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Home > धर्म > Masik Shivratri September 2026 Date: सितंबर में मासिक शिवरात्रि कब है? तारीख से लेकर पूजा के शुभ समय तक जानें सबकुछ

Masik Shivratri September 2026 Date: सितंबर में मासिक शिवरात्रि कब है? तारीख से लेकर पूजा के शुभ समय तक जानें सबकुछ

Masik Shivratri September 2026 Date: सितंबर 2026 की मासिक शिवरात्रि 9 सितंबर, बुधवार को मनाई जाएगी. कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 9 सितंबर दोपहर से शुरू होकर 10 सितंबर सुबह तक रहेगी. रात्रिकालीन महत्व के कारण 9 सितंबर को व्रत रखा जाएगा. दिल्ली में निशीथ पूजा का समय करीब रात 11:55 बजे से 12:41 बजे तक रहेगा.

Written By:
Edited By: Uttam Ojha
Last Updated: 2026-09-08 18:30:31

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Masik Shivratri Kab Hai: भगवान शिव की आराधना के लिए मासिक शिवरात्रि का दिन बेहद शुभ माना जाता है. हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर आने वाली इस शिवरात्रि में रात्रि पूजा का विशेष महत्व बताया गया है. सितंबर 2026 में मासिक शिवरात्रि को लेकर तारीख और पूजा के समय का इंतजार कर रहे भक्तों के लिए पंचांग से स्पष्टता मिल गई है. इस बार मासिक शिवरात्रि का व्रत बुधवार, 9 सितंबर 2026 को रखा जाएगा.

9 सितंबर को रखा जाएगा मासिक शिवरात्रि का व्रत 

वैदिक पंचांग के अनुसार सितंबर में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 9 सितंबर को दोपहर करीब 12:30 बजे शुरू होगी और 10 सितंबर को सुबह 10:33 बजे समाप्त होगी. चूंकि शिवरात्रि में रात्रि के समय पड़ने वाली चतुर्दशी तिथि को विशेष महत्व दिया जाता है, इसलिए व्रत 9 सितंबर को ही रखा जाएगा. यानी भक्तों को इस बार 9 सितंबर की रात भगवान शिव की पूजा करनी होगी. यही वजह है कि पूजा की तैयारी करने वालों के लिए तिथि के साथ रात्रि पूजा का समय जानना भी जरूरी है.

रात में इस समय करें महादेव की पूजा

मासिक शिवरात्रि में निशीथ काल की पूजा को खास माना जाता है. दिल्ली के पंचांग के अनुसार 9 सितंबर की रात निशीथ पूजा का समय लगभग रात 11:55 बजे से 10 सितंबर की रात 12:41 बजे तक रहेगा. अलग-अलग शहरों में सूर्यास्त और स्थानीय समय के अंतर के कारण पूजा के समय में कुछ मिनट का फर्क हो सकता है. इस दौरान भगवान शिव का जल, दूध, बेलपत्र और अन्य पूजन सामग्री से अभिषेक कर श्रद्धापूर्वक पूजा की जा सकती है. भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार शिव मंत्रों का जाप भी कर सकते हैं.

मासिक शिवरात्रि पर क्यों की जाती है शिव पूजा?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मासिक शिवरात्रि भगवान शिव को समर्पित होती है. इस दिन व्रत और पूजा करने से मन को शांति मिलने तथा जीवन की परेशानियां कम होने की मान्यता है. भक्त सुख-शांति, समृद्धि, आरोग्य और मनोकामना पूर्ति की कामना से महादेव की आराधना करते हैं. शिवरात्रि पर दिनभर व्रत रखने के बाद रात्रि में भगवान शिव की पूजा करने की परंपरा भी कई स्थानों पर प्रचलित है. हालांकि व्रत रखने वाले लोग अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार ही उपवास करें.

इन शिव मंत्रों का कर सकते हैं जाप

मासिक शिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा करते समय शिव मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है. भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार इन मंत्रों का जाप कर सकते हैं—

ॐ शिवाय नमः.
ॐ सर्वात्मने नमः.
ॐ त्रिनेत्राय नमः.
ॐ हराय नमः.
ॐ इन्द्रमुखाय नमः.

बेलपत्र अर्पित करते समय इस मंत्र का जाप भी किया जाता है-

ॐ त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रिधायुतम्.
त्रिजन्म पाप संहारम् एक बिल्वं शिवार्पणम्॥

पूजा के बाद करें ये काम

धार्मिक परंपराओं में भगवान शिव की पूजा के बाद जरूरतमंदों को भोजन कराने, दान देने और अपनी क्षमता के अनुसार सेवा करने को भी पुण्यकारी माना गया है. कुछ परंपराओं में ब्राह्मण भोजन के बाद व्रत खोलने का विधान बताया जाता है. मासिक शिवरात्रि का उद्देश्य केवल व्रत रखना ही नहीं, बल्कि श्रद्धा और संयम के साथ भगवान शिव का स्मरण करना भी माना जाता है. इसलिए पूजा के दौरान मन को शांत रखकर महामृत्युंजय मंत्र या पंचाक्षर मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप किया जा सकता है.

