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रिफाइनरी में एरिया ग्रेडिंग के काम में मिट्टी निकालने के साथ स्क्रैप की चोरी, IOCL को लग रहा करोड़ों रुपयों का फटका, अधिकारियों और CISF की मिलीभक्त का अंदेशा

पानीपत रिफाइनरी में इन दिनों रिफाइनरी विस्तारीकरण और कई नई परियोजनाओं के लिए कार्य प्रगति पर हैं। पीवीआर प्लांट के नजदीक एक दूसरा प्लांट स्थापित होना है, जिसके लिए नैफ्था क्रेकर प्लांट के पास बड़े पैमाने पर एरिया ग्रेडिंग (क्षेत्र की सफाई और समतलीकरण) का कार्य किया जा रहा है। लेकिन इस काम की आड़ में ठेकेदार कंपनी द्वारा स्क्रैप चोरी का गंभीर मामला सामने आया है।

India News (इंडिया न्यूज), Panipat Refinery : पानीपत रिफाइनरी में इन दिनों रिफाइनरी विस्तारीकरण और कई नई परियोजनाओं के लिए कार्य प्रगति पर हैं। पीवीआर प्लांट के नजदीक एक दूसरा प्लांट स्थापित होना है, जिसके लिए नैफ्था क्रेकर प्लांट के पास बड़े पैमाने पर एरिया ग्रेडिंग (क्षेत्र की सफाई और समतलीकरण) का कार्य किया जा रहा है। लेकिन इस काम की आड़ में ठेकेदार कंपनी द्वारा स्क्रैप चोरी का गंभीर मामला सामने आया है।

स्थानीय लोगों और सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, एरिया ग्रेडिंग का ठेका संभाल रही डीटीएच कंपनी मिट्टी के साथ-साथ भारी मात्रा में स्क्रैप भी डंपर में लोड़कर बाहर निकाल रही है, जिसे बाजार में ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है। इससे आईओसीएल को करोड़ों रुपये का फटका लग रहा है।

पहले था स्क्रैप यार्ड, अब बन रहा है नया प्लांट

स्थानीय लोगों ने बताया कि जहां अब एमएचए प्लांट बनना है, वहां पर पहले स्क्रैप यार्ड है। यहां परियोजनाओं से बचा हुआ लोहे का स्क्रैप जैसे एंगल, गाटर, लोहे व एस.एस. की प्लेटें, कॉपर, तारें आदि एकत्रित कर रखी गई थीं। ठेकेदार कंपनी अब इस स्क्रैप को मिट्टी में छिपाकर डंपर में भरकर बाहर भेज रही है, जिससे साफ है कि चोरी सुनियोजित तरीके से की जा रही है।

मिट्टी के बहाने स्क्रैप की चोरी, अधिकारी मौन

सूत्रों ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया कि यह सारा काम रिफाइनरी अधिकारियों की मिलीभक्त से हो रहा है। यदि ऐसा न होता, तो अधिकारियों की आंखों के सामने चल रही यह गड़बड़ी रोकी जा सकती थी। लेकिन अब तक न तो किसी डंपर की जांच हुई है और न ही कोई कार्रवाई। इससे साफ संकेत मिलता है कि अधिकारी भी इस भ्रष्टाचार में हिस्सेदार हो सकते हैं। इतना ही नहीं डंपर लोडिंग के समय सीआइएसएफ का जवान भी वहां पर तैनात रहता है। इसके बाद भी स्क्रैप चोरी होना बहुत कुछ बयां करता है।

स्क्रैप की होनी चाहिए थी बोली – स्थानीय लोग

स्थानीय लोगों का कहना है कि जो स्क्रैप एरिया ग्रेडिंग क्षेत्र में पड़ा हुआ था, पहले उसे इकट्ठा कर बोली के जरिए बेचा जाना चाहिए था। जिससे कंपनी को सीधा राजस्व प्राप्त होता। लेकिन ऐसा नहीं किया गया। उल्टा ठेकेदार को ये स्क्रैप उठाने की खुली छूट दे दी गई, जिससे आइओसीएल जैसी महारत्ना कंपनी को करोड़ों रुपए का सीधा नुकसान हो रहा है।

ठेकेदार बोले हम बाध्य नहीं, अधिकारियों से पूछो

जब इस विषय में एरिया ग्रेडिंग का काम कर रही कंपनी डीटीएच के मालिक सतीश कुमार से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा “मैंने रिफाइनरी से ठेके पर काम लिया है। इस बारे में पत्रकारों से बात करने के लिए मैं बाध्य नहीं हूं। आप रिफाइनरी अधिकारियों से बात करें।”
ठेकेदार की इस प्रतिक्रिया से कई सवाल खड़े होते हैं, यदि सब कुछ नियमों के अनुसार हो रहा है, तो जानकारी साझा करने से क्यों इनकार किया गया?

आइओसीएल का नुक़सान हर भारतीय का नुकसान

लोगों का कहना है कि आइओसीएल भारत सरकार की एक महारत्ना कंपनी है। जिसका हर भारतीय शेयर होल्डर है। अगर आइओसीएल का नुक़सान हो रहा है तो वह नुकसान हर भारतीय का नुक़सान है। ऐसे में किसी ठेकेदार कंपनी द्वारा इस तरह से जनधन की चोरी करना देशहित के खिलाफ है। अगर इस पर जल्द रोक नहीं लगाई गई, तो ये गड़बड़ियां और अधिक गहराती जाएंगी।

रात के अंधेरे में दिया जाता है चोरी को अंजाम

लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जिस क्षेत्र में एरिया ग्रेडिंग का काम चल रहा है, वहां पर दिन में कम डंपर मिट्टी से भरकर बाहर निकाले जाते हैं। और जैसे ही अंधेरा होना शुरू हो जाता है तो डंपरों में मिट्टी के साथ-साथ भारी मात्रा में स्क्रैप लोड कर बाहर निकाला जा रहा है। जिन डंपरों में अधिक स्क्रैप लोड़कर बाहर निकाला जाता है। उन डंपरों को बाहर सुरक्षित स्थान पर खाली कर उसमें से स्क्रैप अलग निकालकर दूसरी गाड़ी में लोड कर मार्केट में ऊंचे दामों पर बेचा जाता है। जिससे ठेकेदार कंपनी द्वारा आइओसीएल को मोटा फटका लगाया जा रहा है।

कमेटी गठित कर इसकी जांच करवाएंगे

जब रिफाइनरी के मानव संसाधन विभाग के मुख्य महाप्रबंधक ओम प्रकाश से मिट्टी के साथ स्क्रैप बाहर निकालने के बारे में बात की गई तो उन्होंने बताया कि रिफाइनरी प्रोजेक्ट विभाग के अधिकारियों के अनुसार सीआईएसएफ के कर्मचारियों की मौजूदगी में यह गाड़ियां लोडकर बाहर निकाली जा रही हैं। जिस सामान की कोई आर्थिक कीमत नहीं है उसको बाहर निकाला जा रहा है। ठेकेदार कंपनी को कीमती वस्तु को निकाल कर वंही एक साइड पर रखना है। अगर कीमती वस्तु को बाहर निकाला जा रहा है तो हम कमेटी गठित कर इसकी जांच करवाएंगे।

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