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2050 तक गर्मी मचाएगी तबाही, गरीबों की संख्या 700 प्रतिशत तक बढ़ने का खतरा: वर्ल्ड बैंक

वर्ल्ड बैंक की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, साल 2050 तक दुनिया के कई बड़े शहरों में भीषण गर्मी और हीटवेव का असर खतरनाक स्तर तक पहुंच सकता है. रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि बढ़ते तापमान का असर सिर्फ मौसम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य और गरीबी पर भी गंभीर प्रभाव डालेगा.

वर्ल्ड बैंक की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, साल 2050 तक दुनिया के कई बड़े शहरों में भीषण गर्मी और हीटवेव का असर खतरनाक स्तर तक पहुंच सकता है. रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि बढ़ते तापमान का असर सिर्फ मौसम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य और गरीबी पर भी गंभीर प्रभाव डालेगा. रिपोर्ट के मुताबिक, यूरोप और मध्य एशिया के कई शहरों में अत्यधिक गर्म दिनों की संख्या तीन गुना तक बढ़ सकती है. वहीं भारत के बड़े शहरों में गर्मी से होने वाली मौतों की संख्या दोगुनी होने की आशंका है.

वर्ल्ड बैंक ने यह भी कहा है कि अगर समय रहते जरूरी कदम नहीं उठाए गए, तो 2050 तक भीषण गर्मी के कारण शहरी गरीबों की संख्या में 700 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है. खासकर विकासशील देशों के गरीब तबके पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ेगा. रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि अत्यधिक गर्मी के चलते भारत, यूरोप और मध्य एशिया जैसे क्षेत्रों की वार्षिक जीडीपी में 2.5 से 2.8 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है. यानी गर्मी केवल स्वास्थ्य संकट नहीं, बल्कि आर्थिक संकट भी बन सकती है.

विशेषज्ञों का मानना है कि शहरों में कंक्रीट, कम हरियाली और बढ़ते प्रदूषण के कारण “अर्बन हीट आइलैंड” प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है, जिससे शहरी इलाकों का तापमान आसपास के क्षेत्रों से ज्यादा हो जाता है. इस खतरे से निपटने के लिए वर्ल्ड बैंक ने कई सुझाव दिए हैं. इनमें कूल रूफ, ग्रीन स्पेस, ऊर्जा-कुशल कूलिंग सिस्टम और पेड़ों की संख्या बढ़ाने जैसे उपाय शामिल हैं. रिपोर्ट के अनुसार, अगर शहरों में पेड़ों की संख्या 10 से 30 प्रतिशत तक बढ़ाई जाए तो गर्मी के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

इसके अलावा, हीटवेव के लिए अर्ली वार्निंग सिस्टम लागू करने से गर्मी से होने वाली मौतों में 20 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है. वर्ल्ड बैंक का कहना है कि 2050 तक दुनिया के लगभग 50 प्रतिशत शहरी बुनियादी ढांचे का निर्माण अभी बाकी है, इसलिए यह समय भविष्य के लिए टिकाऊ और गर्मी-प्रतिरोधी शहर बनाने का सबसे बड़ा अवसर है.

Satyam Sengar

जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पढ़ाई के दौरान कैंपस प्लेसमेंट के जरिए पत्रकारिता में एंट्री मिली. शुरुआत नेटवर्क 18 से हुई और अब ITV नेटवर्क के साथ जुड़ा हूं. पत्रकारिता में 3 साल से ज्यादा का अनुभव हो चुका है और स्पोर्ट्स पर अच्छी पकड़ है. क्रिकेट, फुटबॉल, हॉकी और अन्य स्पोर्ट्स इवेंट्स कवर करता हूं. WWE की स्टोरीज लिखना बहुत ही ज्यादा पसंद है.

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