Political Kissa: आजादी से पहले लखनऊ में साल 1920 में नगर पालिका का चुनाव हुआ था. जहां देश की मशहूर तवायफ दिलरुबा जान चुनाव मैदान में थीं. उसके सामने हकीम शमसुद्दीन साहब थे. शहर में तवायफ दिलरुबा जान की लोकप्रियता काफी अधिक थीं. जिसकी वजह से हकीम साहब ने अपने एक दोस्त से कहा- मियां, ये हमें कहां फंसा दिया?
1920 के लखनऊ नगर निगम चुनाव में तवायफ दिलरुबा जान और हकीम शमसुद्दीन का हुआ था मुकाबला
Tawaif Dulruba Jaan: देश के 5 राज्यों में चुनावी माहौल चल रहा है. तीन राज्यों में वोट डाले जा चुके हैं. जबकि 2 राज्यों में कल यानी 23 अप्रैल, 2026 को वोट डाले जाएंगे. ऐसे में आज हम आपको राजनीतिक किस्से में एक ऐसी कहानी के बारे में बताएंगे. जहां एक तवायफ के सामने हकीम साहब चुनाव लड़ रहे थे. पूरी कहानी क्या है? आइए जानते हैं.
दरअसल, ये राजनीतिक किस्सा आजादी से पहले का है. जहां 1920 में लखनऊ में नगर पालिका का चुनाव होने वाला था. तभी शहर की मशहूर तवायफ दिलरुबा जान ने चुनाव लड़ने का एलान कर दिया.
चुनाव में दिलरुबा का नाम सुनते ही सभी से चुनाव लड़ने से इन्कार कर दिया. जानकारी सामने आ रही है कि शहर के अधिकतर लोग दिलरुबा जान के दिवाने थे. जिसकी वजह से कोई भी उसके सामने चुनाव लड़ने को तैयार नहीं था. तो वहीं दूसरी तरफ शहऱ के कई लोग इस वजह से भी हैरान थे कि कोठे पर महफिल जमाने वाली एक तवायफ चुनाव कैसे लड़ सकती है?
काफी कोशिशों के बाद कुछ लोगों ने अकबरी गेट के पास रहने वाले हकीम शमसुद्दीन को दिलरुबा जान के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए तैयार किया. लेकिन सबसे बड़ी बात थी कि हकीम साहब को बहुत कम लोग जानते थे. दूसरी तरफ दिलरुबा जान के दीवाने शहर के गली-गली में मौजूद थे. जब हकीम साहब को दिलरुबा जान की शोहरत का पता चला तो वो उन्होंने एक बार अपने दोस्त से कहा कि मियां ये हमें कहां फंसा दिया?
हकीम शमसुद्दीन साहब की हताशा को देखकर दोस्तों को एक तरकीब सूझी. उन्होंने एक ऐसा नारा तैयार किया जो लखनऊ की हर गलियों में गूंजने लगा. जिसे गलियों की अलग-अलग दीवारों पर लिख दिया गया. दरअसल, वो नारा था ‘’है हिदायत लखनऊ के तमाम वोटर-ए-शौकीन को, दिल दीजिए दिलरुबा को, वोट शमसुद्दीन को’. जैसे ही दिलरुबा जान तक ये खबर पहुंची तो उसने भी इसी अंदाज में इसका जवाब देने का निर्णय लिया. इसके बाद उन्होंने नारा दिया, ‘’है हिदायत लखनऊ के तमाम वोटर-ए-शौकीन को, वोट देना दिलरुबा को, नब्ज शमसुद्दीन को.’ ये मीठी नोंक-झोंक वाला चुनाव उस समय खूब चर्चा बटोर रहा था.
चुनाव के दिन लोगों ने मतदान किया. दोनों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल रही थी. जब चुनाव के नतीजे सामने आए तो पूरा शहर चौंक गया. हकीम शमसुद्दीन बेहद मामूली अंतर से चुनाव जीत गए. जब दिलरुबा जान को पता चला कि वे चुनाव हार गईं तो उन्होंने निराश होते हुए बस इतना कहा, ‘चौक में आशिक कम और मरीज ज्यादा हैं.’
रिलायंस जियो ने लॉन्च किए नए JioHome Packs. सिर्फ 400 रुपये में मिलेंगे 1000+ टीवी…
Pm Modi: इस हाई-प्रोफाइल मीटिंग में स्नैपचैट, गूगल, X (पहले ट्विटर), मेटा (फेसबुक, वॉट्सऐप, इंस्टाग्राम)…
राजस्थान की 19 साल की हर्षिता जाखड़ ने रचा इतिहास. Tour de France Femmes का…
UPSSSC PET 2026 Online Form Started: उत्तर प्रदेश सरकार की ग्रुप B और ग्रुप C…
PM Modi Video Removed: दिल्ली में सोमवार को इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) पर पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमिटी…
Funny Jokes In Hindi: हंसी-मजाक करने से जीवन में सकारात्मक माहौल पैदा होता है. ये…