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घोड़ी चढ़ने से पहले ‘दूध पिलाई’ रस्म, आईपीएस केके विश्नोई ने भी निभाई परंपरा, क्या है धार्मिक महत्व

Doodh Pilai Ritual: राजस्थान में शादी से पहले निभाई जाने वाली ऐसी ही एक रस्म है- जिसका नाम है ‘दूध पिलाई’. इस परंपरा को हाल ही में शादी के बंधन में बंधे आईपीएस केके विश्नोई ने भी निभाया था. इस रस्म की चर्चा खूब हुई. अब सवाल है कि आखिर, राजस्थान की ‘दूध पिलाई’ रस्म क्या है? क्या है इसका धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व? आइए जानते हैं इस बारे में-

Doodh Pilai Ritual: भारतीय संस्कृति में रस्में, रिवाज और परंपराएं जीवन का अभिन्न अंग हैं, जो पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही हैं. ये परंपराएं हमारे जीवन के हर महत्वपूर्ण पड़ाव, यानी जन्म से लेकर मृत्यु तक के संस्कार का हिस्सा हैं. क्योंकि, ये परंपराएं तो है जो सामाजिक सामंजस्य, पहचान और सम्मान को बढ़ावा देती हैं. हां ये जरूर है कि, हो सकता है कि हर जगह की अपनी कोई अलग परंपरा हो. शादी-विवाह में हाथ जोड़कर नमस्ते करना, बड़ों के पैर छूना, अतिथियों को सम्मान सहित बैठाना और विवाह में सप्तपदी (सात कदम) जैसी रस्में तो बहुत कॉमन हैं. कई जगह तो वास्तव में ऐसी अनोखी परंपराएं निभाई जाती हैं, जो चर्चा का विषय बन जाती हैं. राजस्थान में शादी से पहले निभाई जाने वाली ऐसी ही एक रस्म है- जिसका नाम है ‘दूध पिलाई’. इस परंपरा को हाल ही में शादी के बंधन में बंधे आईपीएस केके विश्नोई ने भी निभाया था. इस रस्म की चर्चा खूब हुई. अब सवाल है कि आखिर, राजस्थान की ‘दूध पिलाई’ रस्म क्या है? क्या है इसका धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व? आइए जानते हैं इस बारे में-      

आईपीएस केके विश्नोई ने निभाई ‘दूध पिलाई’ रस्म

रविवार यानी 29 मार्च को केके विश्नोई की बारात बाड़मेर से जोधपुर के लिए रवाना हुई थी. इसी शाही शादी से पहले एक पुरानी और बेहद निजी रस्म ने खूब चर्चा बटोरी है. इसका नाम है ‘दूध पिलाई’. शादी से पहले के वायरल वीडियो में केके बिश्नोई अपनी मां का दूध पीते दिख रहे हैं. नेटिजंस इस रस्म को लेकर काफी हैरानी जता रहे हैं. तो चलिए बताते हैं आपको शादी में क्यों की जाती है दूध पिलाई की रस्म.

‘मां के पल्लू में हम बच्चे ही बने रहते हैं’

बता दें कि, शादी के लिए तैयार खड़े दूल्हे को उसकी मां बारात निकलने से ठीक पहले प्रतीकात्मक रूप से स्तनपान कराती है. स्थानीय लोगों के लिए यह मां का दिल को छू लेने वाला और भावुक आशीर्वाद है. जो उसे बचपन के प्यार और मां के पोषण की आखिरी निशानी देता है. बता दें कि, यह परंपरा राजे-रजवाड़ों के काल से चली आ रही है और मुख्य रूप से शीतला माता मंदिर से जुड़ी हुई है. स्थानीय लोगों का मानना है कि, ‘मां के पल्लू में हम बच्चे ही बने रहते हैं’. इसीलिए यह परंपरा निभाई जाती है.

