Countries That Manufacture Fighter Jet Engines: दुनिया में सिर्फ कुछ ही देश ऐसे हैं जो अपने दम पर फाइटर जेट इंजनों को बना सकते हैं. इनमें अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और चीन शामिल हैं. ये देश अपने सैन्य और नागरिक विमान के लिए खुद इंजन डिजाइन, डेवलप और प्रोड्यूस करते हैं.
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Countries That Manufacture Fighter Jet Engines: जेट इंजन किसी भी विमान का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है. इनको बनाने में एक कठिन काम होता है. इंजन डिजाइन से लेकर प्रोडक्शन तक करने के लिए दुनिया में सिर्फ कुछ देशों के पास ही यह क्षमता है. आइए जानते हैं कौन से देश हैं जो इस क्षेत्र में सबसे आगे हैं.
अमेरिका जेट इंजन निर्माण में सबसे बड़ा खिलाड़ी है. इसकी कंपनियां, जीई एयरोस्पेस और प्रैट एंड व्हिटनी दुनिया भर के कई देशों को इंजन की आपूर्ति करती है. जीई एयरोस्पेस बोइंग 777 और 787 जैसे बड़े विमानों के लिए इंजन बनाती है. प्रैट एंड व्हिटनी वर्तमान में छोटे विमान और लड़ाकू विमान के लिए इंजन बनाती है. सभी अमेरिकी लड़ाकू विमान जैसे F-15, F-16, F-22 और F-35, इन कंपनियों के इंजन में लगे हुए है.
ब्रिटेन की रोल्स-रॉयस दुनिया की सबसे विश्वसनीय इंजन निर्मात में से एक है. यह एयरबस A330neo और A350 जैसे विमान के लिए इंजन बनाती है. गौरतलब है कि रोल्स-रॉयस के इंजन यूरोफाइटर टाइफून और F-35B लड़ाकू विमान में भी इस्तेमाल होता हैं. यह कंपनी नौसेना के जहाज के लिए गैस टर्बाइन इंजन भी बनाती है.
फ्रांस की सबसे प्रसिद्ध इंजन कंपनी सफ्रान है. जो GE एयरोस्पेस के साथ CFM इंटरनेशनल संयुक्त उद्यम का संचालन करती है. इसके LEAP इंजन बोइंग 737 MAX, एयरबस A320neo और चीन के COMAC C919 जैसे विमान में लगे हैं और उन्हें शक्ति प्रदान करता है. फ्रांस के डसॉल्ट राफेल लड़ाकू विमान में स्नेक्मा M88 इंजन लगा हुआ है. गौरतलब है कि सफ्रान अब भारत के AMCA लड़ाकू विमान के लिए इंजन विकसित करने में भी मदद करेगा.
रूस के सभी लड़ाकू विमान उसकी कंपनियों द्वारा निर्मित इंजनों से संचालित होते हैं. रूस की यूनाइटेड इंजन कॉर्पोरेशन देश की सबसे बड़ी इंजन निर्माता कंपनी है. कंपनी के सैटर्न और क्लिमोव विभाग लड़ाकू जेट इंजन का उत्पादन करते है. गौरतलब है कि एवियाडविगेटल पीडी-14 और पीडी-8 इंजन मानक विमानों के लिए विकसित किए जा रहे है. जिन्हें एमसी-21 और सुपरजेट विमान में लगाए जाने की उम्मीद है.
सालो की कड़ी मेहनत के बाद चीन ने अपने लड़ाकू जेट इंजन बनाना शुरू कर दिया है. एयरो इंजन कॉर्पोरेशन ऑफ चाइना द्वारा निर्मित WS-10 ताइहांग और WS-15 इंजन अब J-10, J-11 और J-20 जैसे विमान में लगाया जा रहा है. हालांकि चीन के वाणिज्यिक विमान COMAC C919 और C929 अभी भी विदेशी इंजन से संचालित होता हैं. गौरतलब है कि चीन अब अपना खुद का इंजन, CJ-1000A, विकसित कर रहा है.
यूक्रेनी कंपनी इवचेंको प्रोग्रेस अभी भी इंजन बनाती है. इसका AI-322 इंजन तुर्की के किज़िलेल्मा ड्रोन और चीन के L-15 फाल्कन ट्रेनर जेट में इस्तेमाल होता है. हालांकि, रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण इसकी उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई है.
भारत, तुर्की, स्वीडन और दक्षिण कोरिया जैसे देश अभी भी अपने इंजन विकसित कर रहे है. हालांकि वे वर्तमान में विदेशी इंजनों पर निर्भर है. गौरतलब है कि भारत ने कावेरी इंजन परियोजना पर काफी काम किया है और भविष्य में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.
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