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‘सर मैं मर गया हूं…’, दस्तावेजों में मौत, हकीकत में जिंदा! DM ऑफिस के बाहर कफन ओढ़कर लेटा बुजुर्ग

Basti News: बस्ती के कलक्ट्रेट परिसर में शुक्रवार को उस वक्त हड़कंप मच गया जब एक जिंदा बुजुर्ग शख्स कफन ओढ़कर जिलाधिकारी कार्यालय के चैंबर के सामने लेट गया. यह नजारा देखते ही कलक्ट्रेट परिसर में हर कोई हैरान रह गया. दरअसल, यह बुजुर्ग पिछले 14 साल से अपने जिंदा होने का सबूत दे रहा है. लेकिन राजस्व विभाग की फाइलों में वह आज भी मृत है. ऐसे में चलिए विस्तार से जानें की पूरी कहानी क्या है.

Written By:
Edited By: Hasnain Alam
Last Updated: 2026-04-17 22:14:27

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Basti DM Office Protest: उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के कलक्ट्रेट परिसर में शुक्रवार को उस वक्त हड़कंप मच गया जब एक जिंदा बुजुर्ग शख्स कफन ओढ़कर जिलाधिकारी कार्यालय के चैंबर के सामने लेट गया. यह नजारा देखते ही कलक्ट्रेट परिसर में हर कोई हैरान रह गया.
 
अधिकारी आनन-फानन में बुजुर्ग के पास पहुंचे तो बुजुर्ग ने रुआंसी आवाज में कहा कि सर, मैं मर गया हूं, कृपया मुझे जिंदा कर दीजिए. दरअसल, यह बुजुर्ग पिछले 14 साल से अपने जिंदा होने का सबूत दे रहा है. लेकिन राजस्व विभाग की फाइलों में वह आज भी मृत है. ऐसे में चलिए विस्तार से जानें की पूरी कहानी क्या है.
 

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के मुताबिक, पूरा मामला बस्ती जिले के लालगंज थाना क्षेत्र के बानपुर गांव का है. यहां रहने वाले इशाक अली सरकारी सिस्टम की चौखट पर सिर रगड़ते-रगड़ते थक चुके हैं. पीड़ित का आरोप है कि राजस्व विभाग के अधिकारियों ने 14 साल पहले उसे मृत घोषित कर दिया था. इस कागजी देरी का नुकसान यह हुआ कि उनकी 0.770 हेक्टेयर पुश्तैनी जमीन किसी और के नाम दर्ज हो गई. यह मामला तब और पेचीदा हो गया जब इशाक अली के सर्विस रिकॉर्ड पर नजर डाली गई. 
 

वेतन और पेंशन अभी भी फाइलों में बंद है

इशहाक अली संतकबीरनगर के नाथनगर सीएचसी में सफाईकर्मी के पद पर तैनात थे. 31 दिसंबर 2019 को उनकी सेवा अवधि पूरी हो गई और विभाग ने उन्हें सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्त कर दिया. लेकिन राजस्व विभाग के दस्तावेजों के मुताबिक उनकी मृत्यु 2 दिसंबर 2012 को हो चुकी थी. आरोप है कि तत्कालीन राजस्व निरीक्षक ललित कुमार मिश्रा ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए उन्हें मृत दिखाकर उनकी जमीन गांव की एक महिला के नाम कर दी.
 
हैरानी की बात ये है कि 2012 से 2019 के बीच जब राजस्व विभाग के मुताबिक इशाक अली की मौत हो गई, तब भी स्वास्थ्य विभाग उन्हें हर महीने नियमित वेतन दे रहा था. अब सरकार उन्हें रिटायरमेंट के बाद पेंशन भी दे रही है. पीड़ित ने अधिकारियों से गुहार लगाते हुए कहा, ‘सरकार मुझे पेंशन दे रही है ताकि मैं अपना पेट भर सकूं, बैंक मुझे पैसे दे रहा है क्योंकि मैं जिंदा हूं. लेकिन आपकी फ़ाइलें मुझे बताती हैं कि मैं मर चुका हूं.
 

