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Home > देश > लाल किले पर पीएम की पगड़ी ने फिर खींचा ध्यान, 2014 से 2026 तक बदलता रहा रंग-रूप, जानें क्या है वजह

लाल किले पर पीएम की पगड़ी ने फिर खींचा ध्यान, 2014 से 2026 तक बदलता रहा रंग-रूप, जानें क्या है वजह

PM Modi Independence Day outfit: स्वतंत्रता दिवस 2026 के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले पर पीले और सफेद बांधनी पैटर्न वाली चमकदार लाल पगड़ी, सफेद कुर्ता-पायजामा और भूरे रंग की नेहरू जैकेट में नजर आए. 2014 से पीएम मोदी स्वतंत्रता दिवस पर अलग-अलग रंग और डिजाइन वाली पगड़ियां पहनते आए हैं. उनकी कई पगड़ियों में राजस्थान और पश्चिमी भारत की पारंपरिक कपड़ा शैलियों की झलक दिखाई देती है.

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Last Updated: August 15, 2026 12:28:18 IST

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PM Modi Independence Day outfit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होते हुए स्वतंत्रता दिवस पर खास पगड़ी पहनने की अपनी परंपरा को एक बार फिर आगे बढ़ाया. इस बार वह पीले और सफेद बांधनी पैटर्न वाली चमकदार लाल रंग की पगड़ी में नजर आए. लाल रंग की पगड़ी के साथ उन्होंने सफेद कुर्ता-पायजामा और भूरे रंग की नेहरू जैकेट पहनी थी. लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करने के दौरान उनके पहनावे में सबसे ज्यादा ध्यान उनकी पारंपरिक पगड़ी ने खींचा. स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पीएम मोदी का पहनावा हर साल चर्चा का विषय बनता है. खासकर उनकी पगड़ी के रंग, डिजाइन और शैली में बदलाव को लेकर लोगों की दिलचस्पी रहती है. 2014 में लाल किले से अपने पहले स्वतंत्रता दिवस संबोधन से लेकर इस साल तक प्रधानमंत्री अलग-अलग रंगों और पारंपरिक शैलियों वाली पगड़ियों में नजर आते रहे हैं.
 

2014 में जोधपुरी बंधेज पगड़ी से हुई थी शुरुआत

 
अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाल किले से दिए गए पहले स्वतंत्रता दिवस भाषण की बात करें तो 2014 में वह लाल चमकदार जोधपुरी बंधेज पगड़ी में नजर आए थे. उनकी यह पगड़ी उस समय भी चर्चा का केंद्र बनी थी. इसके अगले साल यानी 2015 में उन्होंने पीले और कई रंगों वाले क्रॉस-क्रॉस पैटर्न की पगड़ी पहनी. इसके बाद हर स्वतंत्रता दिवस पर उनकी पगड़ी का रंग और डिजाइन बदलता गया. कभी गुलाबी, कभी लाल, कभी केसरिया तो कभी बांधनी और लहरिया जैसी पारंपरिक शैलियों ने उनके पहनावे को अलग पहचान दी. एक मौके पर वह राष्ट्रीय ध्वज के रंगों से प्रेरित पगड़ी में भी नजर आए थे. इस तरह स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी की पगड़ी उनके पहनावे का महज एक हिस्सा नहीं रही, बल्कि लाल किले के समारोह की एक ऐसी खास पहचान बन गई, जिसका इंतजार हर साल किया जाता है.
 

