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Home > क्रिकेट > Duleep Trophy History: भारत में जन्में, इंग्लैंड के लिए खेला क्रिकेट… फिर BCCI ने क्यों दी इतनी बड़ी उपलब्धि? जानिए कौन थे दलीप सिंहजी

Duleep Trophy History: भारत में जन्में, इंग्लैंड के लिए खेला क्रिकेट… फिर BCCI ने क्यों दी इतनी बड़ी उपलब्धि? जानिए कौन थे दलीप सिंहजी

Who is Duleep Singhji: जब भी घरेलू क्रिकेट में दलीप ट्रॉफी का जिक्र होता है, तो अक्सर फैंस के मन में यह सवाल आता है कि आखिर किसके नाम पर यह टूर्नामेंट खेला जाता है. भारत में जन्म लेने के बाद भी इंग्लैंड के लिए क्रिकेट खेलने वाले दलीप सिंहजी की यह कहानी बेहद खास है. दलीप सिंहजी के शानदार रिकॉर्ड्स और इस टूर्नामेंट के पूरे इतिहास को समझने के लिए पढ़ें यह खास रिपोर्ट.

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Last Updated: 2026-09-08 15:21:42

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जब भी भारत का घरेलू क्रिकेट सीजन शुरू होता है और ‘दलीप ट्रॉफी’ का नाम सामने आता है, तो फैंस के मन में यह सवाल जरूर कौंधता है कि आखिर इस टूर्नामेंट को ‘दलीप ट्रॉफी’ ही क्यों कहा जाता है? इसके नाम के पीछे की असल वजह क्या है और कौन थे वो क्रिकेटर, जिनके सम्मान में बीसीसीआई पिछले छह दशकों से यह रेड बॉल टूर्नामेंट आयोजित कर रहा है? भारत में पैदा होकर इंग्लैंड के लिए गदर मचाने वाले इस महान खिलाड़ी की कहानी बेहद दिलचस्प है. आइए जानते हैं इसके पीछे का पूरा इतिहास.

हर साल  दलीप ट्रॉफी भारत के घरेलू क्रिकेट सीजन की शुरुआत का एक अहम हिस्सा है. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) द्वारा आयोजित यह टूर्नामेंट लाल गेंद (रेड बॉल) से खेला जाता है जो कि चार दिवसीय टूर्नामेंट है. इस टूर्नामेंट का नाम भारत के महान क्रिकेटर दलीप सिंहजी के सम्मान में रखा गया है.

कौन थे दलीप सिंहजी

इस टूर्नामेंट का नाम भारत के महान क्रिकेटर दलीप सिंहजी के सम्मान में रखा गया है. दलीप सिंहजी का जन्म 1905 में काठियावाड़ (गुजरात) के एक शाही परिवार में हुआ था. मशहूर क्रिकेटर रंजीत सिंहजी उनके चाचा थे. जिनके नाम पर ‘रणजी ट्रॉफी’ का नाम रखा गया है.

इंग्लैंड के लिए खेला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट

पढ़ाई के लिए इंग्लैंड गए दलीप सिंहजी ने 1926 में काउंटी क्रिकेट टीम ‘ससेक्स’ से खेलना शुरू किया. भारत में जन्मे होने के बावजूद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इंग्लैंड की टीम का प्रतिनिधित्व किया.

1930 में उन्होंने ससेक्स की ओर से खेलते हुए Northamptonshire के खिलाफ सिर्फ साढ़े पांच घंटे में 333 रनों की ऐतिहासिक पारी खेली। यह आज भी यह आंकड़ा ससेक्स टीम के इतिहास में किसी बल्लेबाज का सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर है.

दलीप सिंहजी का शानदार क्रिकेट करियर

  • टेस्ट क्रिकेट: 12 टेस्ट मैचों में 58.52 की औसत से 995 रन (3 शतक और 5 अर्धशतक).
  • फर्स्ट-क्लास क्रिकेट: 205 मैचों में 50.43 की औसत से 15,485 रन (50 शतक).

दलीप सिंहजी की वतन वापसी

भारत लौटने के बाद वह भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य चयनकर्ता बने. इसके अलावा, 1949 में उन्होंने भारतीय विदेश सेवा (IFS) जॉइन की और ऑस्ट्रेलिया व न्यूजीलैंड में भारत के उच्चायुक्त रहे. 5 दिसंबर 1959 को उनका निधन हो गया.

दलीप ट्रॉफी का इतिहास

उनके निधन के बाद BCCI ने दलीप ट्रॉफी की शुरुआत 1961-62 के सीजन में की थी. शुरुआती दौर में यह टूर्नामेंट भारत के 5 अलग-अलग जोनों (उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम और मध्य जोन) की टीमों के बीच खेला जाता था. इसके उद्घाटन सीजन के फाइनल में वेस्ट जोन (West Zone) ने साउथ जोन (South Zone) को 10 विकेट से हराकर पहला खिताब अपने नाम किया था.

फॉर्मेट और मैच के नियम

इस टूर्नामेंट के सभी मैच चार दिवसीय फॉर्मेट यानी चार दिनों के होते हैं. राउंड-रॉबिन सिस्टम के तहत टूर्नामेंट में भाग लेने वाली हर टीम ग्रुप चरण में बाकी तीनों टीमों के खिलाफ एक-एक मैच खेलती है. सभी मैच खत्म होने के बाद अंक तालिका में सबसे ज्यादा पॉइंट्स हासिल करने वाली टीम को विजेता घोषित किया जाता है.

BCCI ने क्यों दी इतनी बड़ी उपलब्धि?

