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16 साल की उम्र में हुआ पहला प्यार, खून से लिखते थे खत; फिल्मों में आने के लिए किया कड़ा संघर्ष, अपनी जिंदगी पर भी बनाई फिल्में

Mahesh Bhatt: महेश भट्ट की जिंदगी को जानना हो, तो उनकी फिल्में देखनी पड़ेंगी. जिस शख्स ने पर्दे पर रिश्तों की उलझन, टूटते परिवार और अधूरे प्यार को इतनी बेबाकी से दिखाया, उसकी अपनी जिंदगी भी इन कहानियों से अछूती नहीं थी. केवल 16 साल की उम्र में वो प्यार में पड़े. वह दौर ऐसा था जब वह अपने जज्बातों को खून से लिखे खतों के जरिए जाहिर करते थे. प्रेम के इस खूबसूरत किस्से के पीछे बचपन का एक ऐसा दर्द भी था, जिसे उन्होंने लंबे समय तक अपने भीतर संभाले रखा. उनके पिता मशहूर फिल्मकार नानाभाई भट्ट थे लेकिन उनकी मां शिरीन मोहम्मद अली से उनकी शादी नहीं हुई थी. पिता के नाम और पहचान को लेकर बचपन में उन्हें सामाजिक सवालों और तानों का सामना करना पड़ा.

Last Updated: September 19, 2026 | 1:51 PM IST
Mahesh Bhatt wrote letters in blood - Photo Gallery
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महेश भट्ट ने खून से लिखे खत

कहा जाता है कि जब महेश महज 16 साल के थे, तब उनकी मुलाकात लॉरेन ब्राइट से हुई, जो उस वक्त 14 साल की थीं. दोनों के बीच दोस्ती हुई, जो बाद में प्यार में बदल गई. महेश इस रिश्ते को लेकर इतने भावुक थे कि उन्होंने अपने प्यार का इजहार करने के लिए खून से प्रेम पत्र तक लिखे. बाद में दोनों ने शादी कर ली. लॉरेन बाद में किरण भट्ट के नाम से जानी गईं. उनके दो बच्चे पूजा भट्ट और राहुल भट्ट हैं.

Had to hide father's name during childhood - Photo Gallery
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बचपन में छिपाना पड़ा पिता का नाम

महेश भट्ट के पिता नानाभाई भट्ट हिंदी फिल्मों के जाने-माने फिल्मकार थे लेकिन फिर भी महेश भट्ट के सिर पर उनका साया नहीं था. नानाभाई भट्ट ने उनकी मां शिरीन मोहम्मद अली से शादी नहीं की थी. इसका असर महेश की जिंदगी पर पड़ा. कई बार उन्होंने अपने इस दर्द के बारे में खुलकर बात की. इन दर्द पर उन्होंने कई फिल्में भी बनाईं.

Films based on personal life - Photo Gallery
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निजी जिंदगी पर बनाई फिल्में

कहा जाता है कि फिल्म जख्म उनकी मां और पारिवारिक पृष्ठभूमि से प्रेरित कहानी है. इसमें उन्होंने अपनी मां, परिवार और बचपन से जुड़े दर्द को कहानी के रूप में बयां किया. वहीं फिल्म अर्थ को उनके और एक्ट्रेस परवीन बॉबी के रिश्ते से जोड़कर देखा जाता है. महेश उन निर्देशकों में रहे जिन्होंने अपनी कमजोरियों और निजी अनुभवों को छिपाने के बजाय उन्हें रचनात्मक तरीके से पर्दे पर उतारा और काफी सुर्खियां बटोरीं.

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बने स्टार्स के सेक्रेटरी

आज महेश भट्ट का नाम सफल फिल्म निर्देशक, लेखक और निर्माता के तौर पर लिया जाता है लेकिन यहां तक पहुंचने के लिए उन्होंने काफी परेशानियों का सामना किया. फिल्मों में निर्देशक की कुर्सी तक पहुंचने से पहले उन्होंने संघर्ष के कई दौर देखे. कहा जाता है कि वे एक्टर विनोद खन्ना और एक्ट्रेस स्मिता पाटिल के सेक्रेटरी भी रहे. इस दौरान उन्होंने इंडस्ट्री को करीब से समझा.

Spiritual quest changed the mindset - Photo Gallery
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आध्यात्मिक खोज ने बदली सोच

महेश भट्ट की जिंदगी का एक दूसरा पहलू आध्यात्मिक खोज से जुड़ा है. वह दार्शनिक और आध्यात्मिक विचारक यू.जी. कृष्णमूर्ति से बेहद प्रभावित थे. दोनों के बीच लंबे समय तक करीबी संबंध रहा. महेश भट्ट ने यू.जी. कृष्णमूर्ति के जीवन और विचारों पर कहानियां भी लिखीं. वह उनके साथ इटली में उनके जीवन के अंतिम दौर में भी रहे. यू.जी. कृष्णमूर्ति की मृत्यु के बाद उनके अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी भी महेश भट्ट ने निभाई.

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सारांश से ऑस्कर तक और फिर निर्देशन से दूरी

महेश भट्ट के करियर में 1984 की फिल्म सारांश को बेहद महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है. अनुपम खेर अभिनीत इस फिल्म में बुजुर्ग दंपती के अपने बेटे को खोने के बाद के संघर्ष और जीवन की जद्दोजहद को दिखाया गया था. फिल्म को खूब सराहना मिली और 1985 में यह भारत की ओर से ऑस्कर के लिएगई. इसके बाद महेश भट्ट ने फिल्मों के साथ टेलीविजन में भी काम किया और वे 'स्वाभिमान' जैसे धारावाहिकों से जुड़े. हालांकि 1999 में आई कारतूस के बाद उन्होंने निर्देशन से दूरी बना ली.

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