राजस्थान और पश्चिमी भारत की कपड़ा परंपराओं की झलक

 
पीएम मोदी की स्वतंत्रता दिवस वाली कई पगड़ियों में राजस्थान और पश्चिमी भारत की पारंपरिक कपड़ा शैलियों की झलक देखने को मिलती है. इन पगड़ियों में चमकीले और आकर्षक रंगों का इस्तेमाल खास तौर पर दिखाई देता है. केसरिया, लाल और पीले जैसे रंग उनकी अलग-अलग पगड़ियों में बार-बार नजर आए हैं. बंधेज, लहरिया और पारंपरिक साफे जैसी शैलियों से प्रेरित पगड़ियां उनके स्वतंत्रता दिवस के पहनावे को भारतीय लोक और पारंपरिक संस्कृति से जोड़ती दिखाई देती हैं. इस बार भी लाल रंग की पगड़ी पर पीले और सफेद बांधनी पैटर्न ने उनके पूरे लुक को अलग पहचान दी. यही वजह है कि स्वतंत्रता दिवस के दिन प्रधानमंत्री का पहनावा केवल फैशन या व्यक्तिगत पसंद तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसमें देश की अलग-अलग पारंपरिक कला और वस्त्र संस्कृति की झलक भी देखने को मिलती है.

राजनीतिक विश्लेषक ने बताई पगड़ी के पीछे की रणनीति

पीएम मोदी के इस तरह के सार्वजनिक पहनावे को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम में नेता के पहनावे की हर चीज सोच-समझकर तय की जाती है. उनके मुताबिक प्रधानमंत्री अपने संदेश और सार्वजनिक छवि को लेकर काफी सतर्क रहते हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि किसी राजनीतिक नेता के लिए बड़े राष्ट्रीय कार्यक्रम में पहनावे का चुनाव भी एक तरह का संचार माध्यम बन सकता है. ऐसे आयोजनों में रंग, डिजाइन और पारंपरिक प्रतीकों के जरिए लोगों तक एक अलग संदेश पहुंचाया जा सकता है. उनके मुताबिक पीएम मोदी की स्वतंत्रता दिवस वाली पगड़ियों को भी इसी नजरिए से देखा जा सकता है. हालांकि पगड़ी के पीछे किसी एक आधिकारिक संदेश की पुष्टि अलग से नहीं की गई है, लेकिन उनका रंग और पारंपरिक शैली हर साल चर्चा जरूर पैदा करती है.
 

धार्मिक पहचान वाली पगड़ियों से आमतौर पर दूरी

 
राजनीतिक विश्लेषकों ने पीएम मोदी की स्वतंत्रता दिवस वाली पगड़ियों के एक और पहलू की ओर ध्यान दिलाया. प्रधानमंत्री ने कई अन्य मौकों पर सिख पगड़ी भी पहनी है, लेकिन स्वतंत्रता दिवस के समारोह में वह आमतौर पर ऐसी शैली की पगड़ी से दूरी रखते हैं, जिसकी धार्मिक पहचान स्पष्ट रूप से जुड़ी हो. इसी तरह उनकी स्वतंत्रता दिवस वाली पगड़ियां हरियाणा या उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में किसानों के बीच पहनी जाने वाली पारंपरिक पगड़ियों जैसी भी नहीं होतीं. इसके बजाय उनकी पगड़ियों में राजस्थान और गुजरात से ऐतिहासिक रूप से जुड़ी भव्यता और औपचारिक साफे की शैली अधिक दिखाई देती है. विश्लेषक के मुताबिक इन पगड़ियों को धार्मिकता या किसान पहचान के प्रतीक के तौर पर देखने के बजाय पारंपरिक शाही शैली के करीब माना जा सकता है.
 

2014 से 2026 तक बदलता रहा पगड़ी का अंदाज

 
पीएम मोदी के स्वतंत्रता दिवस के पहनावे पर नजर डालें तो पिछले वर्षों में पगड़ी का रंग और डिजाइन लगातार बदलता रहा है. 2014 की लाल चमकदार जोधपुरी बंधेज पगड़ी से शुरू हुआ यह सिलसिला अगले वर्षों में पीले, गुलाबी, लाल, केसरिया, बांधनी और लहरिया जैसे अलग-अलग रंगों और शैलियों तक पहुंचा. हर साल की पगड़ी का डिजाइन अलग होने के कारण स्वतंत्रता दिवस समारोह में प्रधानमंत्री के पहुंचने के बाद लोगों की नजर उनके पहनावे पर भी रहती है. लाल किले की प्राचीर से भाषण के साथ-साथ उनकी पगड़ी सोशल मीडिया और खबरों में भी चर्चा का विषय बनती रही है. इस बार पीले और सफेद बांधनी पैटर्न वाली लाल पगड़ी ने उनके स्वतंत्रता दिवस लुक को एक बार फिर खास बना दिया.
 

