सावन में ‘महाकाल’ के आशीर्वाद के लिए जा रहे हैं उज्जैन, तो इन मंदिरों के दर्शन करना न भूलें, वरना अधूरी रह जाएगी मनोकामना
सावन में हर कोई महादेव के दर्शन के लिए शिवालय या ज्योतिर्लिंग जाना चाहता है. कई लोग जाते भी हैं. वैसे तो सभी द्वादश ज्योतिर्लिंग का विशेष महत्व है, लेकिन महाकाल की महिमा अलग मानी जाती है. ऐसी मान्यता है कि महाकालेश्वर जाने के बाद व्यक्ति का भाग्य बदलता है. उज्जैन में स्थित इस ज्योतिर्लिंग की जितनी भी महिमा कही जाये, वो कम है. लेकिन हर जगह जाने के और दर्शन करने के कुछ नियम होते हैं. अगर आप भी इस सावन महाकालेश्वर जाकर दर्शन करने का प्लान बना रहे हैं तो इन मंदिरों के दर्शन करना न भूलें. लोक मान्यता के अनुसार अगर उज्जैन जाकर महाकाल मंदिर का दर्शन कर लिया लेकिन अन्य मंदिरों के दर्शन नहीं किये, तो आपको यात्रा का पूरा फल नहीं मिलता है.
महाकालेश्वर मंदिर
द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकाल मंदिर में शिव भगवान राजा के रूप में विराजमान हैं. श्रद्धालुओं का ऐसा मानना है कि यहां जाने से लोगों का भाग्य बदलता है. यह एकमात्र दक्षिणमुखी स्वयंभू ज्योतिर्लिंग है.
काल भैरव मंदिर
ऐसा माना जाता है कि महाकाल के दर्शन से पहले काल भैरव के दर्शन करना चाहिए. यह मंदिर शहर के संरक्षक देवता काल भैरव को समर्पित है. मंदिर में देवता को चढ़ाए जाने वाले प्रसाद में शराब भी शामिल है.
हरसिद्धि मंदिर
शिव पुराण में इस मंदिर का प्रमुखता से उल्लेख शक्ति पीठों में से एक के रूप में किया गया है, जहाँ माना जाता है कि देवी सती की कोहनी गिरी थी. लोककथाओं के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण मूल रूप से राजा विक्रमादित्य ने स्त्री शक्ति की देवी के सम्मान में करवाया था.
बगलामुखी माता मंदिर
इसे श्रीविद्या मंदिर में से एक माना जाता है. मान्यता है कि इस मंदिर में दर्शन के बाद लोगों को कोर्ट कचहरी और मुकदमे में जीत और राहत मिलती है. ये मंदिर तंत्र साधना का भी केंद्र है.
ओंकारेश्वर मंदिर
यह भी एक ज्योतिर्लिंग है, जो नर्मदा नदी के किनारे स्थित है. यह भगवान शिव के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में से चौथा ज्योतिर्लिंग है। प्राकृतिक रूप से यह द्वीप 'ॐ' (Om) के आकार का है.