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फर्जी PMO अधिकारी बनकर घूम रहा था रोहन, कोर्ट में बोला- खुद हुआ ठगी का शिकार, NMACC में पहुंचा था सिर्फ परफ्यूम खरीदने

Fake PMO Officer Rohan Premal Parikh: मुंबई के फर्जी PMO अधिकारी मामले में नया मोड़ आया है. पुलिस की रिमांड कॉपी के मुताबिक रोहन प्रेमल परिख खुद को PMO अधिकारी बताता था और उसके पास कथित फर्जी डिजिटल पहचान पत्र मिला. वहीं कोर्ट में बचाव पक्ष ने दावा किया कि रोहन को फर्जी PMO ई-मेल के जरिए नौकरी का ऑफर देकर फंसाया गया और वह खुद ठगी का शिकार है.

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Last Updated: 2026-09-08 18:29:55

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Fake PMO Officer Rohan Premal Parikh: मुंबई में फर्जी प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) अधिकारी बनकर घूमने के मामले में जांच अब एक अलग दिशा में आगे बढ़ रही है. पुलिस की रिमांड कॉपी के मुताबिक रोहन प्रेमल परिख खुद को PMO का अधिकारी बताता था और उसके पास PMO का फर्जी डिजिटल पहचान पत्र मिला. हालांकि, बचाव पक्ष ने अदालत में दावा किया कि रोहन को एक फर्जी ई-मेल के जरिए PMO में नौकरी का झांसा दिया गया और वह खुद इस कथित धोखाधड़ी का शिकार है. रोहन के वकील ने भी अदालत में दावा किया कि वह कार्यक्रम में शामिल होने के लिए नहीं, बल्कि एक दिन पहले NMACC के पास गया था.

रिमांड कॉपी में रोहन पर क्या आरोप?

पुलिस की रिमांड कॉपी के अनुसार, रोहन प्रेमल परिख खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय का अधिकारी बताकर घूम रहा था. जांच के दौरान उसके पास से PMO का फर्जी डिजिटल पहचान पत्र बरामद किया गया. पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 204, 205, 3(5), 319(2), 335, 336, 337 और 340 के तहत मामला दर्ज किया है. जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कथित फर्जी पहचान पत्र और दूसरे दस्तावेज कहां तैयार किए गए और रोहन ने इनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया था.

कोर्ट में बचाव पक्ष ने बताई बिल्कुल अलग कहानी

अदालत में रोहन के वकील ने पुलिस के आरोपों से अलग पक्ष रखा. बचाव पक्ष के मुताबिक, तरुण गुप्ता नाम के व्यक्ति ने  फर्जी PMO ई-मेल के जरिए रोहन को अपने जाल में फंसाया. वकील का दावा है कि रोहन को PMO में नौकरी का प्रस्ताव मिला था. इसके बाद उसे कथित तौर पर PMO का डिजिटल पहचान पत्र और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हस्ताक्षर वाला एक प्रशंसा पत्र भी दिया गया. बचाव पक्ष के अनुसार, इस पत्र में संयुक्त राष्ट्र में रोहन के काम और भू-राजनीति से जुड़े उसके लेखन की प्रशंसा की गई थी. हालांकि, इन दस्तावेजों की वास्तविकता और उन्हें जारी करने वाले व्यक्ति की पहचान अब पुलिस जांच का हिस्सा है.

लंदन में पढ़ाई और भू-राजनीति पर काम का दावा

रोहन के वकील ने अदालत को बताया कि उसने लंदन में पढ़ाई की है और भू-राजनीति तथा रक्षा नीति जैसे विषयों पर काम करता रहा है. बचाव पक्ष का कहना है कि रोहन को जो PMO से जुड़े दस्तावेज और ई-मेल मिले थे, वे असली नहीं बल्कि कथित तौर पर फर्जी थे. इसी आधार पर वकील ने दावा किया कि रोहन खुद एक धोखाधड़ी का शिकार है और उसने जानबूझकर फर्जी सरकारी पहचान का इस्तेमाल नहीं किया. हालांकि, पुलिस जांच में इन दावों की पुष्टि होना अभी बाकी है.

