाद से चली आ रही महत्वपूर्ण परंपरा है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 103 मिनट का भाषण देकर सबसे लंबे स्वतंत्रता दिवस संबोधन का रिकॉर्ड बनाया. 2026 में उनका भाषण 78 मिनट का रहा. वहीं सबसे छोटे 14 मिनट के भाषण का रिकॉर्ड जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के नाम है.

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Edited By: Uttam Ojha
Last Updated: 2026-08-15 12:06:15

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Independence Day Longest Speech | Swatantrata Diwas par sabse bada bhashan: 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री का देश के नाम संबोधन स्वतंत्रता दिवस समारोह की सबसे अहम परंपराओं में से एक है. 1947 में देश की आजादी के बाद से प्रधानमंत्रियों ने इस मंच से राष्ट्र की उपलब्धियों, सामने खड़ी चुनौतियों और भविष्य की योजनाओं को देशवासियों के सामने रखा है. इस दौरान प्रधानमंत्री के भाषणों का अंदाज, विषय और अवधि समय के साथ बदलती रही है. किसी प्रधानमंत्री का संबोधन कुछ ही मिनटों में खत्म हो गया, तो किसी ने एक घंटे से भी ज्यादा समय तक देश को संबोधित किया. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, सबसे लंबे स्वतंत्रता दिवस भाषण का रिकॉर्ड प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम है, जबकि सबसे छोटे 14 मिनट के संबोधन का रिकॉर्ड जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के नाम दर्ज है.

पीएम मोदी के नाम सबसे लंबे भाषण का रिकॉर्ड

लाल किले से स्वतंत्रता दिवस पर अब तक सबसे लंबा भाषण देने का रिकॉर्ड प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम है. साल 2025 में उन्होंने 103 मिनट यानी 1 घंटे 43 मिनट तक देश को संबोधित किया था. यह किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री का अब तक का सबसे लंबा स्वतंत्रता दिवस भाषण रहा.  खास बात यह है कि 2025 में पीएम मोदी ने अपना ही पिछला रिकॉर्ड तोड़ा था. इससे एक साल पहले यानी 2024 में उनका स्वतंत्रता दिवस संबोधन 98 मिनट का रहा था. इस तरह लगातार दो वर्षों में उनका भाषण 90 मिनट से ज्यादा लंबा रहा.

2026 में 78 मिनट का रहा पीएम मोदी का संबोधन

साल 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लाल किले से दिया गया संबोधन पिछले वर्ष के मुकाबले काफी छोटा रहा. 15 अगस्त 2026 को उन्होंने करीब 78 मिनट तक देश को संबोधित किया. यह उनके पिछले कुछ वर्षों के स्वतंत्रता दिवस भाषणों की तुलना में अपेक्षाकृत छोटा संबोधन रहा. हालांकि, 78 मिनट की अवधि भी लाल किले से दिए जाने वाले लंबे भाषणों में शामिल है. 2025 में बनाए गए 103 मिनट के रिकॉर्ड से इस बार का संबोधन काफी कम रहा.

सबसे छोटे भाषण का का रिकार्ड इन दो प्रधानमंत्रियों के नाम

लाल किले से स्वतंत्रता दिवस पर सबसे कम अवधि के भाषण का रिकॉर्ड भी काफी दिलचस्प है. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी दोनों के नाम 14-14 मिनट का सबसे छोटा स्वतंत्रता दिवस संबोधन दर्ज है. जवाहरलाल नेहरू ने 1954 में लाल किले से करीब 14 मिनट का भाषण दिया था. वहीं इंदिरा गांधी ने 1966 में प्रधानमंत्री के तौर पर अपने पहले स्वतंत्रता दिवस संबोधन में करीब 14 मिनट तक देश को संबोधित किया था. हालांकि इंदिरा गांधी के कार्यकाल में भाषण की अवधि हमेशा इतनी कम नहीं रही. 1972 में उनका संबोधन करीब 54 मिनट तक चला, जो उनके कार्यकाल के सबसे लंबे स्वतंत्रता दिवस भाषणों में शामिल था.

जवाहरलाल नेहरू के नाम है यह रिकार्ड

जवाहरलाल नेहरू के नाम सबसे छोटे भाषण के साथ-साथ लंबे भाषणों में भी एक महत्वपूर्ण रिकॉर्ड दर्ज है. 1947 में आजाद भारत के पहले स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से उनका संबोधन करीब 72 मिनट का रहा था. आजादी के शुरुआती वर्षों में लाल किले से प्रधानमंत्री का संबोधन देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण संदेश माना जाता था. उस दौर में देश के सामने राष्ट्र निर्माण, विकास और नई व्यवस्था को मजबूत करने जैसी बड़ी चुनौतियां थीं.

