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MP: डिंडौरी में 5 माह से वेतन नहीं, मनरेगा कर्मचारियों का फूटा गुस्सा, 4 मई से 5 दिन की सामूहिक हड़ताल की घोषणा

Dindori News: मनरेगा कर्मचारियों ने बताया कि अपनी मांगों को लेकर उन्होंने 13 अप्रैल 2026 को प्रशासन को ज्ञापन सौंपा था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई. इससे कर्मचारियों में आक्रोश और बढ़ गया है.

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Last Updated: April 30, 2026 22:13:44 IST

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MP News: डिंडौरी जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) से जुड़े संविदा कर्मचारियों का धैर्य अब जवाब देने लगा है. पिछले पांच महीनों से मानदेय नहीं मिलने से नाराज कर्मचारियों ने 4 मई से 8 मई 2026 तक पांच दिवसीय सामूहिक अवकाश पर जाने का ऐलान किया है. इस निर्णय से जिले में मनरेगा कार्यों पर व्यापक असर पड़ने की आशंका है.

कर्मचारियों का कहना है कि वे शासन के निर्देशानुसार पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं, लेकिन लगातार पांच माह से वेतन नहीं मिलने के कारण उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है. बच्चों की स्कूल फीस, बैंक ऋण की किस्तें, मकान किराया, बिजली बिल और अन्य आवश्यक खर्चों का वहन करना मुश्किल हो गया है. कई कर्मचारियों को मकान मालिकों के दबाव का भी सामना करना पड़ रहा है.

13 अप्रैल को प्रशासन को सौंपा था ज्ञापन

मनरेगा कर्मचारियों ने बताया कि अपनी मांगों को लेकर उन्होंने 13 अप्रैल 2026 को प्रशासन को ज्ञापन सौंपा था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई. इससे कर्मचारियों में आक्रोश और बढ़ गया है. उनका कहना है कि एक ओर उन्हें मानदेय नहीं मिल रहा, वहीं दूसरी ओर इसी योजना में कार्यरत ग्राम रोजगार सहायकों को अन्य मद से भुगतान किया जा रहा है, जिससे असमानता की भावना पैदा हो रही है.

कर्मचारियों ने पूर्व में जारी पारिश्रमिक कटौती संबंधी आदेशों को निरस्त करने की भी मांग की है. उनका कहना है कि जब पहले से ही वेतन लंबित है, तब कटौती के आदेश उनकी आर्थिक परेशानियों को और बढ़ा रहे हैं.

कर्मचारियों ने दी ये चेतावनी

संविदा कर्मचारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही लंबित मानदेय का भुगतान नहीं किया गया, तो वे अपने दायित्वों का निर्वहन करने में असमर्थ होंगे. ऐसी स्थिति में मनरेगा कार्यों के प्रभावित होने की पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी.

4 से 8 मई तक प्रस्तावित इस सामूहिक अवकाश और असहयोग आंदोलन से जिले में मनरेगा के विकास कार्यों की रफ्तार थम सकती है. अब सभी की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं.

Disclaimer: The article is a part of syndicated feed. Except for the headline, the content is not edited. Liability lies with the syndication partner for factual accuracy.

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MP News: डिंडौरी जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) से जुड़े संविदा कर्मचारियों का धैर्य अब जवाब देने लगा है. पिछले पांच महीनों से मानदेय नहीं मिलने से नाराज कर्मचारियों ने 4 मई से 8 मई 2026 तक पांच दिवसीय सामूहिक अवकाश पर जाने का ऐलान किया है. इस निर्णय से जिले में मनरेगा कार्यों पर व्यापक असर पड़ने की आशंका है.

कर्मचारियों का कहना है कि वे शासन के निर्देशानुसार पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं, लेकिन लगातार पांच माह से वेतन नहीं मिलने के कारण उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है. बच्चों की स्कूल फीस, बैंक ऋण की किस्तें, मकान किराया, बिजली बिल और अन्य आवश्यक खर्चों का वहन करना मुश्किल हो गया है. कई कर्मचारियों को मकान मालिकों के दबाव का भी सामना करना पड़ रहा है.

13 अप्रैल को प्रशासन को सौंपा था ज्ञापन

मनरेगा कर्मचारियों ने बताया कि अपनी मांगों को लेकर उन्होंने 13 अप्रैल 2026 को प्रशासन को ज्ञापन सौंपा था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई. इससे कर्मचारियों में आक्रोश और बढ़ गया है. उनका कहना है कि एक ओर उन्हें मानदेय नहीं मिल रहा, वहीं दूसरी ओर इसी योजना में कार्यरत ग्राम रोजगार सहायकों को अन्य मद से भुगतान किया जा रहा है, जिससे असमानता की भावना पैदा हो रही है.

कर्मचारियों ने पूर्व में जारी पारिश्रमिक कटौती संबंधी आदेशों को निरस्त करने की भी मांग की है. उनका कहना है कि जब पहले से ही वेतन लंबित है, तब कटौती के आदेश उनकी आर्थिक परेशानियों को और बढ़ा रहे हैं.

कर्मचारियों ने दी ये चेतावनी

संविदा कर्मचारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही लंबित मानदेय का भुगतान नहीं किया गया, तो वे अपने दायित्वों का निर्वहन करने में असमर्थ होंगे. ऐसी स्थिति में मनरेगा कार्यों के प्रभावित होने की पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी.

4 से 8 मई तक प्रस्तावित इस सामूहिक अवकाश और असहयोग आंदोलन से जिले में मनरेगा के विकास कार्यों की रफ्तार थम सकती है. अब सभी की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं.

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