Tamil Nadu Politics: तमिलनाडु में सरकारी कर्ज को लेकर सियासत तेज हो गई है. सीएम विजय कम कर्ज लेने को अपनी वित्तीय कामयाबी के तौर पर पेश कर रहे हैं. तमिलनाडु के पूर्व वित्त मंत्री और DMK नेता थंगम थेन्नारासु ने सरकार पर कई आरोप लगाए हैं.
थंगम थेन्नारसु ने सीएम विजय पर निशाना साधा
Tamil Nadu Politics: तमिलनाडु में सरकारी कर्ज को लेकर राजनीति गरमा गई है. मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की TVK सरकार का दावा है कि उसने कर्ज लेना कम किया है लेकिन DMK ने सरकार के इस दावे पर सवाल उठाए हैं. पूर्व वित्त मंत्री और DMK नेता थंगम थेन्नारासु का आरोप है कि सरकार ने कर्ज इसलिए कम लिया क्योंकि विकास कार्यों पर खर्च घटाया जा रहा है और ठेकेदारों का पैसा भी रोका जा सकता है. उन्होंने सरकार से मांग की है कि वह बताएं कि अप्रैल से सितंबर के बीच कितना पैसा खर्च हुआ और विकास कार्यों पर कितनी रकम लगाई गई.
विवाद की शुरुआत उन रिपोर्टों से हुई, जिनमें दावा किया गया कि चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में तमिलनाडु ने पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले सरकारी बॉन्ड के जरिए 21 प्रतिशत कम कर्ज लिया. TVK सरकार इसे अपनी वित्तीय स्थिति बेहतर होने के संकेत के रूप में पेश कर रही है. हालांकि, थेन्नारासु का कहना है कि केवल कम कर्ज लेने से सरकार की आर्थिक सेहत का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता.
DMK नेता ने सवाल उठाया कि सरकार को यह भी बताना चाहिए कि अप्रैल से सितंबर के बीच विकास योजनाओं और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर कितना पैसा खर्च किया गया. उनका कहना है कि अगर सरकार ने सड़कों, मेट्रो और दूसरी परियोजनाओं पर खर्च घटाया है या काम पूरा होने के बाद भी ठेकेदारों को भुगतान नहीं किया है, तो कर्ज में आई कमी को बड़ी उपलब्धि बताना सही नहीं होगा.
थेन्नारासु ने पिछली DMK सरकार के कार्यकाल का हवाला देते हुए कहा कि 2025-26 के बजट में पूंजीगत खर्च के लिए 57,231 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे. उनके मुताबिक, CAG के अनंतिम मासिक खातों के अनुसार, अप्रैल से सितंबर 2025 के दौरान मेट्रो रेल सहित प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर 13,002.22 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे. उन्होंने TVK सरकार से पूछा कि मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही में विकास कार्यों पर वास्तविक खर्च कितना हुआ है. उनका कहना है कि सरकार को सिर्फ कर्ज के आंकड़े नहीं बल्कि खर्च और परियोजनाओं की प्रगति का ब्योरा भी देना चाहिए.
DMK नेता ने आरोप लगाया कि सरकार बकाया भुगतान रोककर अपने पास नकदी बचाए रख सकती है लेकिन इसे वास्तविक बचत नहीं कहा जा सकता. उन्होंने सवाल किया कि क्या परियोजनाओं में देरी करने और ठेकेदारों का पैसा रोकने के बाद कम कर्ज लेने का श्रेय लेना वित्तीय प्रबंधन कहलाएगा? थेन्नारासु ने यह भी दावा किया कि हजारों करोड़ रुपये के टेंडर रद्द किए गए हैं. उनके अनुसार, विकास कार्यों की रफ्तार धीमी होने से सड़कें खराब हालत में हैं, निर्माण परियोजनाएं अधूरी पड़ी हैं और रोजगार पर भी असर पड़ा है.
थेन्नारासु ने सरकार की कर्ज योजना पर भी सवाल उठाए. उनके मुताबिक, TVK सरकार अक्टूबर से दिसंबर की तिमाही में 48,000 करोड़ रुपये कर्ज लेने की योजना बना रही है. यह पिछली तिमाही में जुटाए गए 23,500 करोड़ रुपये से दोगुने से भी ज्यादा है.
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