आईके गुजराल का भाषण भी रहा करीब 71 मिनट

पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल ने भी लाल किले से लंबा स्वतंत्रता दिवस भाषण दिया था. 1997 में उनका संबोधन करीब 71 मिनट तक चला. इस तरह उपलब्ध आंकड़ों में नेहरू के 1947 के 72 मिनट और गुजराल के 1997 के करीब 71 मिनट के भाषण भी लंबे संबोधनों में शामिल रहे हैं. इससे पता चलता है कि लाल किले से प्रधानमंत्री के भाषण की अवधि अलग-अलग दौर में काफी बदलती रही है.

अटल बिहारी वाजपेयी के भाषण रहे अपेक्षाकृत छोटे

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी अपने प्रभावशाली और सधे हुए भाषणों के लिए जाने जाते थे. लाल किले से उनके कुछ स्वतंत्रता दिवस संबोधन अपेक्षाकृत कम अवधि के रहे. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2002 में वाजपेयी ने करीब 25 मिनट और 2003 में करीब 30 मिनट तक देश को संबोधित किया था. उनकी भाषण शैली में कम शब्दों में प्रभावी संदेश देने की विशेषता भी देखने को मिलती थी.

मनमोहन सिंह के भाषण 30 से 50 मिनट के बीच रहे

पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के स्वतंत्रता दिवस भाषण भी अलग-अलग वर्षों में अलग अवधि के रहे. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 2012 में उनका संबोधन करीब 32 मिनट और 2013 में 35 मिनट का था.
वहीं 2005 और 2006 में उनके भाषण करीब 50 मिनट के रहे. ये उनके कार्यकाल के अपेक्षाकृत लंबे स्वतंत्रता दिवस संबोधनों में शामिल थे. उनके भाषणों में आर्थिक विकास, सामाजिक योजनाओं, राष्ट्रीय चुनौतियों और सरकार की नीतियों पर विशेष जोर रहता था.

लाल बहादुर शास्त्री के भाषण भी रहे सीमित अवधि के

देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के स्वतंत्रता दिवस भाषण आमतौर पर 20 से 30 मिनट के बीच रहे. उनके कार्यकाल के दौरान देश युद्ध, खाद्य संकट और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसी महत्वपूर्ण चुनौतियों से गुजर रहा था. शास्त्री के भाषणों में देशवासियों से एकजुट होकर चुनौतियों का सामना करने और राष्ट्रहित में योगदान देने की अपील प्रमुखता से दिखाई देती थी.

हर दौर की कहानी भी बताते हैं ये संबोधन

लाल किले से प्रधानमंत्री का स्वतंत्रता दिवस संबोधन केवल इस बात का रिकॉर्ड नहीं है कि किसी प्रधानमंत्री ने कितनी देर तक भाषण दिया. इन भाषणों में हर दौर की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक प्राथमिकताओं की झलक भी मिलती है. आजादी के शुरुआती वर्षों में राष्ट्र निर्माण और विकास प्रमुख मुद्दे रहे, जबकि बाद के दशकों में आर्थिक विकास, सामाजिक कल्याण, सुरक्षा और बदलती वैश्विक परिस्थितियों जैसे विषयों का महत्व बढ़ा. समय के साथ प्रधानमंत्री के भाषणों का स्वरूप और अवधि भी बदलती गई.

14 मिनट से 103 मिनट तक पहुंची भाषण की परंपरा

लाल किले से प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस भाषणों का इतिहास देखें तो इसकी अवधि में काफी बड़ा अंतर नजर आता है. एक तरफ जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के 14-14 मिनट के सबसे छोटे संबोधन हैं, वहीं दूसरी तरफ नरेंद्र मोदी का 2025 का 103 मिनट का भाषण अब तक का सबसे लंबा रिकॉर्ड है. 2026 में पीएम मोदी का 78 मिनट का संबोधन 103 मिनट के रिकॉर्ड से छोटा जरूर रहा, लेकिन स्वतंत्रता दिवस के लंबे भाषणों की परंपरा में यह भी एक महत्वपूर्ण अवधि वाला संबोधन है. इस तरह लाल किले से दिए गए प्रधानमंत्री के भाषणों का इतिहास देश की बदलती राजनीति, प्राथमिकताओं और नेतृत्व की शैली की भी एक तस्वीर पेश करता है.