हाईवोल्टेज ड्रामे के बाद अधिकारियों ने आश्वासन दिया

इस हाईवोल्टेज ड्रामे के बाद मौके पर पहुंचे उपजिलाधिकारी सदर शत्रुघ्न पाठक ने मामले को बेहद गंभीर बताया. उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति जीवित होने का दावा कर रहा है और उसके दस्तावेज इसकी पुष्टि करते हैं. मामले की गहनता से जांच कराई जाएगी और जिस भी कर्मचारी ने फर्जी तरीके से बुजुर्ग को मृत घोषित कर जमीन अपने नाम कराई है, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. प्रशासन ने कागजी तौर पर बुजुर्ग को जिंदा करने और जल्द से जल्द न्याय दिलाने का आश्वासन दिया है.

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Last Updated: 2026-04-17 22:14:27

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Basti DM Office Protest: उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के कलक्ट्रेट परिसर में शुक्रवार को उस वक्त हड़कंप मच गया जब एक जिंदा बुजुर्ग शख्स कफन ओढ़कर जिलाधिकारी कार्यालय के चैंबर के सामने लेट गया. यह नजारा देखते ही कलक्ट्रेट परिसर में हर कोई हैरान रह गया.
 
अधिकारी आनन-फानन में बुजुर्ग के पास पहुंचे तो बुजुर्ग ने रुआंसी आवाज में कहा कि सर, मैं मर गया हूं, कृपया मुझे जिंदा कर दीजिए. दरअसल, यह बुजुर्ग पिछले 14 साल से अपने जिंदा होने का सबूत दे रहा है. लेकिन राजस्व विभाग की फाइलों में वह आज भी मृत है. ऐसे में चलिए विस्तार से जानें की पूरी कहानी क्या है.
 

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के मुताबिक, पूरा मामला बस्ती जिले के लालगंज थाना क्षेत्र के बानपुर गांव का है. यहां रहने वाले इशाक अली सरकारी सिस्टम की चौखट पर सिर रगड़ते-रगड़ते थक चुके हैं. पीड़ित का आरोप है कि राजस्व विभाग के अधिकारियों ने 14 साल पहले उसे मृत घोषित कर दिया था. इस कागजी देरी का नुकसान यह हुआ कि उनकी 0.770 हेक्टेयर पुश्तैनी जमीन किसी और के नाम दर्ज हो गई. यह मामला तब और पेचीदा हो गया जब इशाक अली के सर्विस रिकॉर्ड पर नजर डाली गई. 
 

वेतन और पेंशन अभी भी फाइलों में बंद है

इशहाक अली संतकबीरनगर के नाथनगर सीएचसी में सफाईकर्मी के पद पर तैनात थे. 31 दिसंबर 2019 को उनकी सेवा अवधि पूरी हो गई और विभाग ने उन्हें सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्त कर दिया. लेकिन राजस्व विभाग के दस्तावेजों के मुताबिक उनकी मृत्यु 2 दिसंबर 2012 को हो चुकी थी. आरोप है कि तत्कालीन राजस्व निरीक्षक ललित कुमार मिश्रा ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए उन्हें मृत दिखाकर उनकी जमीन गांव की एक महिला के नाम कर दी.
 
हैरानी की बात ये है कि 2012 से 2019 के बीच जब राजस्व विभाग के मुताबिक इशाक अली की मौत हो गई, तब भी स्वास्थ्य विभाग उन्हें हर महीने नियमित वेतन दे रहा था. अब सरकार उन्हें रिटायरमेंट के बाद पेंशन भी दे रही है. पीड़ित ने अधिकारियों से गुहार लगाते हुए कहा, ‘सरकार मुझे पेंशन दे रही है ताकि मैं अपना पेट भर सकूं, बैंक मुझे पैसे दे रहा है क्योंकि मैं जिंदा हूं. लेकिन आपकी फ़ाइलें मुझे बताती हैं कि मैं मर चुका हूं.
 

हाईवोल्टेज ड्रामे के बाद अधिकारियों ने आश्वासन दिया

इस हाईवोल्टेज ड्रामे के बाद मौके पर पहुंचे उपजिलाधिकारी सदर शत्रुघ्न पाठक ने मामले को बेहद गंभीर बताया. उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति जीवित होने का दावा कर रहा है और उसके दस्तावेज इसकी पुष्टि करते हैं. मामले की गहनता से जांच कराई जाएगी और जिस भी कर्मचारी ने फर्जी तरीके से बुजुर्ग को मृत घोषित कर जमीन अपने नाम कराई है, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. प्रशासन ने कागजी तौर पर बुजुर्ग को जिंदा करने और जल्द से जल्द न्याय दिलाने का आश्वासन दिया है.

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