पगड़ी के जरिए दिखती है भारतीय परंपरा की रंगीन झलक

 
स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय समारोह में पीएम मोदी की पगड़ी का बदलता अंदाज भारतीय वस्त्र परंपराओं की विविधता को भी सामने लाता है. अलग-अलग वर्षों में नजर आईं बांधनी, लहरिया और अन्य पारंपरिक शैलियों ने यह दिखाया कि भारतीय परिधान परंपरा कितनी विविध और रंगीन है. 2026 में भी लाल, पीले और सफेद रंगों वाली बांधनी पगड़ी के साथ प्रधानमंत्री का पहनावा इसी परंपरा की झलक देता नजर आया. लाल किले की प्राचीर से उनका संबोधन जहां देश के लिए राजनीतिक और राष्ट्रीय संदेश लेकर आया, वहीं उनकी पगड़ी ने समारोह में पारंपरिक भारतीय रंग भी जोड़ दिया.

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2014 में जोधपुरी बंधेज पगड़ी से हुई थी शुरुआत

 
अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाल किले से दिए गए पहले स्वतंत्रता दिवस भाषण की बात करें तो 2014 में वह लाल चमकदार जोधपुरी बंधेज पगड़ी में नजर आए थे. उनकी यह पगड़ी उस समय भी चर्चा का केंद्र बनी थी. इसके अगले साल यानी 2015 में उन्होंने पीले और कई रंगों वाले क्रॉस-क्रॉस पैटर्न की पगड़ी पहनी. इसके बाद हर स्वतंत्रता दिवस पर उनकी पगड़ी का रंग और डिजाइन बदलता गया. कभी गुलाबी, कभी लाल, कभी केसरिया तो कभी बांधनी और लहरिया जैसी पारंपरिक शैलियों ने उनके पहनावे को अलग पहचान दी. एक मौके पर वह राष्ट्रीय ध्वज के रंगों से प्रेरित पगड़ी में भी नजर आए थे. इस तरह स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी की पगड़ी उनके पहनावे का महज एक हिस्सा नहीं रही, बल्कि लाल किले के समारोह की एक ऐसी खास पहचान बन गई, जिसका इंतजार हर साल किया जाता है.
 

राजस्थान और पश्चिमी भारत की कपड़ा परंपराओं की झलक

 
पीएम मोदी की स्वतंत्रता दिवस वाली कई पगड़ियों में राजस्थान और पश्चिमी भारत की पारंपरिक कपड़ा शैलियों की झलक देखने को मिलती है. इन पगड़ियों में चमकीले और आकर्षक रंगों का इस्तेमाल खास तौर पर दिखाई देता है. केसरिया, लाल और पीले जैसे रंग उनकी अलग-अलग पगड़ियों में बार-बार नजर आए हैं. बंधेज, लहरिया और पारंपरिक साफे जैसी शैलियों से प्रेरित पगड़ियां उनके स्वतंत्रता दिवस के पहनावे को भारतीय लोक और पारंपरिक संस्कृति से जोड़ती दिखाई देती हैं. इस बार भी लाल रंग की पगड़ी पर पीले और सफेद बांधनी पैटर्न ने उनके पूरे लुक को अलग पहचान दी. यही वजह है कि स्वतंत्रता दिवस के दिन प्रधानमंत्री का पहनावा केवल फैशन या व्यक्तिगत पसंद तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसमें देश की अलग-अलग पारंपरिक कला और वस्त्र संस्कृति की झलक भी देखने को मिलती है.