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Last Updated: 2026-08-15 12:06:15

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Independence Day Longest Speech | Swatantrata Diwas par sabse bada bhashan: 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री का देश के नाम संबोधन स्वतंत्रता दिवस समारोह की सबसे अहम परंपराओं में से एक है. 1947 में देश की आजादी के बाद से प्रधानमंत्रियों ने इस मंच से राष्ट्र की उपलब्धियों, सामने खड़ी चुनौतियों और भविष्य की योजनाओं को देशवासियों के सामने रखा है. इस दौरान प्रधानमंत्री के भाषणों का अंदाज, विषय और अवधि समय के साथ बदलती रही है. किसी प्रधानमंत्री का संबोधन कुछ ही मिनटों में खत्म हो गया, तो किसी ने एक घंटे से भी ज्यादा समय तक देश को संबोधित किया. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, सबसे लंबे स्वतंत्रता दिवस भाषण का रिकॉर्ड प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम है, जबकि सबसे छोटे 14 मिनट के संबोधन का रिकॉर्ड जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के नाम दर्ज है.

पीएम मोदी के नाम सबसे लंबे भाषण का रिकॉर्ड

लाल किले से स्वतंत्रता दिवस पर अब तक सबसे लंबा भाषण देने का रिकॉर्ड प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम है. साल 2025 में उन्होंने 103 मिनट यानी 1 घंटे 43 मिनट तक देश को संबोधित किया था. यह किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री का अब तक का सबसे लंबा स्वतंत्रता दिवस भाषण रहा.  खास बात यह है कि 2025 में पीएम मोदी ने अपना ही पिछला रिकॉर्ड तोड़ा था. इससे एक साल पहले यानी 2024 में उनका स्वतंत्रता दिवस संबोधन 98 मिनट का रहा था. इस तरह लगातार दो वर्षों में उनका भाषण 90 मिनट से ज्यादा लंबा रहा.

2026 में 78 मिनट का रहा पीएम मोदी का संबोधन

साल 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लाल किले से दिया गया संबोधन पिछले वर्ष के मुकाबले काफी छोटा रहा. 15 अगस्त 2026 को उन्होंने करीब 78 मिनट तक देश को संबोधित किया. यह उनके पिछले कुछ वर्षों के स्वतंत्रता दिवस भाषणों की तुलना में अपेक्षाकृत छोटा संबोधन रहा. हालांकि, 78 मिनट की अवधि भी लाल किले से दिए जाने वाले लंबे भाषणों में शामिल है. 2025 में बनाए गए 103 मिनट के रिकॉर्ड से इस बार का संबोधन काफी कम रहा.

सबसे छोटे भाषण का का रिकार्ड इन दो प्रधानमंत्रियों के नाम

लाल किले से स्वतंत्रता दिवस पर सबसे कम अवधि के भाषण का रिकॉर्ड भी काफी दिलचस्प है. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी दोनों के नाम 14-14 मिनट का सबसे छोटा स्वतंत्रता दिवस संबोधन दर्ज है. जवाहरलाल नेहरू ने 1954 में लाल किले से करीब 14 मिनट का भाषण दिया था. वहीं इंदिरा गांधी ने 1966 में प्रधानमंत्री के तौर पर अपने पहले स्वतंत्रता दिवस संबोधन में करीब 14 मिनट तक देश को संबोधित किया था. हालांकि इंदिरा गांधी के कार्यकाल में भाषण की अवधि हमेशा इतनी कम नहीं रही. 1972 में उनका संबोधन करीब 54 मिनट तक चला, जो उनके कार्यकाल के सबसे लंबे स्वतंत्रता दिवस भाषणों में शामिल था.

जवाहरलाल नेहरू के नाम है यह रिकार्ड

जवाहरलाल नेहरू के नाम सबसे छोटे भाषण के साथ-साथ लंबे भाषणों में भी एक महत्वपूर्ण रिकॉर्ड दर्ज है. 1947 में आजाद भारत के पहले स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से उनका संबोधन करीब 72 मिनट का रहा था. आजादी के शुरुआती वर्षों में लाल किले से प्रधानमंत्री का संबोधन देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण संदेश माना जाता था. उस दौर में देश के सामने राष्ट्र निर्माण, विकास और नई व्यवस्था को मजबूत करने जैसी बड़ी चुनौतियां थीं.

