बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री यातायात मार्गों में से एक बन गया है. यमन के हूती बलों की हालिया प्रगति ने उन्हें इस रणनीतिक जलमार्ग पर नियंत्रण हासिल करने के करीब ला दिया है, जिससे वैश्विक व्यापार, तेल आपूर्ति और भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं.
ये घटनाक्रम विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं क्योंकि अस्थिरता पहले से ही होर्मुज जलडमरूमध्य को बाधित कर रही है, जिससे दो महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों पर एक साथ दबाव पड़ने की संभावना है.
बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य कहाँ स्थित है?
यमन और अफ्रीका के हॉर्न क्षेत्र के बीच स्थित बाब-अल-मंडेब नहर लाल सागर को अदन की खाड़ी और अंततः हिंद महासागर से जोड़ती है. यह स्वेज नहर का दक्षिणी प्रवेश द्वार है, जो इसे एशियाई बाजारों और यूरोप के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी बनाता है. एशिया और यूरोप के बीच यात्रा करने वाले जहाजों के लिए, इस व्यवधान का मतलब है कि उन्हें अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप के चारों ओर एक चक्कर लगाना पड़ सकता है, जो काफी महंगा पड़ेगा.
क्या इस जलडमरूमध्य पर हूती समूह का नियंत्रण है?
हाल के दिनों में स्थिति तेजी से बदल गई है. हूतियों ने रणनीतिक लाल सागर बंदरगाह मोचा पर कब्जा कर लिया और उसके बाद जलडमरूमध्य के पास मुख्य भूमि पर स्थित धुबाब की ओर आगे बढ़े हैं. यमनी सरकारी सूत्रों ने यह भी बताया कि हूती सेना बाब-अल-मंडेब के भीतर स्थित पेरीम (मयून) द्वीप तक पहुंच गई है. हालांकि, इसे पूरे जलमार्ग पर पूर्ण नियंत्रण के रूप में नहीं समझा जाना चाहिए. इस क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों का आवागमन पूरी तरह से नहीं रुका है, लेकिन हूतियों की इस बढ़त से इस मार्ग का उपयोग करने वाले जहाजों पर उन्हें काफी अधिक रणनीतिक लाभ मिल गया है.
भारत के लिए यह क्यों मायने रखता है?
भारत के लिए बाब-अल-मंडेब बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यह हिंद महासागर को यूरोप जाने वाले लाल सागर-स्वेज मार्ग से जोड़ता है. किसी भी लंबे समय तक चलने वाली रुकावट से भारतीय निर्यातकों और आयातकों के लिए शिपिंग दूरी, बीमा प्रीमियम, माल ढुलाई लागत और डिलीवरी का समय बढ़ सकता है. ऊर्जा का पहलू भी उतना ही महत्वपूर्ण है. भारत कच्चे तेल के आयात पर बहुत अधिक निर्भर है, जबकि इसकी रिफाइनरियां विदेशी बाजारों में पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति भी करती हैं. इसलिए, बाब-अल-मंडेब के आसपास लंबे समय तक चलने वाला संकट वैश्विक तेल और माल ढुलाई की कीमतों को बढ़ा सकता है, जिससे भारत के आयात बिल और मुद्रास्फीति पर दबाव बढ़ सकता है. बाब-अल-मंडेब और होर्मुज दोनों क्षेत्रों में बढ़ते सुरक्षा जोखिमों के बीच, हूती विद्रोहियों की हालिया कार्रवाई ने क्षेत्रीय संघर्ष को भारत के व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री हितों के लिए एक बड़ी चिंता में बदल दिया है.