कभी थर-थर कांपते थे दुनिया भर के बल्लेबाज! पाकिस्तान के खिलाफ लुटाए खूब रन, अब टीम इंडिया से कटेगा पत्ता?
जो गेंदबाज कभी दुनिया का नंबर-1 स्पिनर बनकर विपक्षी बल्लेबाजों के छक्के छुड़ाता था, उसी बिश्नोई के एक महंगे स्पेल ने एशियन गेम्स के फाइनल मुकाबले में पाकिस्तान को सांस लेने की जगह दे दी. आखिर ऐसा क्या हुआ कि महज तीन सालों में बिश्नोई का जादू फीका पड़ गया? क्यों हर बीतते साल के साथ उनके आंकड़े टीम इंडिया के लिए चिंता का सबब बनते जा रहे हैं? आइए समझते हैं इस गिरावट के पीछे की पूरी कहानी.
मुश्किल पिच पर भारत ने बनाया 211 रनों का बड़ा स्कोर
2026 के एशियन गेम्स फाइनल में भारतीय टीम ने एक मुश्किल पिच पर 211 रनों का बड़ा स्कोर खड़ा किया. 212 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी पाकिस्तान की टीम के खिलाफ भारत की पकड़ बेहद मजबूत थी.
शुरुआती झटकों से बैकफुट पर आई पाकिस्तानी टीम
मैच के सातवें ओवर तक पाकिस्तान की हालत खस्ता हो चुकी थी. भारतीय गेंदबाजों के शानदार प्रदर्शन की बदौलत पाकिस्तान ने सिर्फ 42 रन के स्कोर पर अपने तीन अहम विकेट गंवा दिए थे.
बिश्नोई के महंगे ओवर से पाकिस्तान को मिली राहत
ऐसी मजबूत स्थिति में कप्तान श्रेयस अय्यर ने गेंद लेग स्पिनर रवि बिश्नोई को सौंपी. हालांकि, बिश्नोई ने अपने पहले ही ओवर में 10 रन दे दिए, जिससे दबाव में दिख रही पाकिस्तान टीम को मैच में वापसी का मौका मिल गया.
तीन ओवर में लुटाए 44 रन, बढ़ी भारत की मुश्किलें
रवि बिश्नोई अपने स्पेल पर काबू नहीं रख सके और उन्होंने तीन ओवर में 44 रन लुटा दिए. उनके इस महंगे स्पेल की वजह से भारत के लिए जीत की राह अचानक थोड़ी मुश्किल हो गई.
एक-दो मैच नहीं, लगातार गिरता जा रहा है फॉर्म
किसी भी गेंदबाज के लिए एकाध मैच खराब होना आम बात है, लेकिन बिश्नोई के मामले में यह सिर्फ एक मैच की नाकामी नहीं दिखती. अंतरराष्ट्रीय टी20 में जिस तेजी से उनका करियर ऊपर गया था, अब उतनी ही तेजी से नीचे गिर रहा है.
बल्लेबाजों ने समझी काट, गेंदबाजी में नयापन गायब
बिश्नोई के खराब प्रदर्शन की बड़ी वजह यह लगती है कि बल्लेबाजों ने उनकी गेंदबाजी की कला और विविधताओं को पूरी तरह समझ लिया है. वहीं, बिश्नोई समय के साथ अपनी गेंदबाजी में कोई नया प्रयोग या बदलाव नहीं कर पाए हैं.
2022 के नंबर वन बॉलर से 2026 तक आंकड़ों की गिरावट
2022 में डेब्यू के दौरान बिश्नोई ने 17.13 की औसत से 17 विकेट लिए थे और दिसंबर 2023 तक वह दुनिया के नंबर वन टी20 गेंदबाज बन गए थे. लेकिन 2024 से उनका फॉर्म गिरा और 2026 तक आते-आते उनका औसत बढ़कर 31 और इकोनॉमी रेट 8.5 के पार पहुंच गया.
2022 के मुकाबले हर विकेट अब पड़ रहा है भारी
2022 और 2026 के आंकड़ों की तुलना करें तो बिश्नोई को अब हर विकेट के लिए 14 रन ज्यादा देने पड़ रहे हैं. वह प्रति ओवर 1.5 रन ज्यादा लुटा रहे हैं और एक विकेट हासिल करने के लिए उन्हें औसतन 8 गेंदें ज्यादा फेंकनी पड़ रही हैं.