Nari Shakti Vandan: नारी शक्ति वंदन अधिनियम महज 33% आरक्षण ही नहीं है, बल्कि देश की करोड़ों महिलाओं को समान अधिकार, सम्मान और निर्णय लेने में भागीदारी प्रदान करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है. इस अधिनियम के जरिए अब महिलाएं पंचायत से लेकर संसद तक विकसित भारत के निर्माण में अहम रोल अदा कर सकेंगी. क्या है ये अधिनियम, कब लागू होगा, इसके क्या फायदे हैं, परिसीमन का इसमें क्या रोल है? और इस नए अधिनियम को लेकर देश के अलग-अलग तबके से क्या प्रतिक्रिया मिल रही है? यहां समझें.
Nari Shakti Vandan: क्या है 'नारी शक्ति वंदन' अधिनियम? कब लागू होगा, परिसीमन का क्या रोल है, फायदे भी समझें!
Nari Shakti Vandan: 16 अप्रैल 2026 की रात, जब पूरा देश सो रहा था, तब देश की संसद में महिलाओं को समान अधिकर दिलाने की बात हो रही थी. मुद्दा था नारी शक्ति वंदन अधिनियम, जिसमें महिलाओं के आरक्षण के लिए संविधान में संशोधन और परिसीमन भी अहम भूमिका रही. इस अधिनियम के पारित होने के बाद लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही है. देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में महिलाओं के आरक्षण बिल पर हो रही चर्चा को ऐतिहासिक बताया.
संसद में जब इस बिल को लेकर चर्चा चल रही थी तो लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने एक-एक महिला सांसद को उनकी बात रखने का मौका दिया. देर रात तक चली इस चर्चा के में ओम बिरला ने महिला सांसदों की भागीदारी और मौजूदगी की तारीफ की, बल्कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 पारित कर दिया गया. यहां जानिए कि ये बिल कैसे भारतीय समाज में महिलाओं की पृष्टभूमि को बदलने में मील का पत्थर साबित होगा.
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सरकार ने सितंबर 2023 में ही नारी शक्ति वंदन कानून पारित करा लिया था, जिसमें नई जनगणना के आधार पर परिसीमन कराने और फलस्वरूप संसद और विधानसभाओं में महिला आरक्षण लागू करने का प्लान था. लेकिन इसका कार्यान्वयन 2034 के लोकसभा चुनाव से मुमकिन नहीं था. इसके कारण महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी में देरी भी हो सकती थी.
यही कारण है कि 16 अप्रैल 2026 को (131वां संशोधन) में पेश किया गया, जिस पर देर रात चर्चा चलती रही. अब नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान कर दिया गया है. इसका उद्देश्य महिलाओं के लिए आरक्षण को जल्द से जल्द लागू करना है, ताकि आने वाले समय में महिलाएं देश की कमान संभाल लें.
हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस अधिनियम का मौजूदा सीटों के आवंटन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. सीटों की कुल संख्या को बढ़ाया जाएगा, ताकि संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके.
संविधान संशोधन विधेयक 2026 के मुताबिक, लोकसभा की सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 की जाएंगी, जिसमें 815 सीटें राज्यों को और शेष 35 केंद्रशासित प्रदेशों को मिलेंगी. हालांकि, नए कानून के मुताबिक, मौजूदा पुरुष सांसद की सीटों पर कोई असर नहीं पडेगा, बल्कि महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें अलग से निर्धारित की जाएंगी. इस तरह महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण भी मिल जाए.
आरक्षण लागू करने के तौर-तरीका क्या होगा? सीटों की सीमाएं कैसे तय होगी? ये निर्धारित करने के लिए परिसीमन बिल 2026 के तहत नया परिसीमन आयोग गठित होगा. ये आयोग तय करेगा कि 850 सीटों में से किन 33% यानी 273 सीटों को महिलाओं के लिए आरक्षित करना है. यही बिल तय करेगा कि देश के हर इलाके में आरक्षण के तहत महिलाओं को मौका मिले, इसके लिए चुनावों के बाद आरक्षित सीटों का रोटेशन भी किया जाएगा.
यह एक ‘इनेबलिंग बिल’ है, जिसके तहत केंद्र शासित प्रदेशों में भी आरक्षण लागू हो सके. इसके तहत दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर समेत सभी केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी 33% महिला आरक्षण को लागू किया जाएगा.
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