Birthday Special: कभी रामलीला में बनते थे लड़की, आज हैं बॉलीवुड के ‘सुल्तान’; 8 तस्वीरों में देखें पंकज त्रिपाठी का संघर्ष
बॉलीवुड के सबसे सहज, सादगी पसंद और हर दिल अजीज अभिनेता पंकज त्रिपाठी आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं. अपनी दमदार अदाकारी से पर्दे पर हर किरदार को जिंदा कर देने वाले पंकज त्रिपाठी की सफलता के पीछे एक लंबी, संघर्ष भरी और प्रेरणादायक कहानी छिपी है. गांव की गलियों और रामलीला में लड़की के किरदार से अभिनय का सफर शुरू करने वाले इस कलाकार ने मुंबई की चकाचौंध में अपनी जगह बनाने के लिए कई सालों तक खामोश जंग लड़ी है. आज उनके जन्मदिन के खास मौके पर आइए नजर डालते हैं उनकी जिंदगी के उन पड़ावों पर, जिन्होंने एक साधारण किसान के बेटे को भारतीय सिनेमा का ‘सुल्तान’ और हर घर का चहेता सितारा बना दिया.
गांव के नाटक से अभिनय की शुरुआत
पंकज त्रिपाठी का जन्म 5 सितंबर 1976 को हुआ. उनके पिता किसान और पुजारी थे. बचपन में पढ़ाई और खेती के साथ-साथ उनकी रुचि अभिनय में भी रही. त्योहारों के मौकों पर वह गांव के नाटकों में लड़की का किरदार निभाया करते थे.
पटना से दिल्ली तक का सफर
हाई स्कूल के बाद पंकज त्रिपाठी पटना गए और इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट (हाजीपुर) में दाखिला लिया. पटना में सात साल बिताने के बाद अभिनय की बारीकियों को सीखने के लिए वह दिल्ली आ गए और 2004 में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) से ग्रेजुएशन पूरा किया.
मुंबई आगमन
साल 2003 में कन्नड़ फिल्म 'चिगुरिदा कनासु' में छोटी भूमिका से शुरुआत करने के बाद वह 2004 में मुंबई चले आए. 2004 से 2010 के बीच उन्हें काम तो मिला, लेकिन कमाई नहीं हुई. इस दौरान वह मौकों की तलाश में भटकते रहे.
संघर्ष के दिनों में पत्नी का सहारा
मुंबई के कठिन दौर में उनकी पत्नी मृदुला ने शिक्षिका के रूप में काम करके घर का पूरा खर्च उठाया. पंकज त्रिपाठी अपनी इस सफलता का श्रेय अपनी पत्नी को देते हैं. उनका मानना है कि वे दिन संघर्ष के नहीं, बल्कि कला को तराशने के थे.
दफ्तरों में काम मांगने का अनोखा तरीका
काम मांगने के दौरान जब गार्ड या कास्टिंग डायरेक्टर पूछते कि उन्हें किसने बुलाया है, तो पंकज त्रिपाठी मुस्कुराकर कहते कि उन्हें "ईश्वर जी ने भेजा है." इस जवाब से कई लोग हंस पड़ते तो कई खफा भी हो जाते थे.
'रन' से करियर का आगाज और विलेन की पहचान
साल 2004 में आई फिल्म 'रन' में उन्हें बिना क्रेडिट वाला छोटा रोल मिला. इसके बाद उन्होंने 'बंटी और बबली', 'अपहरण', 'ओमकारा', 'शौर्य', 'रावण', 'आक्रोश', 'चिल्लर पार्टी' और 'अग्निपथ' जैसी फिल्मों में विलेन और गैंगस्टर के किरदार निभाए.
'गैंग्स ऑफ वासेपुर' से मिली बड़ी पहचान
साल 2012 में 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' में सुल्तान के किरदार ने उनके करियर को नया मोड़ दिया. इसके बाद उन्होंने 'दबंग 2', 'गुंडे', 'सिंघम रिटर्न्स' और 'दिलवाले' जैसी बड़ी फिल्मों में अपनी अदाकारी की छाप छोड़ी.
मुख्य अभिनेता का सफर और हालिया फिल्में
मुख्य अभिनेता के तौर पर उनकी पहली फिल्म 'गुड़गांव' (2017) थी. इसके बाद 'बरेली की बर्फी', 'फुकरे रिटर्न्स' और 'न्यूटन' से उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई. हाल ही में वह 'मिर्जापुर द मूवी', 'ओह माय डॉग' और 'मेट्रो इन दिनों' जैसे प्रोजेक्ट्स में नजर आए हैं.