हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने हाल ही में घरेलू हिंसा से जुड़े एक मामले में साफ किया कि बहू के नाम वाले घर में भी सास का रहने का अधिकार है. कोर्ट ने कहा कि बहू सास को सिर्फ इसलिए बेदखल नहीं कर सकती कि मकान उसके नाम पर है और उसने ये मकान अपनी कमाई से खरीदा है.
अदालत का कहना है कि साझा गृहस्थी के अधिकार के तहत सास के घर में रहने के लिए ये जरूरी नहीं है कि संपत्ति पति, सास या पीड़ित महिला के नाम पर हो.
बहू के नाम वाले घर में भी सास को रहने का अधिकार
जस्टिस राकेश कैथला ने सुरभि बेदी बनाम मनजीत कौर मामले में बहू की याचिका को खारिज कर दिया. जस्टिस राकेश कैथला ने कहा कि बहू के नाम वाले घर में भी सास को रहने का पूरा अधिकार है. कोर्ट ने मंडी जिले की निचली अदालत और अपीलीय अदालत के उस फैसले को सही माना, जिनमें सास के संयुक्त कब्जे को बहाल करने का आदेश दिया गया था.
अदालत ने स्पष्ट किया कि सिर्फ मालिकाना हक किसी एक के नाम पर हो जाने से साझा गृहस्थी का अधिकार खत्म नहीं होता. इसीलिए सास को घर से नहीं निकाला जा सकता. दरअसल, मंडी जिले के रामनगर निवासी एक महिला ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए कहा था कि उसके बेटे की शादी साल 2013 में हुई थी और पूरा परिवार एक ही घर में रहता था. साल 2025 में परिवार में विवाद हुआ तो बहू ने कहा कि ये घर उसने अपनी निजी कमाई से बनवाया है. मकान पर सिर्फ उसका अधिकार है. उसने किरायेदार रखकर सास को घर से बाहर निकाल दिया.
सास को बेदखल करना गैरकानूनी
बता दें कि सास ने घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत कोर्ट का दवराजा खटखटाते हुए अपने लिए सुरक्षा, संरक्षण और निवास के अधिकार की मांग की थी. वहीं बहू का कहना था कि उसने ये मकान अपनी कमाई से खरीदा है. उसकी मालिक सिर्फ वही है. बहू ने अदालत को ये भी बताया कि पहले सास-ससुर उसके साथ ही रहते थे. इस पर कोर्ट ने कहा कि सास पहले बहू के साथ रहती थी ऐसे में उनके बीच घरेलू संबंध स्थापित होता है. ऐसे में बहू का किसी तीसरे को किरायेदार बनाकर सास को घर से अप्रत्यक्ष रूप से बेदखल करना कानूनन सही नहीं है.