2036 Olympics: पीएम नरेंद्र मोदी ने शनिवार को 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए भारत की 2036 ओलंपिक की मेजबानी की दावेदारी को एक बार फिर सामने रखा. पीएम ने साफ संकेत दिया कि अगर भारत को भविष्य में ओलंपिक की मेजबानी करनी है, तो तैयारी केवल मौजूदा पदक जीतने वाले खिलाड़ियों तक सीमित नहीं रह सकती. देश को उन खेलों और स्पर्धाओं में भी अपनी मौजूदगी मजबूत करनी होगी, जहां भारतीय खिलाड़ियों की भागीदारी अभी बहुत कम है या वे क्वालिफाई तक नहीं कर पाते.पीएम के भाषण का खास पहलू यह रहा कि उन्होंने ओलंपिक की संभावित मेजबानी को सिर्फ एक अंतरराष्ट्रीय आयोजन के तौर पर नहीं, बल्कि देश में खेल प्रतिभाओं की व्यापक खोज और उन्हें लंबे समय तक तैयार करने के अभियान से जोड़ा.
करीब 40 खेल में बढ़ानी होगी भारत की मौजूदगी
पीएम मोदी ने कहा कि ओलंपिक में करीब 40 खेल और लगभग 325 से 350 स्पर्धाएं होती हैं. इसके बावजूद भारत कई ऐसी स्पर्धाओं में हिस्सा नहीं लेता, जिनमें दुनिया के दूसरे देश लगातार अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं. कई खेलों में तो भारतीय खिलाड़ी क्वालिफाई तक नहीं कर पाते.ऐसे में भारत के लिए चुनौती केवल उन खेलों में अपना प्रदर्शन बेहतर करना नहीं है, जिनमें देश पहले से मजबूत है. अब जरूरत उन खेलों की पहचान करने की भी है, जहां प्रतिभाएं मौजूद तो हैं, लेकिन उन्हें सही प्रशिक्षण, सुविधाएं और अंतरराष्ट्रीय स्तर की तैयारी नहीं मिल पाती. पीएम ने इसी दिशा में आगे बढ़ने का संकेत देते हुए कहा कि भारत को उन खेलों पर विशेष ध्यान देना होगा, जिनमें अब तक देश की भागीदारी कमजोर रही है.
गांव-गांव और स्कूलों से खोजे जाएंगे खिलाड़ी
पीएम मोदी ने 2036 ओलंपिक की तैयारी के लिए ‘स्पोर्ट्स टैलेंट हंट कैम्पेन’ शुरू करने की बात कही. इस अभियान का उद्देश्य देश के अलग-अलग हिस्सों में छिपी खेल प्रतिभाओं को कम उम्र में पहचानना और उन्हें उनकी क्षमता के मुताबिक आगे बढ़ाना होगा. इसके तहत गांवों, शहरों और स्कूलों तक खेल प्रतिभा खोजने की प्रक्रिया ले जाने पर जोर दिया जाएगा. इसका मतलब यह है कि भविष्य के ओलंपिक खिलाड़ियों की तलाश केवल बड़े शहरों या स्थापित खेल संस्थानों तक सीमित नहीं रहेगी. अगर किसी छोटे शहर, गांव या स्कूल में कोई बच्चा किसी विशेष खेल में असाधारण क्षमता दिखाता है, तो उसकी प्रतिभा को पहचानकर उसे उचित प्रशिक्षण देने की दिशा में काम किया जाएगा.
5 से 15 साल के बच्चों पर रहेगा विशेष ध्यान
इस खेल प्रतिभा खोज अभियान में 5 से 15 वर्ष की उम्र के बच्चों पर खास ध्यान देने की योजना है. इस उम्र में बच्चों की शारीरिक क्षमता, खेल के प्रति रुचि और उनकी स्वाभाविक प्रतिभा को पहचानकर उन्हें उसी क्षेत्र में आगे बढ़ाने की कोशिश की जाएगी. पीएम के मुताबिक बच्चों की क्षमता का आकलन करने के बाद उनकी रुचि और योग्यता के अनुसार विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा. इसका उद्देश्य ऐसे खिलाड़ियों को तैयार करना है, जो आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व कर सकें. यह रणनीति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ओलंपिक स्तर के खिलाड़ी तैयार करने में कई साल लगते हैं. ऐसे में अगर 2036 को लक्ष्य माना जाए तो प्रतिभाओं की पहचान और प्रशिक्षण का काम अभी से शुरू करना जरूरी होगा.
