Rajasthan Municipal Election Results: राजस्थान नगर निकाय चुनाव के नतीजों में बीजेपी ने 41% वार्डों पर जीत के साथ अपना दबदबा साबित किया है, वहीं कांग्रेस को बड़ा झटका लगा. परिसीमन के बाद बदले इस सियासी समीकरण में किसे फायदा हुआ और किसे नुकसान? RLP, CPI(M) और निर्दलीयों के प्रदर्शन से लेकर वोट शेयर के पूरे गणित को आसान भाषा में यहां समझें.
Rajasthan Nikay Chunav Result: 41% सीटों पर कब्जा कर चमकी बीजेपी, कांग्रेस को बड़ा झटका; जानें किसे हुआ फायदा और किसे नुकसान!
राजस्थान के नगर निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपना दबदबा बनाए रखा है. इस चुनाव में बीजेपी ने कुल सीटों के करीब 41% वार्ड जीतकर राज्य की राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत की है, वहीं कांग्रेस केवल 35% वार्ड हासिल कर पाई. नतीजों में बीजेपी ने 4,179 वार्डों पर जीत हासिल की. कांग्रेस के खाते में 3,613 वार्ड आए और 2,273 वार्डों पर निर्दलीय उम्मीदवार जीते.
डीलिमिटेशन (परिसीमन) की वजह से सीटें बढ़ीं, जिसका सीधा फायदा बीजेपी को मिला. पिछले चुनावों के मुकाबले बीजेपी की सीटों में करीब 5% का इजाफा हुआ, जबकि कांग्रेस को 5% का नुकसान झेलना पड़ा. इसके अलावा, आम आदमी पार्टी (आप), सीपीआई(एम) और हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) ने भी अपनी जगह बनाई है.
राजस्थान में यह नगर निकाय चुनाव 309 निकायों के कुल 10,167 वार्डों में कराए गए. इनमें 10 नगर निगम, 47 नगर परिषद और 200 से अधिक नगरपालिकाएं शामिल रहीं. मतदान दो चरणों में 9 और 11 सितंबर को हुआ.
चुनाव में 37 महिलाओं समेत 77 पार्षद निर्विरोध चुने गए थे, जिसके बाद बाकी बची सीटों पर वोट डाले गए. 14 सितंबर को मतगणना हुई और शाम तक सभी नतीजे घोषित कर दिए गए.
राजस्थान में निकाय चुनाव पहले 2019 से 2021 के बीच चार चरणों में होने तय थे, लेकिन परिसीमन के बाद 2,770 नए वार्ड बनने से चुनावी समीकरण बदल गया. इससे कुल वार्डों की संख्या में 37.1% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई. पहले जहां 7,474 वार्ड थे, वहीं इस बार यह आंकड़ा 10,000 के पार पहुंच गया.
पिछले निकाय चुनावों में कांग्रेस ने 3,042 सीटें जीती थीं, जो इस बार बढ़कर 3,613 हो गईं (18.7% की बढ़ोतरी). दूसरी तरफ, बीजेपी ने पिछली बार 2,666 वार्ड जीते थे, जो इस बार बढ़कर 4,179 हो गए. इस तरह बीजेपी की सीटों में 56.8% का शानदार उछाल आया. निर्दलीय उम्मीदवारों ने पिछली बार 1,672 सीटें जीती थीं, जबकि इस बार 2,273 निर्दलीय जीते—यानी उनकी सीटों में भी 35.9% की बढ़ोतरी हुई.
कांग्रेस का वोट शेयर पिछले चुनाव के 40.7% से घटकर इस बार 35.3% पर आ गया, यानी पार्टी को 5.4% का सीधा नुकसान हुआ. इसके उलट बीजेपी का वोट शेयर 35.7% से बढ़कर 40.8% हो गया, यानी उसे 5.1% का फायदा मिला. निर्दलीय पार्षदों का जीत प्रतिशत पिछली बार के 22.4% से मामूली घटकर 22.2% (0.2% की कमी) रहा. नतीजतन, कांग्रेस को निर्दलीयों से भी ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा.
बीजेपी और कांग्रेस के अलावा छोटे दलों ने भी अपनी स्थिति सुधारी है:
आरएलपी (RLP): नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल की पार्टी को पिछली बार सिर्फ 14 सीटें मिली थीं, जो इस बार बढ़कर 63 हो गईं. इसमें 350% का बड़ा उछाल देखने को मिला.
सीपीआई(एम) [CPI(M)]: पार्टी ने पिछली बार 8 सीटें जीती थीं, जबकि इस बार 38 सीटों पर परचम लहराया (375% की बढ़ोतरी).
बीएसपी (BSP): बहुजन समाज पार्टी को झटका लगा. पिछली बार मिली 24 सीटों के मुकाबले इस बार पार्टी केवल 19 सीटों पर सिमट गई, यानी उसकी सीटों में 20.8% की कमी आई.
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