Live TV
Search
Home > देश > टूटी टांग, जेब में पैसे नहीं… फिर भी नहीं मानी हार, 73 साल के बुजुर्ग ट्राइसाइकिल से 150 KM चलकर अस्पताल पहुंचे

टूटी टांग, जेब में पैसे नहीं… फिर भी नहीं मानी हार, 73 साल के बुजुर्ग ट्राइसाइकिल से 150 KM चलकर अस्पताल पहुंचे

Tricycle, 150 km journey: ओडिशा के नयागढ़ जिले के 73 वर्षीय सुकदेव नाहक टूटी हुई टांग के बावजूद ट्राइसाइकिल से करीब 150 किलोमीटर का सफर तय कर ब्रह्मपुर स्थित एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल पहुंचे. आर्थिक तंगी और पारिवारिक सहारे की कमी के बावजूद उन्होंने इलाज की उम्मीद नहीं छोड़ी. अस्पताल प्रशासन ने उनकी जांच शुरू कर इलाज की व्यवस्था कर दी है.

Written By:
Published: August 7, 2026 12:34:55 IST
Last Updated: August 7, 2026 12:34:55 IST

Mobile Ads 1x1

Tricycle 150 km journey: कहते हैं कि अगर जीने की उम्मीद और हौसला मजबूत हो तो कोई भी मुश्किल रास्ता नहीं रोक सकता. ओडिशा के नयागढ़ जिले के 73 वर्षीय सुकदेव नाहक ने इसे सच साबित कर दिखाया. टूटी हुई टांग, आर्थिक तंगी, पत्नी का साथ छूट जाने और परिवार से मदद न मिलने के बावजूद उन्होंने इलाज की उम्मीद नहीं छोड़ी. ट्राइसाइकिल पर करीब 150 किलोमीटर का सफर तय कर वे ब्रह्मपुर स्थित एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल पहुंचे, जहां अब उनका इलाज शुरू हो गया है. उनकी कहानी संघर्ष, जज्बे और उम्मीद की मिसाल बन गई है.

टूटी टांग के साथ शुरू किया 150 किलोमीटर का सफर

ओडिशा के नयागढ़ जिले के सारणकुल थाना क्षेत्र के बरासाही गांव निवासी 73 वर्षीय सुकदेव नाहक पहले गांव में चौकीदार के रूप में काम करते थे. कुछ समय पहले एक हादसे में उनकी बाईं टांग टूट गई. आर्थिक तंगी के कारण इलाज संभव नहीं हो पा रहा था. परिवार में भी ऐसा कोई नहीं था जो उनका सहारा बन सके. ऐसे में उन्होंने खुद ही ट्राइसाइकिल से ब्रह्मपुर स्थित एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल जाने का फैसला किया.

दो दिन तक दर्द सहते हुए तय किया लंबा रास्ता

सुकदेव ने करीब 150 किलोमीटर का सफर दो दिनों में पूरा किया. टूटी हुई टांग और बढ़ती उम्र के बावजूद उन्होंने रास्ते की कठिनाइयों का सामना किया. उनके पास खाने तक के पैसे नहीं थे. रास्ते में मिलने वाले लोगों और राहगीरों ने उन्हें भोजन कराया, जिसकी बदौलत वे अपनी मंजिल तक पहुंच सके.

पत्नी का निधन, बेटा भी नहीं बन सका सहारा

सुकदेव ने बताया कि उनकी पत्नी का निधन वर्ष 2011 में हो गया था. उनका एक बेटा है, लेकिन उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है और वह काम करने में सक्षम नहीं है. ऐसे में परिवार की पूरी जिम्मेदारी और अपनी बीमारी से लड़ने की चुनौती उन्हें अकेले ही उठानी पड़ी. अस्पताल पहुंचने के बाद सुकदेव ने बताया कि उन्होंने तय कर लिया था कि चाहे जितनी भी मुश्किल आए, इलाज कराए बिना वापस नहीं लौटेंगे. उन्होंने कहा कि रास्ता बेहद कठिन था, लेकिन उम्मीद ने उनका साथ नहीं छोड़ा. उन्हें विश्वास है कि इलाज के बाद वे फिर से चल-फिर सकेंगे.

कहानी सामने आते ही सक्रिय हुआ अस्पताल प्रशासन

सुकदेव की कहानी सामने आने के बाद एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल प्रशासन तुरंत सक्रिय हो गया. मेडिकल सुपरिटेंडेंट और अन्य अधिकारियों ने उनके इलाज की पूरी व्यवस्था करने के निर्देश दिए. अस्पताल में उनकी प्राथमिक जांच शुरू कर दी गई है. अस्पताल प्रशासन के अनुसार पहले उनकी सभी जरूरी मेडिकल जांच कराई जाएगी. इसके बाद चोट और स्वास्थ्य की स्थिति का विस्तृत आकलन किया जाएगा. रिपोर्ट आने के बाद डॉक्टर आगे के इलाज की योजना तैयार करेंगे ताकि उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल सके.

