ईरान में बड़े पैमाने पर अशांति के बीच 35 लोगों की मौत के साथ विरोध प्रदर्शन तेज़ हो गए हैं. आर्थिक संकट और प्रतिबंधों से गुस्सा बढ़ रहा है. वहीं US ने ईरान को चेतावनी दी है.
ईरान में हिंसक विद्रोह
Iran Protests: नेपाल के बाद से अब ईरान में लोगों ने सरकार के खिलाफ विद्रोह शुरू कर दिया है. ईरान में इससे पहले भी कई प्रर्दशन हुए हैं लेकिन इस बार आर्थिक संकट की वजह से लोग सड़को पर उतर आएं हैं. विद्रोह रुकने बजाया लगातार बढ़ता जा रहा है. एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा में मरने वालों की संख्या कम से कम 35 हो गई है.
यह आंकड़ा अमेरिका की एक ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट न्यूज एजेंसी से आया है जिसका कहना है कि एक हफ़्ते से ज़्यादा समय से चल रहे विरोध प्रदर्शनों में 1200 से ज़्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है.
इसमें कहा गया है कि 29 प्रदर्शनकारी, चार बच्चे और ईरानी सिक्योरिटी फोर्स के दो सदस्य मारे गए हैं. विरोध प्रदर्शन ईरान के 31 में से 27 प्रांतों में 250 से ज़्यादा जगहों पर फैल गए हैं.
जैसे-जैसे ईरान के विद्रोह में मरने वालों की संख्या बढ़ रही है डर बढ़ रहा है कि अमेरिका यहां भी दखल दे सकता है. अमेरिका के प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को ईरान को चेतावनी दी कि अगर तेहरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हिंसक हमला करता है तो अमेरिका उनके बचाव में आएगा. ट्रंप ने ईरान को साफ तौर पर मिलिट्री हमले की धमकी देते हुए कहा कि अमेरिका की मिसाइलें तैयार हैं.
यह अभी साफ नहीं है कि ट्रंप असल में ईरान में कैसे दखल देंगे. हालांकि जब से मिलिट्री ने ईरान के पुराने साथी वेनेज़ुएला के प्रेसिडेंट निकोलस मादुरो को पकड़ने के लिए मिलिट्री ऑपरेशन किया है, तब से ईरान को ट्रंप की धमकी और भी ज़्यादा असरदार हो गई है.
बढ़ती महंगाई ईरान में जनता के बगावत का मुख्य कारण है. विरोध प्रदर्शन राजधानी तेहरान में शुरू हुए जहां दुकानदारों ने ऊंची कीमतों और आर्थिक अस्थिरता को लेकर हड़ताल कर दी थी और तब से यह देश के दूसरे हिस्सों में फैल गया है. ईरान की करेंसी रियाल की कीमत बहुत गिर गई है जिससे डर पैदा हो गया है. 1 डॉलर अब लगभग 1.4 मिलियन रियाल के बराबर है. कई प्रदर्शनकारियों ने देश के सुप्रीम लीडर के शासन को खत्म करने की मांग की है. कुछ ने तो राजशाही की वापसी की भी मांग की है.
ये विरोध प्रदर्शन 2022 के बाद से ईरान में सबसे बड़े हो गए हैं. लगभग चार साल पहले 22 साल की महसा अमिनी की पुलिस कस्टडी में मौत के बाद पूरे देश में प्रदर्शन शुरू हुए थे. हालांकि ये विरोध प्रदर्शन अभी तक उस लेवल और तेज़ी तक नहीं पहुंचे हैं, जितने अमिनी की मौत के बाद हुए थे, जिन्हें हिजाब न पहनने की वजह से हिरासत में लिया गया था और कस्टडी में मार दिया गया था.
Bonus Shares Before Diwali 2026: जानें अक्टूबर में किन शेयरों का बोनस इश्यू आया, बोनस…
New rules for buying liquor: तमिलनाडु में TASMAC ने शराब की खुदरा बिक्री के भुगतान…
Omar Abdullah Cabinet: जम्मू-कश्मीर की उमर अब्दुल्ला सरकार में 4 नए मंत्रियों की एंट्री हो…
Microsoft Voluntary Exit Scheme के तहत करीब 60,000 कर्मचारियों को कंपनी छोड़ने का विकल्प मिला…
CID producer BP Singh Death: मशहूर टीवी निर्माता, निर्देशक और अभिनेता बीपी सिंह यानी बृजेंद्र…
Free Fire India: मोबाइल गेमिंग के शौकीनों को जल्द ही भारत में Free Fire भारत…