Nari Shakti Vandan: 16 अप्रैल 2026 की रात, जब पूरा देश सो रहा था, तब देश की संसद में महिलाओं को समान अधिकर दिलाने की बात हो रही थी. मुद्दा था नारी शक्ति वंदन अधिनियम, जिसमें महिलाओं के आरक्षण के लिए संविधान में संशोधन और परिसीमन भी अहम भूमिका रही. इस अधिनियम के पारित होने के बाद लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही है. देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में महिलाओं के आरक्षण बिल पर हो रही चर्चा को ऐतिहासिक बताया.
संसद में जब इस बिल को लेकर चर्चा चल रही थी तो लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने एक-एक महिला सांसद को उनकी बात रखने का मौका दिया. देर रात तक चली इस चर्चा के में ओम बिरला ने महिला सांसदों की भागीदारी और मौजूदगी की तारीफ की, बल्कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 पारित कर दिया गया. यहां जानिए कि ये बिल कैसे भारतीय समाज में महिलाओं की पृष्टभूमि को बदलने में मील का पत्थर साबित होगा.
नारी शक्ति वंदन अधिनियम को जानें
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सरकार ने सितंबर 2023 में ही नारी शक्ति वंदन कानून पारित करा लिया था, जिसमें नई जनगणना के आधार पर परिसीमन कराने और फलस्वरूप संसद और विधानसभाओं में महिला आरक्षण लागू करने का प्लान था. लेकिन इसका कार्यान्वयन 2034 के लोकसभा चुनाव से मुमकिन नहीं था. इसके कारण महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी में देरी भी हो सकती थी.
यही कारण है कि 16 अप्रैल 2026 को (131वां संशोधन) में पेश किया गया, जिस पर देर रात चर्चा चलती रही. अब नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान कर दिया गया है. इसका उद्देश्य महिलाओं के लिए आरक्षण को जल्द से जल्द लागू करना है, ताकि आने वाले समय में महिलाएं देश की कमान संभाल लें.
हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस अधिनियम का मौजूदा सीटों के आवंटन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. सीटों की कुल संख्या को बढ़ाया जाएगा, ताकि संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके.
- ये कानून अगले 15 वर्षों तक प्रभावी रहेगा, जिसे आगे भी बढ़ाया जा सकता है.
- महिला की कुल आरक्षित सीटों में SC और ST वर्ग की महिलाओं को भी एक-तिहाई मिलेगी.
- सरकार का लक्ष्य इसे 2029 के लोकसभा चुनावों तक पूरी तरह प्रभावी बनाना है.
➡️प्रधानमंत्री @narendramodi के नेतृत्व में नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 पारित किया गया. इस अधिनियम के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान किया गया है.
➡️वर्तमान प्रावधानों के अनुसार, आरक्षण लागू होना अगली जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया पूरी… pic.twitter.com/0iyaR8N6qp
— पीआईबी हिंदी (@PIBHindi) April 16, 2026
सीटों का आवंटन कैसे होगा?
संविधान संशोधन विधेयक 2026 के मुताबिक, लोकसभा की सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 की जाएंगी, जिसमें 815 सीटें राज्यों को और शेष 35 केंद्रशासित प्रदेशों को मिलेंगी. हालांकि, नए कानून के मुताबिक, मौजूदा पुरुष सांसद की सीटों पर कोई असर नहीं पडेगा, बल्कि महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें अलग से निर्धारित की जाएंगी. इस तरह महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण भी मिल जाए.
परिसीमन का क्या रोल है?
आरक्षण लागू करने के तौर-तरीका क्या होगा? सीटों की सीमाएं कैसे तय होगी? ये निर्धारित करने के लिए परिसीमन बिल 2026 के तहत नया परिसीमन आयोग गठित होगा. ये आयोग तय करेगा कि 850 सीटों में से किन 33% यानी 273 सीटों को महिलाओं के लिए आरक्षित करना है. यही बिल तय करेगा कि देश के हर इलाके में आरक्षण के तहत महिलाओं को मौका मिले, इसके लिए चुनावों के बाद आरक्षित सीटों का रोटेशन भी किया जाएगा.
केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026
यह एक ‘इनेबलिंग बिल’ है, जिसके तहत केंद्र शासित प्रदेशों में भी आरक्षण लागू हो सके. इसके तहत दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर समेत सभी केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी 33% महिला आरक्षण को लागू किया जाएगा.