 NMACC पहुंचा था रोहन

मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि रोहन NMACC के पास क्यों पहुंचा था.  वकील के मुताबिक, रोहन का कहना है कि वह वहां केवल परफ्यूम खरीदने गया था और उसका किसी भी कार्यक्रम से कोई संबंध नहीं था. पुलिस अब उसके वहां जाने की वजह और उसकी गतिविधियों की पूरी जानकारी जुटा रही है.

बॉडीगार्ड के पास था हथियार

रोहन के साथ उसका कथित बॉडीगार्ड दिलीप कुंडे भी मौजूद था. पुलिस के अनुसार, कुंडे पूर्व सेना कर्मी बताया जा रहा है और उसके पास से एक हथियार बरामद किया गया है. अब जांच एजेंसियां यह भी पता कर रही हैं कि हथियार वैध था या नहीं, उसे लेकर चलने की अनुमति थी या नहीं और वह रोहन के साथ किस भूमिका में मौजूद था.

एक आरोपी फरार

मामले में प्रथमेश गणेश बागुल नाम का एक अन्य आरोपी फिलहाल फरार बताया जा रहा है. पुलिस उसकी तलाश कर रही है. इसके अलावा तरुण गुप्ता का नाम भी बचाव पक्ष की ओर से सामने आया है. पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि PMO ई-मेल किसने भेजा, नौकरी का ऑफर किसने दिया और फर्जी डिजिटल पहचान पत्र व अन्य दस्तावेज तैयार करने के पीछे कौन था. जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि क्या यह किसी एक व्यक्ति की धोखाधड़ी थी या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था.

रोहन आरोपी या ठगी का शिकार?

इस पूरे मामले में फिलहाल दो अलग-अलग दावे सामने हैं. पुलिस की रिमांड कॉपी में रोहन पर खुद को PMO अधिकारी बताने और कथित फर्जी पहचान पत्र रखने का आरोप है. वहीं बचाव पक्ष का कहना है कि उसे PMO के नाम पर फर्जी दस्तावेज और ई-मेल देकर गुमराह किया गया और वह खुद ठगी का शिकार हुआ. अब जांच में फर्जी ई-मेल, डिजिटल आईडी, कथित प्रशंसा पत्र और नौकरी के प्रस्ताव की सत्यता सामने आने के बाद ही साफ होगा कि रोहन ने जानबूझकर फर्जी पहचान का इस्तेमाल किया था या वह किसी बड़े फर्जीवाड़े में फंस गया था.

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Fake PMO Officer Rohan Premal Parikh: मुंबई में फर्जी प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) अधिकारी बनकर घूमने के मामले में जांच अब एक अलग दिशा में आगे बढ़ रही है. पुलिस की रिमांड कॉपी के मुताबिक रोहन प्रेमल परिख खुद को PMO का अधिकारी बताता था और उसके पास PMO का फर्जी डिजिटल पहचान पत्र मिला. हालांकि, बचाव पक्ष ने अदालत में दावा किया कि रोहन को एक फर्जी ई-मेल के जरिए PMO में नौकरी का झांसा दिया गया और वह खुद इस कथित धोखाधड़ी का शिकार है. रोहन के वकील ने भी अदालत में दावा किया कि वह कार्यक्रम में शामिल होने के लिए नहीं, बल्कि एक दिन पहले NMACC के पास गया था.

रिमांड कॉपी में रोहन पर क्या आरोप?

पुलिस की रिमांड कॉपी के अनुसार, रोहन प्रेमल परिख खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय का अधिकारी बताकर घूम रहा था. जांच के दौरान उसके पास से PMO का फर्जी डिजिटल पहचान पत्र बरामद किया गया. पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 204, 205, 3(5), 319(2), 335, 336, 337 और 340 के तहत मामला दर्ज किया है. जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कथित फर्जी पहचान पत्र और दूसरे दस्तावेज कहां तैयार किए गए और रोहन ने इनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया था.

