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Who is Indian Origin Nobel Prize Winner: भारत की बेटी ने रचा इतिहास, नावी पिल्लई को मिला शांति का नोबेल; देखते रह गए ट्रंप

Who is Indian Origin Nobel Prize Winner: दक्षिण अफ्रीका में जन्मी भारतीय तमिल मूल की नावी पिल्लई हाईकोर्ट की जज, रवांडा ट्रिब्यूनल की न्यायाधीश और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयुक्त रह चुकी हैं.

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Last Updated: October 9, 2026 15:19:46 IST

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Who is Indian Origin Nobel Prize Winner: नोबेल कमेटी ने 2026 के शांति पुरस्कार का ऐलान कर दिया है. इस साल यह सम्मान भारतीय मूल की जानी-मानी न्यायविद नवनेथम नावी पिल्लई को दिया गया है. नोबेल पुरस्कार के आधिकारिक अकाउंट पर इसकी जानकारी दी गई. कमेटी ने कहा कि उन्हें शांति, न्याय और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने के लिए यह पुरस्कार दिया जा रहा है. इस ऐलान के साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक बार फिर झटका लगा है, जो कई बार नोबेल पाने की इच्छा जता चुके हैं.

कौन हैं नावी पिल्लई?

नावी पिल्लई का जन्म दक्षिण अफ्रीका में एक तमिल परिवार में हुआ था. उनके माता-पिता भारतीय मूल के थे. वह दक्षिण अफ्रीका के हाईकोर्ट की पहली अश्वेत महिला जज रही हैं. इसके अलावा वह रवांडा इंटरनेशनल क्रिमिनल ट्रिब्यूनल और इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट में भी जज के तौर पर काम कर चुकी हैं. उन्होंने अपने करियर में नेल्सन मंडेला जैसे नेताओं की कानूनी मदद की और रंगभेद के खिलाफ लड़ाई लड़ी. वह संयुक्त राष्ट्र में मानवाधिकार आयुक्त भी रह चुकी हैं.

क्यों मिला नोबेल शांति पुरस्कार?

  • नावी पिल्लई ने अपना पूरा जीवन न्याय के लिए समर्पित किया है. उन्होंने दुनिया भर में युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराध करने वालों को सजा दिलाने के लिए काम किया है.
  • रवांडा नरसंहार के मामले में ट्रिब्यूनल में जज रहते हुए उन्होंने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया था, जिसके बाद यौन हिंसा को नरसंहार और मानवता के खिलाफ अपराध के तौर पर मान्यता मिली.
  • दक्षिण अफ्रीका में जन्मी नावी ने खुद भेदभाव का सामना किया और बाद में रंगभेद के खिलाफ लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी.
  • उन्होंने साउथ अफ्रीका हाईकोर्ट से लेकर इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट तक कई बड़ी जिम्मेदारियां निभाई हैं और अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था को मजबूत किया है. म्यांमार नरसंहार केस में भी उनकी भूमिका काफी अहम रही है.
  • इसके अलावा वह गाजा में इजराइल की सैन्य कार्रवाई पर लगातार सवाल उठाती रही हैं और पीड़ितों के लिए न्याय की मांग करती रही हैं.

ये भी पढ़ें:  Jewar Airport Renaming: जेवर एयरपोर्ट को मिला नया नाम! अब नरेंद्र मोदी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा के नाम से जाना जायेगा UP का ये एयरपोर्ट

शांति से कैसे जुड़ा उनका काम?

नोबेल कमेटी का मानना है कि बिना न्याय के स्थायी शांति नहीं आ सकती. नावी पिल्लई ने हमेशा कहा कि चाहे कोई कितना भी ताकतवर देश क्यों न हो, उसे कानून के दायरे में लाना जरूरी है. अगर युद्ध और नरसंहार करने वालों को सजा मिलेगी, तभी भविष्य में हिंसा रुकेगी और पीड़ितों को इंसाफ मिलेगा. इसी सोच की वजह से उन्हें शांति का नोबेल दिया गया है.

ये भी पढ़ें: Delhi Protest: नहीं बुक कर पाएंगे OYO, 23000 पुलिस फोर्स तैनात; दिल्ली प्रर्दशन से पहले सरकार के 10 कदम

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Last Updated: October 9, 2026 15:19:46 IST

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Who is Indian Origin Nobel Prize Winner: नोबेल कमेटी ने 2026 के शांति पुरस्कार का ऐलान कर दिया है. इस साल यह सम्मान भारतीय मूल की जानी-मानी न्यायविद नवनेथम नावी पिल्लई को दिया गया है. नोबेल पुरस्कार के आधिकारिक अकाउंट पर इसकी जानकारी दी गई. कमेटी ने कहा कि उन्हें शांति, न्याय और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने के लिए यह पुरस्कार दिया जा रहा है. इस ऐलान के साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक बार फिर झटका लगा है, जो कई बार नोबेल पाने की इच्छा जता चुके हैं.

कौन हैं नावी पिल्लई?

नावी पिल्लई का जन्म दक्षिण अफ्रीका में एक तमिल परिवार में हुआ था. उनके माता-पिता भारतीय मूल के थे. वह दक्षिण अफ्रीका के हाईकोर्ट की पहली अश्वेत महिला जज रही हैं. इसके अलावा वह रवांडा इंटरनेशनल क्रिमिनल ट्रिब्यूनल और इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट में भी जज के तौर पर काम कर चुकी हैं. उन्होंने अपने करियर में नेल्सन मंडेला जैसे नेताओं की कानूनी मदद की और रंगभेद के खिलाफ लड़ाई लड़ी. वह संयुक्त राष्ट्र में मानवाधिकार आयुक्त भी रह चुकी हैं.

क्यों मिला नोबेल शांति पुरस्कार?

  • नावी पिल्लई ने अपना पूरा जीवन न्याय के लिए समर्पित किया है. उन्होंने दुनिया भर में युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराध करने वालों को सजा दिलाने के लिए काम किया है.
  • रवांडा नरसंहार के मामले में ट्रिब्यूनल में जज रहते हुए उन्होंने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया था, जिसके बाद यौन हिंसा को नरसंहार और मानवता के खिलाफ अपराध के तौर पर मान्यता मिली.
  • दक्षिण अफ्रीका में जन्मी नावी ने खुद भेदभाव का सामना किया और बाद में रंगभेद के खिलाफ लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी.
  • उन्होंने साउथ अफ्रीका हाईकोर्ट से लेकर इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट तक कई बड़ी जिम्मेदारियां निभाई हैं और अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था को मजबूत किया है. म्यांमार नरसंहार केस में भी उनकी भूमिका काफी अहम रही है.
  • इसके अलावा वह गाजा में इजराइल की सैन्य कार्रवाई पर लगातार सवाल उठाती रही हैं और पीड़ितों के लिए न्याय की मांग करती रही हैं.

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शांति से कैसे जुड़ा उनका काम?

नोबेल कमेटी का मानना है कि बिना न्याय के स्थायी शांति नहीं आ सकती. नावी पिल्लई ने हमेशा कहा कि चाहे कोई कितना भी ताकतवर देश क्यों न हो, उसे कानून के दायरे में लाना जरूरी है. अगर युद्ध और नरसंहार करने वालों को सजा मिलेगी, तभी भविष्य में हिंसा रुकेगी और पीड़ितों को इंसाफ मिलेगा. इसी सोच की वजह से उन्हें शांति का नोबेल दिया गया है.

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