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टूटा पैर लेकर अस्पताल पहुंचा मरीज, प्लास्टर नहीं था तो डॉक्टरों ने बांध दिया गत्ता, देखें वीडियो

बिहार के बेगूसराय के मंझौल अस्पताल से एक घटना सामने आई है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल उठाया है. इसकी एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. देखा जा सकता है कि किस तरह से प्लास्टर की कमी के कारण डॉक्टरों ने मरीज के टूटे पैर पर गत्ता बांध दिया.

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Last Updated: August 7, 2026 13:12:32 IST

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Bihar Health System: बिहार के बेगूसराय जिले के मंझौल के अस्पताल से एक वीडियो सामने आया है. वीडियो में देखा जा सकता है कि एक व्यक्ति अस्पताल के बेड पर लेटा हुआ है. उसके टूटे पैर पर कार्टन यानी गत्ता बंधा हुआ है. टूटे पैर को कार्टन से बांधकर बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल बेगूसराय रेफर किया गया. वीडियो वायरल होने के बाद आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं. इसके वायरल होने के बाद चिकित्सकीय जानकारों का कहना है कि जब संसाधनों की कमी होती है, तो मरीज के पैर को अस्थायी रूप से स्थिर रखने के लिए ऐसा किया जाता है.

क्या है पूरा मामला?

बता दें कि नावकोठी थाना क्षेत्र के महेशवारा वार्ड-4 निवासी कृष्ण कुमार 15 जुलाई की रात गढ़पुरा से वापस अपने घर जा रहे थे. इसी दौरान मंझौल थाना क्षेत्र के हरसाइन पुल के पास उन्हें टैंपो ने टक्कर मार दी ऐऔर वो घायल हो गए. इसके बाद डायल 112 पुलिस ने उन्हें इलाज के लिए मंझौल अस्पताल पहुंचाया. जांच के दौरान डॉक्टरों ने आशंका जताई कि उसके पैर में फ्रैक्चर हो गया. इस दौरान अस्पताल में संसाधनों की कमी के कारण उसके पैर को स्थिर रखने के लिए कार्टन का इस्तेमाल किया गया. 

अस्पताल में 70 फीसदी मानव संसाधन की कमी

किसी ने इस पूरी घटना का वीडियो बना लिया और सोशल मीडिया पर डाल दिया. अस्पताल प्रबंधक गौरी शंकर ने इस बारे में बताया कि अस्पताल में आर्थोपेडिक के केवल एक ही डॉक्टर हैं. ड्रेसर, ओटी असिस्टेंट, वार्ड ब्वॉय, फोर्थ ग्रेड कर्मियों समेत लगभग 70 फीसदी लोगों की कमी है. उन्होंने बताया कि मरीज को चिकित्सकीय प्रोटोकॉल के तहत कार्टन से पैर स्थिर कर जिला अस्पताल रेफर कर दिया.     वहीं स्थानीय लोगों ने इस मामले की जांच करने की मांग की है.

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Last Updated: August 7, 2026 13:12:32 IST

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Bihar Health System: बिहार के बेगूसराय जिले के मंझौल के अस्पताल से एक वीडियो सामने आया है. वीडियो में देखा जा सकता है कि एक व्यक्ति अस्पताल के बेड पर लेटा हुआ है. उसके टूटे पैर पर कार्टन यानी गत्ता बंधा हुआ है. टूटे पैर को कार्टन से बांधकर बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल बेगूसराय रेफर किया गया. वीडियो वायरल होने के बाद आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं. इसके वायरल होने के बाद चिकित्सकीय जानकारों का कहना है कि जब संसाधनों की कमी होती है, तो मरीज के पैर को अस्थायी रूप से स्थिर रखने के लिए ऐसा किया जाता है.

क्या है पूरा मामला?

बता दें कि नावकोठी थाना क्षेत्र के महेशवारा वार्ड-4 निवासी कृष्ण कुमार 15 जुलाई की रात गढ़पुरा से वापस अपने घर जा रहे थे. इसी दौरान मंझौल थाना क्षेत्र के हरसाइन पुल के पास उन्हें टैंपो ने टक्कर मार दी ऐऔर वो घायल हो गए. इसके बाद डायल 112 पुलिस ने उन्हें इलाज के लिए मंझौल अस्पताल पहुंचाया. जांच के दौरान डॉक्टरों ने आशंका जताई कि उसके पैर में फ्रैक्चर हो गया. इस दौरान अस्पताल में संसाधनों की कमी के कारण उसके पैर को स्थिर रखने के लिए कार्टन का इस्तेमाल किया गया. 

अस्पताल में 70 फीसदी मानव संसाधन की कमी

किसी ने इस पूरी घटना का वीडियो बना लिया और सोशल मीडिया पर डाल दिया. अस्पताल प्रबंधक गौरी शंकर ने इस बारे में बताया कि अस्पताल में आर्थोपेडिक के केवल एक ही डॉक्टर हैं. ड्रेसर, ओटी असिस्टेंट, वार्ड ब्वॉय, फोर्थ ग्रेड कर्मियों समेत लगभग 70 फीसदी लोगों की कमी है. उन्होंने बताया कि मरीज को चिकित्सकीय प्रोटोकॉल के तहत कार्टन से पैर स्थिर कर जिला अस्पताल रेफर कर दिया.     वहीं स्थानीय लोगों ने इस मामले की जांच करने की मांग की है.

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