Who Was D Y Patil: कांग्रेस के सीनियर लीडर और पूर्व गवर्नर डॉ. ज्ञानदेव यशवंतराव पाटिल उर्फ डॉ. डी. वाई. पाटिल का आज कोल्हापुर में निधन हो गया. वे 90 साल के थे. पिछले कुछ महीनों से उनकी सेहत ठीक नहीं थी. डॉ. डी. वाई. पाटिल का पार्थिव शरीर बुधवार, 4 अगस्त को सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक कस्बा बावड़ा में यशवंत निवास पर अंतिम संस्कार के लिए रखा जाएगा. उसके बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू होगी. बताया जा रहा है कि अंतिम संस्कार कस्बा बावड़ा में डी. वाई. पाटिल मेडिकल कॉलेज के कैंपस में किया जाएगा.
कौन थे D Y Patil?
डी. वाई. पाटिल ने महाराष्ट्र और दूसरी जगहों पर कई एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन खोलकर कई स्टूडेंट्स के लिए पढ़ाई के रास्ते खोलने में मदद की. उन्होंने पॉलिटिकल-सोशल-एजुकेशनल फील्ड में काफी योगदान दिया. जिसके बाद भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री सिविलियनअवॉर्ड से सम्मानित किया.
किसान परिवार से गवर्नर तक का सफर
22 अक्टूबर 1935 को कोल्हापुर के अंबाप नाम के एक छोटे से किसान परिवार में हुआ था. डॉ. डी. वाई. पाटिल ने अपनी जीवन काफी संघर्ष में निकाला. उन्होंने अपनी शानदार स्किल्स के दम पर त्रिपुरा और बिहार के गवर्नर रहते हुए काफी अच्छे-अच्छे काम किए. पश्चिम बंगाल के गवर्नर का एडिशनल पद भी उन्होंने काफी समय तक संभाला. उन्होंने गर्वनर रहते हुए शिक्षा, एडमिनिस्ट्रेशन और सामाजिक कामों को प्राथमिकता दी.
शिक्षा में काफी बड़ा योगदान
शिक्षा को लोगों तक पहुंचाने के लिए उन्होंने काफी काम किया. उन्होंने ‘डी. वाई. पाटिल ग्रुप’ की भी शुरूआत की। डॉ. डी. वाई. पाटिल ने 1983 में नवी मुंबई में पहला इंजीनियरिंग कॉलेज, रामराव आदिक इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (RAIT) शुरू किया. आज, उनके ‘डी. वाई. पाटिल ग्रुप’ के तहत 7 से ज़्यादा डीम्ड/प्राइवेट यूनिवर्सिटी और 150 से ज़्यादा एजुकेशनल इंस्टिट्यूशन चल रहे हैं. इस ग्रुप के तहत कोल्हापुर, मुंबई और पुणे जैसे बड़े शहरों में 3 से ज़्यादा डीम्ड यूनिवर्सिटी, 6 प्राइवेट यूनिवर्सिटी और 180 से ज़्यादा एजुकेशनल इंस्टिट्यूशन का नेटवर्क है.
1978 के चुनावों में मिली मात
1978 के चुनावों में डी. वाई. पाटिल हार गए. अगली हार के बाद, राजनीति में उनकी दिलचस्पी कम हो गई. राजनीतिक उम्मीद के दौर में, डी. वाई. पाटिल ने 45 साल की उम्र में राजनीति छोड़ दी. हालांकि, उन्होंने राजनीति के दायरे से बाहर अपनी नई पारी शुरू की. डॉ. डी. वाई. पाटिल ने एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन खोलकर मिडिल क्लास और बहुजन स्टूडेंट्स के लिए ज्ञान के दरवाजे खोले.
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