बेटियों की खेल प्रतिभा को भी मिलेगा बढ़ावा
पीएम मोदी ने खेल प्रतिभा खोज अभियान में बेटियों पर भी विशेष ध्यान देने की बात कही. भारत में महिला खिलाड़ियों ने पिछले कुछ वर्षों में कई खेलों में शानदार प्रदर्शन किया है. ऐसे में नई पीढ़ी की लड़कियों को कम उम्र से खेलों के लिए प्रोत्साहित करना भविष्य की बड़ी रणनीति का हिस्सा हो सकता है. बेटियों की प्रतिभा को पहचानकर उन्हें बेहतर प्रशिक्षण, सुविधाएं और प्रतियोगिताओं का अनुभव देने से महिला खिलाड़ियों का आधार और मजबूत किया जा सकता है. इसका असर केवल ओलंपिक तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की अन्य प्रतियोगिताओं में भी दिखाई दे सकता है.
TOPS और खेलो इंडिया जैसी योजनाओं का भी किया जिक्र
पीएम ने अपने संबोधन में पिछले कुछ वर्षों में खेलों के क्षेत्र में किए गए कामों का भी उल्लेख किया. उन्होंने 2014 में शुरू की गई टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम यानी TOPS को खिलाड़ियों के लिए महत्वपूर्ण सहायता व्यवस्था बताया. इस योजना के माध्यम से देश के शीर्ष खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए आवश्यक सहायता और तैयारी में सहयोग देने पर जोर दिया गया है. पीएम ने कहा कि इस तरह की व्यवस्थाओं ने भारतीय खिलाड़ियों को बड़े अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बेहतर प्रदर्शन करने में मदद की है. इसके साथ ही उन्होंने खेलो इंडिया गेम्स, यूनिवर्सिटी गेम्स, बीच गेम्स और विंटर गेम्स जैसी प्रतियोगिताओं का भी उल्लेख किया. स्पोर्ट्स ट्रेनिंग के साथ-साथ स्पोर्ट्स मेडिसिन और स्पोर्ट्स न्यूट्रिशन जैसे क्षेत्रों में किए जा रहे काम को भी उन्होंने खेलों के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया.
भारत की पदक क्षमता अब पारंपरिक खेलों से आगे बढ़ रही
भारत का खेल प्रदर्शन पिछले कुछ वर्षों में कई क्षेत्रों में बेहतर हुआ है. पीएम ने इस बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में कई मौकों पर तिरंगा सबसे ऊपर दिखाई देता है. हालिया कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने कुल 39 पदक जीते, जिनमें 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य पदक शामिल रहे. भारत पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहा. हालांकि, इस प्रतियोगिता का दायरा अपेक्षाकृत छोटा था और इसमें कुश्ती, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, हॉकी और शूटिंग जैसे भारत के कई पारंपरिक मजबूत खेल शामिल नहीं थे. इसके बावजूद बॉक्सिंग, जूडो, वेटलिफ्टिंग और पैरा खेलों में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन उत्साहजनक रहा. यह संकेत देता है कि भारतीय खेल प्रतिभा का दायरा अब धीरे-धीरे उन क्षेत्रों तक भी बढ़ रहा है, जिनमें पहले देश की मौजूदगी सीमित मानी जाती थी.
अब एशियन गेम्स पर भी रहेगी भारत की नजर
2036 ओलंपिक की तैयारी के बीच भारत के सामने निकट भविष्य की बड़ी चुनौती एशियन गेम्स भी है. एशियन गेम्स का आयोजन 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक जापान के आइची प्रीफेक्चर और नागोया शहर में होना है. इन खेलों में भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन से देश की मौजूदा खेल क्षमता का एक और आकलन होगा. ऐसे समय में पीएम की ओर से कम उम्र में नई प्रतिभाओं को खोजने और तैयार करने पर जोर यह बताता है कि सरकार खेल नीति को केवल तत्काल पदक तक सीमित नहीं रखना चाहती.
सिर्फ मौजूदा चैंपियनों पर नहीं, अगली पीढ़ी पर दांव
लाल किले से पीएम मोदी का संदेश सिर्फ उन खिलाड़ियों तक सीमित नहीं रहा, जो आज भारत के लिए पदक जीत रहे हैं. इसमें भविष्य के खिलाड़ियों की तलाश पर भी उतना ही जोर दिखाई दिया.
खास तौर पर ऐसे खेलों में नई प्रतिभाओं को तैयार करने की योजना महत्वपूर्ण है, जहां भारत की मौजूदगी अभी कमजोर है. कम उम्र में प्रतिभा पहचानने, लंबे समय तक प्रशिक्षण देने और उन्हें आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने से 2036 तक एक मजबूत और व्यापक खेल आधार तैयार किया जा सकता है.यानी भारत की ओलंपिक तैयारी का लक्ष्य अब केवल कुछ चुनिंदा खेलों में पदक बढ़ाना नहीं, बल्कि देश के खेल नक्शे को और व्यापक बनाना है. अगर यह अभियान प्रभावी तरीके से लागू होता है, तो आने वाले वर्षों में छोटे शहरों, गांवों और स्कूलों से निकलने वाले खिलाड़ी भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करते नजर आ सकते हैं.