दलीप सिंह भले ही इंग्लैंड के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेले, लेकिन भारतीय क्रिकेट के विकास और पहचान में उनके और उनके परिवार का योगदान रहा है. देश वापसी के बाद उन्होंने भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य चयनकर्ता के रूप में अपनी सेवाएं दीं और प्रतिभाओं को तराशा. इसके अलावा, एक उच्चायुक्त (High Commissioner) के रूप में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का मान बढ़ाया। BCCI ने उनके भारतीय क्रिकेट को दी गई दिशा को हमेशा अमर रखने के लिए 1961-62 में इस ऐतिहासिक रेड-बॉल टूर्नामेंट का नाम ‘दलीप ट्रॉफी’ रखकर उन्हें यह सर्वोच्च सम्मान दिया.

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जब भी भारत का घरेलू क्रिकेट सीजन शुरू होता है और ‘दलीप ट्रॉफी’ का नाम सामने आता है, तो फैंस के मन में यह सवाल जरूर कौंधता है कि आखिर इस टूर्नामेंट को ‘दलीप ट्रॉफी’ ही क्यों कहा जाता है? इसके नाम के पीछे की असल वजह क्या है और कौन थे वो क्रिकेटर, जिनके सम्मान में बीसीसीआई पिछले छह दशकों से यह रेड बॉल टूर्नामेंट आयोजित कर रहा है? भारत में पैदा होकर इंग्लैंड के लिए गदर मचाने वाले इस महान खिलाड़ी की कहानी बेहद दिलचस्प है. आइए जानते हैं इसके पीछे का पूरा इतिहास.

हर साल  दलीप ट्रॉफी भारत के घरेलू क्रिकेट सीजन की शुरुआत का एक अहम हिस्सा है. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) द्वारा आयोजित यह टूर्नामेंट लाल गेंद (रेड बॉल) से खेला जाता है जो कि चार दिवसीय टूर्नामेंट है. इस टूर्नामेंट का नाम भारत के महान क्रिकेटर दलीप सिंहजी के सम्मान में रखा गया है.

कौन थे दलीप सिंहजी

इस टूर्नामेंट का नाम भारत के महान क्रिकेटर दलीप सिंहजी के सम्मान में रखा गया है. दलीप सिंहजी का जन्म 1905 में काठियावाड़ (गुजरात) के एक शाही परिवार में हुआ था. मशहूर क्रिकेटर रंजीत सिंहजी उनके चाचा थे. जिनके नाम पर ‘रणजी ट्रॉफी’ का नाम रखा गया है.

इंग्लैंड के लिए खेला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट

पढ़ाई के लिए इंग्लैंड गए दलीप सिंहजी ने 1926 में काउंटी क्रिकेट टीम ‘ससेक्स’ से खेलना शुरू किया. भारत में जन्मे होने के बावजूद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इंग्लैंड की टीम का प्रतिनिधित्व किया.

1930 में उन्होंने ससेक्स की ओर से खेलते हुए Northamptonshire के खिलाफ सिर्फ साढ़े पांच घंटे में 333 रनों की ऐतिहासिक पारी खेली। यह आज भी यह आंकड़ा ससेक्स टीम के इतिहास में किसी बल्लेबाज का सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर है.

दलीप सिंहजी का शानदार क्रिकेट करियर

  • टेस्ट क्रिकेट: 12 टेस्ट मैचों में 58.52 की औसत से 995 रन (3 शतक और 5 अर्धशतक).
  • फर्स्ट-क्लास क्रिकेट: 205 मैचों में 50.43 की औसत से 15,485 रन (50 शतक).

दलीप सिंहजी की वतन वापसी

भारत लौटने के बाद वह भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य चयनकर्ता बने. इसके अलावा, 1949 में उन्होंने भारतीय विदेश सेवा (IFS) जॉइन की और ऑस्ट्रेलिया व न्यूजीलैंड में भारत के उच्चायुक्त रहे. 5 दिसंबर 1959 को उनका निधन हो गया.

दलीप ट्रॉफी का इतिहास

उनके निधन के बाद BCCI ने दलीप ट्रॉफी की शुरुआत 1961-62 के सीजन में की थी. शुरुआती दौर में यह टूर्नामेंट भारत के 5 अलग-अलग जोनों (उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम और मध्य जोन) की टीमों के बीच खेला जाता था. इसके उद्घाटन सीजन के फाइनल में वेस्ट जोन (West Zone) ने साउथ जोन (South Zone) को 10 विकेट से हराकर पहला खिताब अपने नाम किया था.

फॉर्मेट और मैच के नियम

इस टूर्नामेंट के सभी मैच चार दिवसीय फॉर्मेट यानी चार दिनों के होते हैं. राउंड-रॉबिन सिस्टम के तहत टूर्नामेंट में भाग लेने वाली हर टीम ग्रुप चरण में बाकी तीनों टीमों के खिलाफ एक-एक मैच खेलती है. सभी मैच खत्म होने के बाद अंक तालिका में सबसे ज्यादा पॉइंट्स हासिल करने वाली टीम को विजेता घोषित किया जाता है.

BCCI ने क्यों दी इतनी बड़ी उपलब्धि?

दलीप सिंह भले ही इंग्लैंड के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेले, लेकिन भारतीय क्रिकेट के विकास और पहचान में उनके और उनके परिवार का योगदान रहा है. देश वापसी के बाद उन्होंने भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य चयनकर्ता के रूप में अपनी सेवाएं दीं और प्रतिभाओं को तराशा. इसके अलावा, एक उच्चायुक्त (High Commissioner) के रूप में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का मान बढ़ाया। BCCI ने उनके भारतीय क्रिकेट को दी गई दिशा को हमेशा अमर रखने के लिए 1961-62 में इस ऐतिहासिक रेड-बॉल टूर्नामेंट का नाम ‘दलीप ट्रॉफी’ रखकर उन्हें यह सर्वोच्च सम्मान दिया.

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