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Samajwadi Party on Women Reservation Bill: समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party), जिसने लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन बिलों का विरोध किया था, ने मंगलवार को एक बड़ी घोषणा की है. महिला आरक्षण संशोधन बिल का विरोध करते हुए, पार्टी सांसद धर्मेंद्र यादव ने सवाल उठाया कि इसमें OBC और मुस्लिम महिलाओं के लिए कोई प्रावधान क्यों शामिल नहीं किया गया है. इस मुद्दे पर उनके और साथ ही अखिलेश यादव तथा गृह मंत्री अमित शाह के बीच तीखी बहस भी हुई.
अब, इस मामले पर बात करते हुए, धर्मेंद्र यादव ने घोषणा की है कि उनकी पार्टी विशेष रूप से मुस्लिम और OBC महिलाओं के लिए एक ‘निजी सदस्य बिल’ (Private Member’s Bill) पेश करेगी. यह बिल मांग करेगा कि महिला आरक्षण के दायरे में मुस्लिम और OBC महिलाओं के लिए एक अलग कोटा आवंटित किया जाए, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि उनकी सीटें अलग से आरक्षित हों.
धर्मेंद्र यादव ने क्या कहा?
PTI से बात करते हुए, धर्मेंद्र यादव ने कहा कि विपक्ष ने 2023 में महिला आरक्षण बिल का समर्थन किया था. हालांकि, सरकार को इसके लिए आवश्यक अधिसूचना जारी करने में तीन साल लग गए. उन्होंने सवाल उठाया कि जब बिल सर्वसम्मति से पारित हो गया था, तो अधिसूचना जारी करने में इतना समय क्यों लगा? उन्होंने आगे तर्क दिया कि यदि आरक्षण को केवल 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही लागू किया जाना है, तो फिर शुरू में एक नया बिल लाने की क्या आवश्यकता थी?
इसके अलावा, उन्होंने परिसीमन के मुद्दे पर भी सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने जोर देकर कहा कि जिसने भी जम्मू और कश्मीर तथा असम में परिसीमन प्रक्रिया को करीब से देखा है, वह सरकार की असली रणनीति को पहले ही समझ चुका है. उन्होंने दावा किया कि परिसीमन प्रक्रिया के बाद, इन राज्यों में विपक्ष लगभग पूरी तरह से समाप्त हो गया है.
जम्मू-कश्मीर और असम में परिसीमन के बाद विपक्ष टूट गया
धर्मेंद्र यादव ने टिप्पणी की कि जम्मू और कश्मीर तथा असम में परिसीमन प्रक्रियाओं के बाद विपक्ष का विश्वास टूट गया है. परिणामस्वरूप, अब परिसीमन प्रक्रिया के पीछे सरकार के असली इरादों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं. उन्होंने वर्तमान में पेश किए जा रहे महिला आरक्षण संशोधन बिल के संबंध में अपनी आलोचना दोहराई, और पूछा कि इसमें OBC और मुस्लिम महिलाओं के लिए बिल्कुल भी प्रावधान क्यों नहीं हैं?
उन्होंने इसे बिल की सबसे बड़ी कमी बताया. उन्होंने घोषणा की कि उनकी पार्टी इस कमी को दूर करने के लिए आगे आएगी. समाजवादी पार्टी मुस्लिम और OBC महिलाओं के लिए कोटे के भीतर कोटा की मांग करते हुए एक ‘निजी सदस्य बिल’ पेश करेगी. चाहे विपक्ष का हो या सत्ताधारी पार्टी का, संसद का कोई भी सदस्य (MP) जिसके पास कोई मंत्री पद नहीं है, संसद में ‘निजी सदस्य विधेयक’ (Private Member’s Bill) पेश करने का हकदार है.
संसद में ‘निजी सदस्य विधेयक’ कौन पेश कर सकता है?
आमतौर पर, ऐसे विधेयक संसद सदस्यों द्वारा विशेष रूप से जनहित के मुद्दों को उठाने के उद्देश्य से पेश किए जाते हैं. संसद के विशेष सत्र के दौरान, धर्मेंद्र यादव ने लोकसभा में यह मांग उठाई कि मुस्लिम और OBC महिलाओं को भी महिला आरक्षण के दायरे में शामिल किया जाए. इसके जवाब में, अमित शाह ने कहा कि मुसलमानों को आरक्षण नहीं दिया जा सकता, क्योंकि संविधान में धर्म के आधार पर आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है. इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा कि यदि समाजवादी पार्टी (SP) वास्तव में इस मुद्दे को लेकर गंभीर है, तो उसे अपने सभी चुनावी टिकट केवल मुसलमानों को ही देने चाहिए और यदि वह ऐसा करती है, तो हमें कोई आपत्ति नहीं होगी.