‘दूध पिलाई’ रस्म का धार्मिक महत्व

जानकारी के लिए बता दें कि, राजस्थान में ‘दूध पिलाई’ रस्म की जड़ें बिजोलिया के शीतला माता मंदिर में हैं, जहां विवाह से पूर्व पूजा-अर्चना के दौरान यह रस्म निभाई जाती है. मान्यताओं के अनुसार, इस रस्म के दौरान मां शीतला माता से प्रार्थना करती है कि उसने अपने बेटे को दूध पिलाकर और खून से सींचकर बड़ा किया है, अब वह शादी के योग्य हो गया है, इसलिए देवी मां और भावी बहू की रक्षा करें.

…ताकि याद रहे मां का बलिदान

‘दूध पिलाई’ रस्म न सिर्फ धार्मिक बल्कि सामाजिक और मनोवैज्ञानिक कारण भी हैं. यह याद दिलाती है मां का बलिदान यह परंपरा राजस्थान के राजसी परिवारों से प्रारंभ हुई, जहां दूल्हे को विवाह से पहले मां के आशीर्वाद से नव जीवन की शुरुआत करने का अवसर मिलता था. ऐतिहासिक दृष्टि से, यह रस्म मातृभक्ति और संतान के प्रति मां के बलिदान को याद दिलाती है. पुराने समय में यह वास्तविक रूप से की जाती थी, लेकिन समय के साथ यह सांकेतिक हो गई.

इस परंपरा से मिलती-जुलती रस्में

इस रस्म से मिलती जुलती परंपराएं हरियाणा, पश्चिमी नेपाल और बिहार के कुछ हिस्सों में भी प्रचलित हैं. दुल्हनों के लिए कोई समान अनुष्ठान नहीं है. इन जगहों पर दूल्हे को कभी-कभी उसकी मां या किसी महिला रिश्तेदार द्वारा प्रतीकात्मक रूप से दूध पिलाया जाता है. ताकि बचपन का अंत दिखाया जा सके और शादी से पहले उसका आशीर्वाद प्राप्त किया जा सके. ये रस्में मां की देखभाल और सुरक्षा को दर्शाती हैं और आमतौर पर शादी की बारात के दौरान या उससे ठीक पहले की जाती हैं.

रस्म का सांस्कृतिक महत्व

ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो यह रस्म लड़कपन के अंत का प्रतीक है. बता दें कि, दूल्हा शाही पोशाक पहनकर अक्सर तलवारें या कटार लेकर और धूमधाम से घर से निकलता था. समय के साथ ये सैन्य इशारे औपचारिक परंपराओं में विकसित हो गए, जबकि दूध पिलाई मातृ देखभाल और पारिवारिक बंधनों का प्रतीक बनी रही. हालांकि, आईपीएस केके विश्नोई ने सभी परंपराओं को फॉलो किया. 

रस्म का विरोध भी हो चुका

बता दें कि, कई लोगों ने इस तरह के अंतरंग हाव-भावों से सार्वजनिक सहजता पर सवाल उठाए. एक्स पर एक यूजर ने कहा, ‘परंपरा सही हो सकती है, लेकिन एक मां की गरिमा से तब खिलवाड़ होता है जब कुछ लोग उसका वीडियो बनाकर इंटरनेट पर डाल देते हैं.

Lalit Kumar

9 साल से ज्यादा के लंबे करियर में ललित कुमार ने दैनिक जागरण, दैनिक भाष्कर, हिन्दुस्तान और नेटवर्क 18 जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, समाज, कला व संस्कृति के अलावा जटिल स्वास्थ्य विषयों और जीवनशैली से जुड़ी समस्याओं का विश्लेषण उनकी विशेषता है। खबरों का डीप एनालिसिस उनकी पहचान है। हर खबर को आसान भाषा में पाठक तक पहुंचाना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। वर्तमान में वे देश के सबसे बड़े मीडिया संस्थानों में एक इंडिया न्यूज (डिजिटल) में लाइफस्टाइल, हेल्थ, धर्म और एस्ट्रो टीम का हिस्सा हैं।

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