राजनीतिक विश्लेषक ने बताई पगड़ी के पीछे की रणनीति

पीएम मोदी के इस तरह के सार्वजनिक पहनावे को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम में नेता के पहनावे की हर चीज सोच-समझकर तय की जाती है. उनके मुताबिक प्रधानमंत्री अपने संदेश और सार्वजनिक छवि को लेकर काफी सतर्क रहते हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि किसी राजनीतिक नेता के लिए बड़े राष्ट्रीय कार्यक्रम में पहनावे का चुनाव भी एक तरह का संचार माध्यम बन सकता है. ऐसे आयोजनों में रंग, डिजाइन और पारंपरिक प्रतीकों के जरिए लोगों तक एक अलग संदेश पहुंचाया जा सकता है. उनके मुताबिक पीएम मोदी की स्वतंत्रता दिवस वाली पगड़ियों को भी इसी नजरिए से देखा जा सकता है. हालांकि पगड़ी के पीछे किसी एक आधिकारिक संदेश की पुष्टि अलग से नहीं की गई है, लेकिन उनका रंग और पारंपरिक शैली हर साल चर्चा जरूर पैदा करती है.
 

धार्मिक पहचान वाली पगड़ियों से आमतौर पर दूरी

 
राजनीतिक विश्लेषकों ने पीएम मोदी की स्वतंत्रता दिवस वाली पगड़ियों के एक और पहलू की ओर ध्यान दिलाया. प्रधानमंत्री ने कई अन्य मौकों पर सिख पगड़ी भी पहनी है, लेकिन स्वतंत्रता दिवस के समारोह में वह आमतौर पर ऐसी शैली की पगड़ी से दूरी रखते हैं, जिसकी धार्मिक पहचान स्पष्ट रूप से जुड़ी हो. इसी तरह उनकी स्वतंत्रता दिवस वाली पगड़ियां हरियाणा या उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में किसानों के बीच पहनी जाने वाली पारंपरिक पगड़ियों जैसी भी नहीं होतीं. इसके बजाय उनकी पगड़ियों में राजस्थान और गुजरात से ऐतिहासिक रूप से जुड़ी भव्यता और औपचारिक साफे की शैली अधिक दिखाई देती है. विश्लेषक के मुताबिक इन पगड़ियों को धार्मिकता या किसान पहचान के प्रतीक के तौर पर देखने के बजाय पारंपरिक शाही शैली के करीब माना जा सकता है.
 

2014 से 2026 तक बदलता रहा पगड़ी का अंदाज

 
पीएम मोदी के स्वतंत्रता दिवस के पहनावे पर नजर डालें तो पिछले वर्षों में पगड़ी का रंग और डिजाइन लगातार बदलता रहा है. 2014 की लाल चमकदार जोधपुरी बंधेज पगड़ी से शुरू हुआ यह सिलसिला अगले वर्षों में पीले, गुलाबी, लाल, केसरिया, बांधनी और लहरिया जैसे अलग-अलग रंगों और शैलियों तक पहुंचा. हर साल की पगड़ी का डिजाइन अलग होने के कारण स्वतंत्रता दिवस समारोह में प्रधानमंत्री के पहुंचने के बाद लोगों की नजर उनके पहनावे पर भी रहती है. लाल किले की प्राचीर से भाषण के साथ-साथ उनकी पगड़ी सोशल मीडिया और खबरों में भी चर्चा का विषय बनती रही है. इस बार पीले और सफेद बांधनी पैटर्न वाली लाल पगड़ी ने उनके स्वतंत्रता दिवस लुक को एक बार फिर खास बना दिया.
 

पगड़ी के जरिए दिखती है भारतीय परंपरा की रंगीन झलक

 
स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय समारोह में पीएम मोदी की पगड़ी का बदलता अंदाज भारतीय वस्त्र परंपराओं की विविधता को भी सामने लाता है. अलग-अलग वर्षों में नजर आईं बांधनी, लहरिया और अन्य पारंपरिक शैलियों ने यह दिखाया कि भारतीय परिधान परंपरा कितनी विविध और रंगीन है. 2026 में भी लाल, पीले और सफेद रंगों वाली बांधनी पगड़ी के साथ प्रधानमंत्री का पहनावा इसी परंपरा की झलक देता नजर आया. लाल किले की प्राचीर से उनका संबोधन जहां देश के लिए राजनीतिक और राष्ट्रीय संदेश लेकर आया, वहीं उनकी पगड़ी ने समारोह में पारंपरिक भारतीय रंग भी जोड़ दिया.

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