हौसले की मिसाल बन गए सुकदेव

73 वर्ष की उम्र, टूटी हुई टांग, आर्थिक तंगी और अकेलेपन जैसी मुश्किलों के बावजूद सुकदेव नाहक ने हार नहीं मानी. उनका 150 किलोमीटर का सफर केवल इलाज तक पहुंचने की कहानी नहीं, बल्कि यह बताता है कि मजबूत इरादे इंसान को हर मुश्किल पार करा सकते हैं. उनका संघर्ष आज हजारों लोगों के लिए प्रेरणा बन गया है.

Tags:

MORE NEWS

Home > देश > टूटी टांग, जेब में पैसे नहीं… फिर भी नहीं मानी हार, 73 साल के बुजुर्ग ट्राइसाइकिल से 150 KM चलकर अस्पताल पहुंचे

Written By:
Published: August 7, 2026 12:34:55 IST
Last Updated: August 7, 2026 12:34:55 IST

Mobile Ads 1x1

Tricycle 150 km journey: कहते हैं कि अगर जीने की उम्मीद और हौसला मजबूत हो तो कोई भी मुश्किल रास्ता नहीं रोक सकता. ओडिशा के नयागढ़ जिले के 73 वर्षीय सुकदेव नाहक ने इसे सच साबित कर दिखाया. टूटी हुई टांग, आर्थिक तंगी, पत्नी का साथ छूट जाने और परिवार से मदद न मिलने के बावजूद उन्होंने इलाज की उम्मीद नहीं छोड़ी. ट्राइसाइकिल पर करीब 150 किलोमीटर का सफर तय कर वे ब्रह्मपुर स्थित एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल पहुंचे, जहां अब उनका इलाज शुरू हो गया है. उनकी कहानी संघर्ष, जज्बे और उम्मीद की मिसाल बन गई है.

टूटी टांग के साथ शुरू किया 150 किलोमीटर का सफर

ओडिशा के नयागढ़ जिले के सारणकुल थाना क्षेत्र के बरासाही गांव निवासी 73 वर्षीय सुकदेव नाहक पहले गांव में चौकीदार के रूप में काम करते थे. कुछ समय पहले एक हादसे में उनकी बाईं टांग टूट गई. आर्थिक तंगी के कारण इलाज संभव नहीं हो पा रहा था. परिवार में भी ऐसा कोई नहीं था जो उनका सहारा बन सके. ऐसे में उन्होंने खुद ही ट्राइसाइकिल से ब्रह्मपुर स्थित एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल जाने का फैसला किया.

दो दिन तक दर्द सहते हुए तय किया लंबा रास्ता

सुकदेव ने करीब 150 किलोमीटर का सफर दो दिनों में पूरा किया. टूटी हुई टांग और बढ़ती उम्र के बावजूद उन्होंने रास्ते की कठिनाइयों का सामना किया. उनके पास खाने तक के पैसे नहीं थे. रास्ते में मिलने वाले लोगों और राहगीरों ने उन्हें भोजन कराया, जिसकी बदौलत वे अपनी मंजिल तक पहुंच सके.

पत्नी का निधन, बेटा भी नहीं बन सका सहारा

सुकदेव ने बताया कि उनकी पत्नी का निधन वर्ष 2011 में हो गया था. उनका एक बेटा है, लेकिन उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है और वह काम करने में सक्षम नहीं है. ऐसे में परिवार की पूरी जिम्मेदारी और अपनी बीमारी से लड़ने की चुनौती उन्हें अकेले ही उठानी पड़ी. अस्पताल पहुंचने के बाद सुकदेव ने बताया कि उन्होंने तय कर लिया था कि चाहे जितनी भी मुश्किल आए, इलाज कराए बिना वापस नहीं लौटेंगे. उन्होंने कहा कि रास्ता बेहद कठिन था, लेकिन उम्मीद ने उनका साथ नहीं छोड़ा. उन्हें विश्वास है कि इलाज के बाद वे फिर से चल-फिर सकेंगे.

कहानी सामने आते ही सक्रिय हुआ अस्पताल प्रशासन

सुकदेव की कहानी सामने आने के बाद एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल प्रशासन तुरंत सक्रिय हो गया. मेडिकल सुपरिटेंडेंट और अन्य अधिकारियों ने उनके इलाज की पूरी व्यवस्था करने के निर्देश दिए. अस्पताल में उनकी प्राथमिक जांच शुरू कर दी गई है. अस्पताल प्रशासन के अनुसार पहले उनकी सभी जरूरी मेडिकल जांच कराई जाएगी. इसके बाद चोट और स्वास्थ्य की स्थिति का विस्तृत आकलन किया जाएगा. रिपोर्ट आने के बाद डॉक्टर आगे के इलाज की योजना तैयार करेंगे ताकि उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल सके.

हौसले की मिसाल बन गए सुकदेव

73 वर्ष की उम्र, टूटी हुई टांग, आर्थिक तंगी और अकेलेपन जैसी मुश्किलों के बावजूद सुकदेव नाहक ने हार नहीं मानी. उनका 150 किलोमीटर का सफर केवल इलाज तक पहुंचने की कहानी नहीं, बल्कि यह बताता है कि मजबूत इरादे इंसान को हर मुश्किल पार करा सकते हैं. उनका संघर्ष आज हजारों लोगों के लिए प्रेरणा बन गया है.

Tags:

MORE NEWS