जगदलपुर: झीरम घाटी हमले के दोषियों पर चल रहे मुकदमे की आखिरी सुनवाई हो गई. NIA कोर्ट ने हमले में शामिल 10 आरोपियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है.
हालांकि, दोषी 30 दिन के अंदर फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जा सकते हैं. बता दें कि 25 मई साल 2013 को झीरम हमले में कांग्रेस के दिग्गज नेता समेत कई सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे. इस हमले को लेकर NIA कोर्ट ने 10 लोगों को दोषी करार दिया था.
झीरम मामले में कांग्रेस का आरोप
5 सितंबर को जब NIA कोर्ट का इस मामले पर फैसला आया तो बस्तर सहित पूरे छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने इसे अधूरा न्याय बताया था. कांग्रेस पार्टी ने प्रदेशभर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उच्च न्यायालय की शरण में जाने की बात कही. भूपेश बघेल ने यह तक आरोप लगाया कि झीरम हमले के असली आरोपियों से पूछताछ तक नहीं हुई.
डिप्टी सीएम ने बोले, ‘सबूत NIA को दिखाएं’
कांग्रेस के आरोपों को लेकर डिप्टी सीएम एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा था कि जिनके जेब में झीरम के सबूत रखे हुए हैं,उन्हें मीडिया के सामने नहीं बल्कि NIA को जाकर देना चाहिए. विजय शर्मा ने कहा था कि जिन लोगों के रोल मॉडल हिडमा रहे हो और जो लोग हिडमा को लेकर अपना पक्ष रखते रहे हो वह लोग झीरम कांड का सच कहां से बाहर आने देंगे. विजय शर्मा ने कहा कि अभी भी समय नहीं बीता है अगर भूपेश बघेल के पास कोई सच है तो वह ले जाकर NIA के अधिकारियों को सौंप दें ताकि पूरा सच बाहर आ जाए.
झीरम नक्सली हमले के बारे में
25 मई 2013 को ये बर्बर हत्याकांड हुआ था. कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर नक्सलियों ने घात लगाकर जानलेवा हमला किया था. बस्तर के झीरम घाटी में हुए इस बर्बर नक्सली हमले ने ना केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश की राजनीति को हिलाकर रख दिया था. इस हमले में प्रदेश कांग्रेस के शीर्ष नेताओं सहित कुल 29 लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी.
इस हमले में पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, बस्तर के कद्दावर नेता और सलवा जुडूम के समर्थक महेंद्र कर्मा और पूर्व विधायक उदय मुदलियार समेत कई वरिष्ठ नेताओं, सुरक्षाकर्मियों और कार्यकर्ताओं की जान गई थी.