हीरो से सुपरस्टार बनने तक का सफर, फिर छोड़ी शोहरत की दुनिया, प्यार और विवादों से भरी थी विनोद खन्ना की जिंदगी
Vinod Khanna: विनोद खन्ना किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं. तीन दशकों से ज्यादा समय तक इंडस्ट्री में राज करने वाले विनोद खन्ना की जिंदगी में नाम, शोहरत, प्यार, दौलत और आध्यात्मिक सब कुछ था. कहा जाता है कि एक समय ऐसा था, जब वे बॉलीवुड के सबसे हैंडसम और कामयाब सितारों में गिने जाते थे. हालांकि जब करियर अपने शिखर पर था, तब उन्होंने अचानक ऐसा फैसला लिया जिसने हर किसी को हैरान कर दिया. पर्दे पर राज करने वाले विनोद खन्ना ग्लैमर की दुनिया छोड़कर आध्यात्मिक गुरु ओशो की शरण में पहुंच गए.
कॉलेज के प्यार से शुरू हुई कहानी
विनोद खन्ना की निजी जिंदगी की शुरुआत गीतांजलि तलेयारखान के साथ प्रेम कहानी से हुई. दोनों कॉलेज के दिनों में करीब आए और 1971 में शादी कर ली. शादी के बाद उनके दो बेटे राहुल खन्ना और अक्षय खन्ना हुए. दिलचस्प बात यह है कि बेहद व्यस्त फिल्मी करियर के बावजूद विनोद परिवार के लिए समय निकालने की कोशिश करते थे.
ओशो से जुड़े विनोद खन्ना
हालांकि जब वे उनकी जिंदगी में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब करियर के शिखर पर उन्होंने फिल्मों से दूरी बना ली और ओशो के आश्रम से जुड़ गए. अमेरिका के ओरेगन स्थित आश्रम में रहने के उनके फैसले ने निजी जिंदगी को भी प्रभावित किया. आखिरकार 1985 में गीतांजलि और विनोद का रिश्ता खत्म हो गया.
दूसरी शादी और कविता से प्यार
ओशो के आश्रम से लौटने के बाद विनोद ने फिल्मों में वापसी की और उनकी जिंदगी में कविता खन्ना आईं. दोनों की पहली मुलाकात एक पार्टी में हुई थी. कविता ने शुरुआत में विनोद के साथ डेट पर जाने से इनकार कर दिया था लेकिन दोनों के बीच बातचीत बढ़ती गई. एक दिन साथ जॉगिंग करने के बाद रिश्ता इतना गहरा हुआ कि दोनों लगातार मिलने लगे. बाद में विनोद ने शादी का प्रस्ताव रखा और 1990 में दोनों विवाह बंधन में बंध गए.
किसिंग सीन से मचा विवाद
विनोद खन्ना के करियर का सबसे चर्चित विवाद 1988 की फिल्म दयावान से जुड़ा है. फिल्म में उनके और माधुरी दीक्षित के बीच एक इंटीमेट किसिंग सीन था, जिसे लेकर बाद में काफी चर्चा हुई. कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि शूटिंग के दौरान निर्देशक के कट कहने के बाद भी किसिंग जारी रही. खुद माधुरी ने सालों बाद इस सीन को याद करते हुए कहा कि उन्हें इसे करने पर शर्मिंदगी महसूस हुई और बाद में उन्होंने ऐसे सीन करने से दूरी बनाने का फैसला किया.
संघर्ष से सुपरस्टार बनने तक
विनोद खन्ना ने 1968 में फिल्मों में कदम रखा और शुरुआती दौर में उन्हें अक्सर नेगेटिव भूमिकाएं मिलीं. धीरे-धीरे उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई और मेरे अपने, मेरा गांव मेरा देश, अमर अकबर एंथनी और कुर्बानी जैसी फिल्मों ने उन्हें बड़े सितारों की कतार में पहुंचा दिया.