कोर्ट में बचाव पक्ष ने बताई बिल्कुल अलग कहानी

अदालत में रोहन के वकील ने पुलिस के आरोपों से अलग पक्ष रखा. बचाव पक्ष के मुताबिक, तरुण गुप्ता नाम के व्यक्ति ने  फर्जी PMO ई-मेल के जरिए रोहन को अपने जाल में फंसाया. वकील का दावा है कि रोहन को PMO में नौकरी का प्रस्ताव मिला था. इसके बाद उसे कथित तौर पर PMO का डिजिटल पहचान पत्र और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हस्ताक्षर वाला एक प्रशंसा पत्र भी दिया गया. बचाव पक्ष के अनुसार, इस पत्र में संयुक्त राष्ट्र में रोहन के काम और भू-राजनीति से जुड़े उसके लेखन की प्रशंसा की गई थी. हालांकि, इन दस्तावेजों की वास्तविकता और उन्हें जारी करने वाले व्यक्ति की पहचान अब पुलिस जांच का हिस्सा है.

लंदन में पढ़ाई और भू-राजनीति पर काम का दावा

रोहन के वकील ने अदालत को बताया कि उसने लंदन में पढ़ाई की है और भू-राजनीति तथा रक्षा नीति जैसे विषयों पर काम करता रहा है. बचाव पक्ष का कहना है कि रोहन को जो PMO से जुड़े दस्तावेज और ई-मेल मिले थे, वे असली नहीं बल्कि कथित तौर पर फर्जी थे. इसी आधार पर वकील ने दावा किया कि रोहन खुद एक धोखाधड़ी का शिकार है और उसने जानबूझकर फर्जी सरकारी पहचान का इस्तेमाल नहीं किया. हालांकि, पुलिस जांच में इन दावों की पुष्टि होना अभी बाकी है.

 NMACC पहुंचा था रोहन

मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि रोहन NMACC के पास क्यों पहुंचा था.  वकील के मुताबिक, रोहन का कहना है कि वह वहां केवल परफ्यूम खरीदने गया था और उसका किसी भी कार्यक्रम से कोई संबंध नहीं था. पुलिस अब उसके वहां जाने की वजह और उसकी गतिविधियों की पूरी जानकारी जुटा रही है.

बॉडीगार्ड के पास था हथियार

रोहन के साथ उसका कथित बॉडीगार्ड दिलीप कुंडे भी मौजूद था. पुलिस के अनुसार, कुंडे पूर्व सेना कर्मी बताया जा रहा है और उसके पास से एक हथियार बरामद किया गया है. अब जांच एजेंसियां यह भी पता कर रही हैं कि हथियार वैध था या नहीं, उसे लेकर चलने की अनुमति थी या नहीं और वह रोहन के साथ किस भूमिका में मौजूद था.

एक आरोपी फरार

मामले में प्रथमेश गणेश बागुल नाम का एक अन्य आरोपी फिलहाल फरार बताया जा रहा है. पुलिस उसकी तलाश कर रही है. इसके अलावा तरुण गुप्ता का नाम भी बचाव पक्ष की ओर से सामने आया है. पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि PMO ई-मेल किसने भेजा, नौकरी का ऑफर किसने दिया और फर्जी डिजिटल पहचान पत्र व अन्य दस्तावेज तैयार करने के पीछे कौन था. जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि क्या यह किसी एक व्यक्ति की धोखाधड़ी थी या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था.

रोहन आरोपी या ठगी का शिकार?

इस पूरे मामले में फिलहाल दो अलग-अलग दावे सामने हैं. पुलिस की रिमांड कॉपी में रोहन पर खुद को PMO अधिकारी बताने और कथित फर्जी पहचान पत्र रखने का आरोप है. वहीं बचाव पक्ष का कहना है कि उसे PMO के नाम पर फर्जी दस्तावेज और ई-मेल देकर गुमराह किया गया और वह खुद ठगी का शिकार हुआ. अब जांच में फर्जी ई-मेल, डिजिटल आईडी, कथित प्रशंसा पत्र और नौकरी के प्रस्ताव की सत्यता सामने आने के बाद ही साफ होगा कि रोहन ने जानबूझकर फर्जी पहचान का इस्तेमाल किया था या वह किसी बड़े फर्जीवाड़े में फंस गया था.

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