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Home > राज्य > छत्तीसगढ़ > Chhattisgarh: तीन महीने नो लीव! सुशासन तिहार और जनगणना को लेकर फरमान, क्या प्रशासनिक मशीनरी पर बढ़ा दबाव?

Chhattisgarh: तीन महीने नो लीव! सुशासन तिहार और जनगणना को लेकर फरमान, क्या प्रशासनिक मशीनरी पर बढ़ा दबाव?

Dhamtari News: धमतरी प्रशासन इस बार सुशासन तिहार को लेकर किसी भी तरह की ढिलाई के मूड में नहीं है. साथ ही, जनगणना जैसे व्यापक और संवेदनशील कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की चुनौती भी सामने है.

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Last Updated: April 28, 2026 21:19:39 IST

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Chhattisgarh News: धमतरी जिले में सुशासन तिहार और आगामी जनगणना की तैयारियों के बीच जिला प्रशासन ने ऐसा आदेश जारी किया है, जिसने सरकारी महकमे में हलचल मचा दी है. कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के निर्देश पर अगले तीन महीनों तक बिना पूर्व अनुमति किसी भी शासकीय सेवक के अवकाश पर जाने पर रोक लगा दी गई है. सवाल उठ रहा है—क्या यह सख्ती जरूरी प्रशासनिक कदम है या सिस्टम पर बढ़ते दबाव की झलक?

सूत्रों के अनुसार, प्रशासन इस बार सुशासन तिहार को लेकर किसी भी तरह की ढिलाई के मूड में नहीं है. साथ ही, जनगणना जैसे व्यापक और संवेदनशील कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की चुनौती भी सामने है. ऐसे में हर कर्मचारी की मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए यह सख्त निर्देश जारी किए गए हैं.

स्वैच्छिक अनुपस्थिति माना जाएगा

आदेश में साफ कहा गया है कि बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के अनुपस्थित रहने पर इसे “स्वैच्छिक अनुपस्थिति” माना जाएगा और मामला “ब्रेक इन सर्विस” तक दर्ज हो सकता है—जो कर्मचारियों के करियर पर सीधा असर डाल सकता है.

हालांकि, इस आदेश ने कर्मचारियों के बीच असहजता भी बढ़ा दी है. अंदरखाने चर्चा है कि अचानक लागू हुई इस ‘नो लीव पॉलिसी’ से व्यक्तिगत और पारिवारिक जरूरतों को संभालना मुश्किल हो सकता है.

अधिकारियों के पास रहेगा अंतिम स्वीकृति का अधिकार

खासकर उन कर्मचारियों के लिए, जिनकी पहले से छुट्टियां तय थीं या आकस्मिक परिस्थितियां सामने आ सकती हैं. प्रशासन ने भले ही आकस्मिक अवकाश के लिए डिजिटल या दूरभाष से सूचना देने की छूट दी हो, लेकिन अंतिम स्वीकृति का अधिकार अधिकारियों के पास ही रहेगा.

फिलहाल, जिला प्रशासन ने सभी विभाग प्रमुखों को इस आदेश का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए हैं और साफ चेतावनी दी है कि उल्लंघन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई तय है.

अब देखना दिलचस्प होगा कि यह कड़ा फैसला सुशासन तिहार और जनगणना को कितनी रफ्तार देता है—या फिर कर्मचारियों की नाराजगी एक नया प्रशासनिक मुद्दा खड़ा करती है.

Disclaimer: The article is a part of syndicated feed. Except for the headline, the content is not edited. Liability lies with the syndication partner for factual accuracy.

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Chhattisgarh News: धमतरी जिले में सुशासन तिहार और आगामी जनगणना की तैयारियों के बीच जिला प्रशासन ने ऐसा आदेश जारी किया है, जिसने सरकारी महकमे में हलचल मचा दी है. कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के निर्देश पर अगले तीन महीनों तक बिना पूर्व अनुमति किसी भी शासकीय सेवक के अवकाश पर जाने पर रोक लगा दी गई है. सवाल उठ रहा है—क्या यह सख्ती जरूरी प्रशासनिक कदम है या सिस्टम पर बढ़ते दबाव की झलक?

सूत्रों के अनुसार, प्रशासन इस बार सुशासन तिहार को लेकर किसी भी तरह की ढिलाई के मूड में नहीं है. साथ ही, जनगणना जैसे व्यापक और संवेदनशील कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की चुनौती भी सामने है. ऐसे में हर कर्मचारी की मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए यह सख्त निर्देश जारी किए गए हैं.

स्वैच्छिक अनुपस्थिति माना जाएगा

आदेश में साफ कहा गया है कि बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के अनुपस्थित रहने पर इसे “स्वैच्छिक अनुपस्थिति” माना जाएगा और मामला “ब्रेक इन सर्विस” तक दर्ज हो सकता है—जो कर्मचारियों के करियर पर सीधा असर डाल सकता है.

हालांकि, इस आदेश ने कर्मचारियों के बीच असहजता भी बढ़ा दी है. अंदरखाने चर्चा है कि अचानक लागू हुई इस ‘नो लीव पॉलिसी’ से व्यक्तिगत और पारिवारिक जरूरतों को संभालना मुश्किल हो सकता है.

अधिकारियों के पास रहेगा अंतिम स्वीकृति का अधिकार

खासकर उन कर्मचारियों के लिए, जिनकी पहले से छुट्टियां तय थीं या आकस्मिक परिस्थितियां सामने आ सकती हैं. प्रशासन ने भले ही आकस्मिक अवकाश के लिए डिजिटल या दूरभाष से सूचना देने की छूट दी हो, लेकिन अंतिम स्वीकृति का अधिकार अधिकारियों के पास ही रहेगा.

फिलहाल, जिला प्रशासन ने सभी विभाग प्रमुखों को इस आदेश का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए हैं और साफ चेतावनी दी है कि उल्लंघन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई तय है.

अब देखना दिलचस्प होगा कि यह कड़ा फैसला सुशासन तिहार और जनगणना को कितनी रफ्तार देता है—या फिर कर्मचारियों की नाराजगी एक नया प्रशासनिक मुद्दा खड़ा करती है.

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