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Home > धर्म > Kab Hai Radha Ashtami 2026: जन्माष्टमी के बाद राधा अष्टमी क्यों? 15 दिन का ये कनेक्शन है बेहद खास, जानें पूरी वजह

Kab Hai Radha Ashtami 2026: जन्माष्टमी के बाद राधा अष्टमी क्यों? 15 दिन का ये कनेक्शन है बेहद खास, जानें पूरी वजह

Radha Ashtami 2026 Date: राधा अष्टमी 2026 में 19 सितंबर को मनाई जाएगी. यह पर्व जन्माष्टमी के करीब 15 दिन बाद आता है. राधा रानी को प्रेम और भक्ति का प्रतीक माना जाता है.

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Last Updated: September 16, 2026 15:48:13 IST

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Radha Ashtami 2026 Date: भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव यानी जन्माष्टमी मनाई जाती है. इसके ठीक 15 दिन बाद भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी को राधा अष्टमी का पर्व आता है. हिंदू धर्म में राधा रानी को प्रेम और भक्ति का प्रतीक माना गया है. धार्मिक मान्यता है कि राधा रानी की कृपा के बिना कृष्ण भक्ति का पूरा फल नहीं मिलता.

राधा अष्टमी 2026 कब है?

पंचांग के अनुसार, हर साल भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा अष्टमी मनाई जाती है. साल 2026 में राधा अष्टमी का पर्व 19 सितंबर, शनिवार को मनाया जाएगा.  द्रिक पंचांग के अनुसार, अष्टमी तिथि 18 सितंबर 2026 को दोपहर 1:00 बजे शुरू होगी और 19 सितंबर को दोपहर 3:26 बजे समाप्त होगी. उदया तिथि के अनुसार राधा अष्टमी 19 सितंबर को मनाई जाएगी. पूजा का शुभ समय सुबह 11:01 बजे से दोपहर 1:28 बजे तक रहेगा.

जन्माष्टमी के 15 दिन बाद क्यों आती है राधा अष्टमी?

जन्माष्टमी और राधा अष्टमी का संबंध दोनों की अष्टमी तिथियों से है. श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी को हुआ था. इसके करीब 15 दिन बाद भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी आती है. इसी शुक्ल पक्ष की अष्टमी को राधा अष्टमी के रूप में मनाया जाता है. इसलिए दोनों त्योहारों के बीच लगभग 15 दिनों का अंतर रहता है.

कौन हैं राधा रानी?

धार्मिक मान्यताओं में राधा रानी को भगवान श्रीकृष्ण की परम प्रिय और उनकी आंतरिक शक्ति माना जाता है. राधा-कृष्ण का संबंध प्रेम, भक्ति और समर्पण का प्रतीक है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, राधा रानी का जन्म बरसाना में हुआ था. उनके पिता वृषभानु और माता का नाम कीर्ति देवी बताया जाता है. ब्रज क्षेत्र में राधा-कृष्ण से जुड़ी कई कथाएं आज भी प्रसिद्ध हैं.

ये भी पढ़ें: पहले उतारे महिला के कपड़े, फिर बदन पर मिर्च…पंचायत ने सुनाया ऐसा तालिबानी फरमान; सुन कांप उठेगी रूह

कृष्ण पूजा में राधा का महत्व

भक्त परंपरा में राधा को कृष्ण प्रेम और भक्ति का स्वरूप माना जाता है. इसी कारण कई वैष्णव परंपराओं में कृष्ण के साथ राधा रानी का नाम लिया जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, राधा रानी की कृपा से कृष्ण भक्ति और भी पूर्ण मानी जाती है.

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Radha Ashtami 2026 Date: भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव यानी जन्माष्टमी मनाई जाती है. इसके ठीक 15 दिन बाद भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी को राधा अष्टमी का पर्व आता है. हिंदू धर्म में राधा रानी को प्रेम और भक्ति का प्रतीक माना गया है. धार्मिक मान्यता है कि राधा रानी की कृपा के बिना कृष्ण भक्ति का पूरा फल नहीं मिलता.

राधा अष्टमी 2026 कब है?

पंचांग के अनुसार, हर साल भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा अष्टमी मनाई जाती है. साल 2026 में राधा अष्टमी का पर्व 19 सितंबर, शनिवार को मनाया जाएगा.  द्रिक पंचांग के अनुसार, अष्टमी तिथि 18 सितंबर 2026 को दोपहर 1:00 बजे शुरू होगी और 19 सितंबर को दोपहर 3:26 बजे समाप्त होगी. उदया तिथि के अनुसार राधा अष्टमी 19 सितंबर को मनाई जाएगी. पूजा का शुभ समय सुबह 11:01 बजे से दोपहर 1:28 बजे तक रहेगा.

जन्माष्टमी के 15 दिन बाद क्यों आती है राधा अष्टमी?

जन्माष्टमी और राधा अष्टमी का संबंध दोनों की अष्टमी तिथियों से है. श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी को हुआ था. इसके करीब 15 दिन बाद भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी आती है. इसी शुक्ल पक्ष की अष्टमी को राधा अष्टमी के रूप में मनाया जाता है. इसलिए दोनों त्योहारों के बीच लगभग 15 दिनों का अंतर रहता है.

कौन हैं राधा रानी?

धार्मिक मान्यताओं में राधा रानी को भगवान श्रीकृष्ण की परम प्रिय और उनकी आंतरिक शक्ति माना जाता है. राधा-कृष्ण का संबंध प्रेम, भक्ति और समर्पण का प्रतीक है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, राधा रानी का जन्म बरसाना में हुआ था. उनके पिता वृषभानु और माता का नाम कीर्ति देवी बताया जाता है. ब्रज क्षेत्र में राधा-कृष्ण से जुड़ी कई कथाएं आज भी प्रसिद्ध हैं.

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कृष्ण पूजा में राधा का महत्व

भक्त परंपरा में राधा को कृष्ण प्रेम और भक्ति का स्वरूप माना जाता है. इसी कारण कई वैष्णव परंपराओं में कृष्ण के साथ राधा रानी का नाम लिया जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, राधा रानी की कृपा से कृष्ण भक्ति और भी पूर्ण मानी जाती है.

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