आईके गुजराल का भाषण भी रहा करीब 71 मिनट

पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल ने भी लाल किले से लंबा स्वतंत्रता दिवस भाषण दिया था. 1997 में उनका संबोधन करीब 71 मिनट तक चला. इस तरह उपलब्ध आंकड़ों में नेहरू के 1947 के 72 मिनट और गुजराल के 1997 के करीब 71 मिनट के भाषण भी लंबे संबोधनों में शामिल रहे हैं. इससे पता चलता है कि लाल किले से प्रधानमंत्री के भाषण की अवधि अलग-अलग दौर में काफी बदलती रही है.

अटल बिहारी वाजपेयी के भाषण रहे अपेक्षाकृत छोटे

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी अपने प्रभावशाली और सधे हुए भाषणों के लिए जाने जाते थे. लाल किले से उनके कुछ स्वतंत्रता दिवस संबोधन अपेक्षाकृत कम अवधि के रहे. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2002 में वाजपेयी ने करीब 25 मिनट और 2003 में करीब 30 मिनट तक देश को संबोधित किया था. उनकी भाषण शैली में कम शब्दों में प्रभावी संदेश देने की विशेषता भी देखने को मिलती थी.

मनमोहन सिंह के भाषण 30 से 50 मिनट के बीच रहे

पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के स्वतंत्रता दिवस भाषण भी अलग-अलग वर्षों में अलग अवधि के रहे. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 2012 में उनका संबोधन करीब 32 मिनट और 2013 में 35 मिनट का था.
वहीं 2005 और 2006 में उनके भाषण करीब 50 मिनट के रहे. ये उनके कार्यकाल के अपेक्षाकृत लंबे स्वतंत्रता दिवस संबोधनों में शामिल थे. उनके भाषणों में आर्थिक विकास, सामाजिक योजनाओं, राष्ट्रीय चुनौतियों और सरकार की नीतियों पर विशेष जोर रहता था.

लाल बहादुर शास्त्री के भाषण भी रहे सीमित अवधि के

देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के स्वतंत्रता दिवस भाषण आमतौर पर 20 से 30 मिनट के बीच रहे. उनके कार्यकाल के दौरान देश युद्ध, खाद्य संकट और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसी महत्वपूर्ण चुनौतियों से गुजर रहा था. शास्त्री के भाषणों में देशवासियों से एकजुट होकर चुनौतियों का सामना करने और राष्ट्रहित में योगदान देने की अपील प्रमुखता से दिखाई देती थी.

हर दौर की कहानी भी बताते हैं ये संबोधन

लाल किले से प्रधानमंत्री का स्वतंत्रता दिवस संबोधन केवल इस बात का रिकॉर्ड नहीं है कि किसी प्रधानमंत्री ने कितनी देर तक भाषण दिया. इन भाषणों में हर दौर की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक प्राथमिकताओं की झलक भी मिलती है. आजादी के शुरुआती वर्षों में राष्ट्र निर्माण और विकास प्रमुख मुद्दे रहे, जबकि बाद के दशकों में आर्थिक विकास, सामाजिक कल्याण, सुरक्षा और बदलती वैश्विक परिस्थितियों जैसे विषयों का महत्व बढ़ा. समय के साथ प्रधानमंत्री के भाषणों का स्वरूप और अवधि भी बदलती गई.

14 मिनट से 103 मिनट तक पहुंची भाषण की परंपरा

लाल किले से प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस भाषणों का इतिहास देखें तो इसकी अवधि में काफी बड़ा अंतर नजर आता है. एक तरफ जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के 14-14 मिनट के सबसे छोटे संबोधन हैं, वहीं दूसरी तरफ नरेंद्र मोदी का 2025 का 103 मिनट का भाषण अब तक का सबसे लंबा रिकॉर्ड है. 2026 में पीएम मोदी का 78 मिनट का संबोधन 103 मिनट के रिकॉर्ड से छोटा जरूर रहा, लेकिन स्वतंत्रता दिवस के लंबे भाषणों की परंपरा में यह भी एक महत्वपूर्ण अवधि वाला संबोधन है. इस तरह लाल किले से दिए गए प्रधानमंत्री के भाषणों का इतिहास देश की बदलती राजनीति, प्राथमिकताओं और नेतृत्व की शैली की भी एक तस्वीर पेश करता है.

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