दलीप ट्रॉफी 2026 में 6 सितंबर से खिताबी जंग जारी है. फाइनल मुकाबले में ईशान किशन की कप्तानी वाली ईस्ट ज़ोन और तिलक वर्मा की कप्तानी वाली साउथ ज़ोन आमने-सामने हैं. दोनों ही टीमें इस बार ट्रॉफी पर कब्ज़ा जमाने के लिए पूरा ज़ोर लगा रही हैं. लेकिन अगर बात दलीप ट्रॉफी के इतिहास की करें, तो दबदबा ना तो ईशान की टीम का रहा है और ना ही तिलक की टीम का. इस टूर्नामेंट में सबसे ज़्यादा बार ट्रॉफी उठाने का रिकॉर्ड ऋतुराज गायकवाड़ की कप्तानी वाली टीम के नाम है, आइए जानते हैं दलीप ट्रॉफी का पूरा इतिहास, पहला विजेता और किस टीम का रहा है सबसे ज़्यादा दबदबा.
पहला खिताब किसने जीता था?
दलीप ट्रॉफी का पहला सीजन 1961-62 में खेला गया था और वेस्ट ज़ोन ने इसका पहला ऐतिहासिक खिताब अपने नाम किया था. मुंबई के ब्रेबॉर्न स्टेडियम में खेले गए फाइनल मुकाबले में वेस्ट ज़ोन ने साउथ ज़ोन को 10 विकेट से हराया था.
सबसे ज़्यादा बार किस टीम ने जीता खिताब?
दलीप ट्रॉफी के इतिहास में वेस्ट ज़ोन की टीम सबसे सफल रही है.
- वेस्ट ज़ोन: 19 बार
- नॉर्थ ज़ोन: 18 बार
- साउथ ज़ोन: 13 बार
- सेंट्रल ज़ोन: 7 बार
- ईस्ट ज़ोन: 2 बार
(नोट: कुछ मौकों पर टीमों ने संयुक्त रूप से भी ट्रॉफी शेयर की है.)
दलीप ट्रॉफी का नाम किसके नाम पर पड़ा?
दलीप ट्रॉफी भारत की सबसे प्रमुख फर्स्ट-क्लास क्रिकेट प्रतियोगिताओं में से एक है. इस टूर्नामेंट का नाम कुमार श्री दलीपसिंहजी के सम्मान में रखा गया था. दलीपसिंहजी भारतीय मूल के एक महान खिलाड़ी थे, जिन्होंने 1929 से 1931 के बीच इंग्लैंड के लिए टेस्ट क्रिकेट खेला था. वह अपनी बेहतरीन बल्लेबाजी तकनीक और शैली के लिए जाने जाते थे. वह दिग्गज क्रिकेटर कुमार श्री रणजीतसिंहजी के भतीजे थे, जिनके नाम पर ‘रणजी ट्रॉफी’ खेली जाती है.
बीसीसीआई (BCCI) ने 1961-62 के सत्र में इस टूर्नामेंट की शुरुआत की थी. इसका मुख्य उद्देश्य देश के अलग-अलग ज़ोन के बेहतरीन खिलाड़ियों को एक साथ लाना और राष्ट्रीय टीम के लिए नई प्रतिभाओं को चुनना था.
28 राज्यों से कैसे बनती हैं केवल 6 टीमें?
दलीप ट्रॉफी राज्यों की टीम के बीच नहीं, बल्कि क्षेत्र (ज़ोन) के आधार पर खेली जाती है. इसमें पूरे देश को 6 क्रिकेट ज़ोन (नॉर्थ, साउथ, ईस्ट, वेस्ट, सेंट्रल और नॉर्थ-ईस्ट) में बांटा गया है.
रणजी ट्रॉफी में प्रदर्शन करने वाले सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को चुनकर इन 6 ज़ोन की टीमें बनाई जाती हैं. इससे प्रतियोगिता का स्तर काफी ऊंचा हो जाता है और भारतीय चयनकर्ताओं को राष्ट्रीय टीम के लिए सही खिलाड़ियों को परखने में मदद मिलती है.