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तीस हजारी कोर्ट का सख्त रुख, पूर्व IRS अधिकारी पर हमले में CBI के जॉइंट डायरेक्टर को सजा

CBI Joint Director Sentenced: दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने मंगलवार को एक अहम फैसला सुनाते हुए,  CBI के जॉइंट डायरेक्टर रमनीश और रिटायर्ड पुलिस अधिकारी VK पांडे को तीन महीने की जेल की सज़ा सुनाई और उन दोनों पर ₹50,000 का जुर्माना भी लगाया.

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Last Updated: 2026-04-28 20:49:29

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Tis Hazari Court Verdict: दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने मंगलवार को एक अहम फैसला सुनाते हुए,  CBI के जॉइंट डायरेक्टर रमनीश और रिटायर्ड पुलिस अधिकारी VK पांडे को तीन महीने की जेल की सज़ा सुनाई और उन दोनों पर ₹50,000 का जुर्माना भी लगाया. यह मामला साल 2000 में, पूर्व IRS अधिकारी अशोक अग्रवाल की शिकायत के बाद दर्ज किया गया था. ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास शशांक नंदन भट्ट ने यह आदेश जारी किया.
 
यह बताना ज़रूरी है कि 18 अप्रैल को कोर्ट ने CBI के जॉइंट डायरेक्टर रमनीश और रिटायर्ड ACP VK पांडे (जो उस समय CBI में तैनात थे) को दोषी ठहराया था. कोर्ट ने दोनों व्यक्तियों को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 323, 427, 448 और 34 के तहत दोषी पाया.
 

क्या है पूरा मामला?

असल में, यह मामला 1985 बैच के IIS अधिकारी अशोक अग्रवाल द्वारा दर्ज की गई एक शिकायत से जुड़ा है. उस समय, अशोक अग्रवाल दिल्ली में प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) के डिप्टी डायरेक्टर के तौर पर काम कर रहे थे. अग्रवाल ने आरोप लगाया था कि 19 अक्टूबर, 2000 को की गई छापेमारी, जिसमें उनके घर की तलाशी ली गई और उसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया पूरी तरह से गलत और दुर्भावनापूर्ण थी. अपने आदेश में, तीस हजारी कोर्ट ने कहा कि यह छापेमारी सिर्फ़ 28 सितंबर, 2000 को केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) द्वारा जारी एक आदेश से बचने के इरादे से की गई थी.
 

अधिकारियों ने एक बेकसूर सरकारी कर्मचारी को परेशान करने की कोशिश की

अपने आदेश में, CAT ने निर्देश दिया था कि अग्रवाल के निलंबन की समीक्षा चार हफ़्तों के भीतर की जाए. कोर्ट ने पाया कि इस निर्देश का पालन करने के बजाय, CBI अधिकारियों ने 18 अक्टूबर, 2000 की शाम को एक गुपचुप बैठक की, और अशोक अग्रवाल के घर पर छापेमारी करने और अगली सुबह उन्हें गिरफ्तार करने की साज़िश रची. कोर्ट ने आगे कहा कि अशोक अग्रवाल के घर की तलाशी और उनकी गिरफ्तारी से जुड़े काम न सिर्फ़ गैर-कानूनी थे, बल्कि उनसे साफ तौर पर सत्ता का घोर दुरुपयोग भी ज़ाहिर होता है. अपनी सरकारी पद का गलत इस्तेमाल करके, अधिकारियों ने एक बेकसूर सरकारी कर्मचारी को परेशान करने की कोशिश की.
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Tis Hazari Court Verdict: दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने मंगलवार को एक अहम फैसला सुनाते हुए,  CBI के जॉइंट डायरेक्टर रमनीश और रिटायर्ड पुलिस अधिकारी VK पांडे को तीन महीने की जेल की सज़ा सुनाई और उन दोनों पर ₹50,000 का जुर्माना भी लगाया. यह मामला साल 2000 में, पूर्व IRS अधिकारी अशोक अग्रवाल की शिकायत के बाद दर्ज किया गया था. ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास शशांक नंदन भट्ट ने यह आदेश जारी किया.
 
यह बताना ज़रूरी है कि 18 अप्रैल को कोर्ट ने CBI के जॉइंट डायरेक्टर रमनीश और रिटायर्ड ACP VK पांडे (जो उस समय CBI में तैनात थे) को दोषी ठहराया था. कोर्ट ने दोनों व्यक्तियों को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 323, 427, 448 और 34 के तहत दोषी पाया.
 

क्या है पूरा मामला?

असल में, यह मामला 1985 बैच के IIS अधिकारी अशोक अग्रवाल द्वारा दर्ज की गई एक शिकायत से जुड़ा है. उस समय, अशोक अग्रवाल दिल्ली में प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) के डिप्टी डायरेक्टर के तौर पर काम कर रहे थे. अग्रवाल ने आरोप लगाया था कि 19 अक्टूबर, 2000 को की गई छापेमारी, जिसमें उनके घर की तलाशी ली गई और उसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया पूरी तरह से गलत और दुर्भावनापूर्ण थी. अपने आदेश में, तीस हजारी कोर्ट ने कहा कि यह छापेमारी सिर्फ़ 28 सितंबर, 2000 को केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) द्वारा जारी एक आदेश से बचने के इरादे से की गई थी.
 

अधिकारियों ने एक बेकसूर सरकारी कर्मचारी को परेशान करने की कोशिश की

अपने आदेश में, CAT ने निर्देश दिया था कि अग्रवाल के निलंबन की समीक्षा चार हफ़्तों के भीतर की जाए. कोर्ट ने पाया कि इस निर्देश का पालन करने के बजाय, CBI अधिकारियों ने 18 अक्टूबर, 2000 की शाम को एक गुपचुप बैठक की, और अशोक अग्रवाल के घर पर छापेमारी करने और अगली सुबह उन्हें गिरफ्तार करने की साज़िश रची. कोर्ट ने आगे कहा कि अशोक अग्रवाल के घर की तलाशी और उनकी गिरफ्तारी से जुड़े काम न सिर्फ़ गैर-कानूनी थे, बल्कि उनसे साफ तौर पर सत्ता का घोर दुरुपयोग भी ज़ाहिर होता है. अपनी सरकारी पद का गलत इस्तेमाल करके, अधिकारियों ने एक बेकसूर सरकारी कर्मचारी को परेशान करने की कोशिश की.
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