ध्यान रखें पूजा के समय की ये खास बात

मासिक शिवरात्रि की तिथि पूरे देश में समान होती है, लेकिन निशीथ काल और पूजा के स्थानीय समय में शहर के अनुसार थोड़ा अंतर आ सकता है. इसलिए यदि आप किसी विशेष शहर में पूजा कर रहे हैं तो स्थानीय पंचांग के अनुसार निशीथ काल देखना बेहतर रहेगा. इस बार चतुर्दशी 9 सितंबर दोपहर से शुरू होकर 10 सितंबर सुबह तक रहेगी, लेकिन रात्रिकालीन महत्व के कारण व्रत और मुख्य पूजा 9 सितंबर को ही होगी.

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Edited By: Uttam Ojha
Last Updated: 2026-09-08 18:30:31

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Masik Shivratri Kab Hai: भगवान शिव की आराधना के लिए मासिक शिवरात्रि का दिन बेहद शुभ माना जाता है. हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर आने वाली इस शिवरात्रि में रात्रि पूजा का विशेष महत्व बताया गया है. सितंबर 2026 में मासिक शिवरात्रि को लेकर तारीख और पूजा के समय का इंतजार कर रहे भक्तों के लिए पंचांग से स्पष्टता मिल गई है. इस बार मासिक शिवरात्रि का व्रत बुधवार, 9 सितंबर 2026 को रखा जाएगा.

9 सितंबर को रखा जाएगा मासिक शिवरात्रि का व्रत 

वैदिक पंचांग के अनुसार सितंबर में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 9 सितंबर को दोपहर करीब 12:30 बजे शुरू होगी और 10 सितंबर को सुबह 10:33 बजे समाप्त होगी. चूंकि शिवरात्रि में रात्रि के समय पड़ने वाली चतुर्दशी तिथि को विशेष महत्व दिया जाता है, इसलिए व्रत 9 सितंबर को ही रखा जाएगा. यानी भक्तों को इस बार 9 सितंबर की रात भगवान शिव की पूजा करनी होगी. यही वजह है कि पूजा की तैयारी करने वालों के लिए तिथि के साथ रात्रि पूजा का समय जानना भी जरूरी है.

रात में इस समय करें महादेव की पूजा

मासिक शिवरात्रि में निशीथ काल की पूजा को खास माना जाता है. दिल्ली के पंचांग के अनुसार 9 सितंबर की रात निशीथ पूजा का समय लगभग रात 11:55 बजे से 10 सितंबर की रात 12:41 बजे तक रहेगा. अलग-अलग शहरों में सूर्यास्त और स्थानीय समय के अंतर के कारण पूजा के समय में कुछ मिनट का फर्क हो सकता है. इस दौरान भगवान शिव का जल, दूध, बेलपत्र और अन्य पूजन सामग्री से अभिषेक कर श्रद्धापूर्वक पूजा की जा सकती है. भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार शिव मंत्रों का जाप भी कर सकते हैं.

मासिक शिवरात्रि पर क्यों की जाती है शिव पूजा?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मासिक शिवरात्रि भगवान शिव को समर्पित होती है. इस दिन व्रत और पूजा करने से मन को शांति मिलने तथा जीवन की परेशानियां कम होने की मान्यता है. भक्त सुख-शांति, समृद्धि, आरोग्य और मनोकामना पूर्ति की कामना से महादेव की आराधना करते हैं. शिवरात्रि पर दिनभर व्रत रखने के बाद रात्रि में भगवान शिव की पूजा करने की परंपरा भी कई स्थानों पर प्रचलित है. हालांकि व्रत रखने वाले लोग अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार ही उपवास करें.

इन शिव मंत्रों का कर सकते हैं जाप

मासिक शिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा करते समय शिव मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है. भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार इन मंत्रों का जाप कर सकते हैं—

ॐ शिवाय नमः.
ॐ सर्वात्मने नमः.
ॐ त्रिनेत्राय नमः.
ॐ हराय नमः.
ॐ इन्द्रमुखाय नमः.

बेलपत्र अर्पित करते समय इस मंत्र का जाप भी किया जाता है-

ॐ त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रिधायुतम्.
त्रिजन्म पाप संहारम् एक बिल्वं शिवार्पणम्॥

पूजा के बाद करें ये काम

धार्मिक परंपराओं में भगवान शिव की पूजा के बाद जरूरतमंदों को भोजन कराने, दान देने और अपनी क्षमता के अनुसार सेवा करने को भी पुण्यकारी माना गया है. कुछ परंपराओं में ब्राह्मण भोजन के बाद व्रत खोलने का विधान बताया जाता है. मासिक शिवरात्रि का उद्देश्य केवल व्रत रखना ही नहीं, बल्कि श्रद्धा और संयम के साथ भगवान शिव का स्मरण करना भी माना जाता है. इसलिए पूजा के दौरान मन को शांत रखकर महामृत्युंजय मंत्र या पंचाक्षर मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप किया जा सकता है.

ध्यान रखें पूजा के समय की ये खास बात

मासिक शिवरात्रि की तिथि पूरे देश में समान होती है, लेकिन निशीथ काल और पूजा के स्थानीय समय में शहर के अनुसार थोड़ा अंतर आ सकता है. इसलिए यदि आप किसी विशेष शहर में पूजा कर रहे हैं तो स्थानीय पंचांग के अनुसार निशीथ काल देखना बेहतर रहेगा. इस बार चतुर्दशी 9 सितंबर दोपहर से शुरू होकर 10 सितंबर सुबह तक रहेगी, लेकिन रात्रिकालीन महत्व के कारण व्रत और मुख्य पूजा 9 सितंबर को ही होगी.

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