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Ganga Expressway: 31 गांवों से होकर गुजर रहा गंगा एक्सप्रेसवे, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से चमकेगा संभल, किसानों से लेकर युवाओं तक सबको फायदा

Ganga Expressway News in Hindi: गंगा एक्सप्रेसवे का औद्योगिक गलियारा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) से उद्योगों के विकेंद्रीकरण में अहम भूमिका निभाएगा. पूर्वांचल, पश्चिम और बुंदेलखंड को एक सूत्र में पिरोने वाले इस एक्सप्रेसवे के जरिए माल ढुलाई (लॉजिस्टिक्स) बेहद तेज और सस्ती हो जाएगी.

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Last Updated: May 1, 2026 21:07:47 IST

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Ganga Expressway News: उत्तर प्रदेश की महत्वाकांक्षी गंगा एक्सप्रेसवे परियोजना संभल जिले के लिए आर्थिक विकास और औद्योगिक क्रांति के नए द्वार खोलने जा रही है. जिले में एक्सप्रेस-वे का 38.65 किलोमीटर का हिस्सा 100 प्रतिशत बनकर तैयार हो चुका है. अब इस एक्सप्रेसवे के किनारे एक विशाल औद्योगिक गलियारा (इंडस्ट्रियल कॉरिडोर) विकसित करने की कवायद तेज हो गई है.

इसके लिए 4 गांवों के 1047 किसानों की 239.1004 हेक्टेयर जमीन को चिह्नित कर लगभग 387 करोड़ रुपये (3,87,23,27,562 रुपये) के मुआवजे का आंकलन किया गया है, जिसमें से 95 प्रतिशत भूमि की खरीद पूरी हो चुकी है.

भविष्य की संभावनाओं और बड़े निवेश को देखते हुए प्रशासन ने अब 5 अन्य गांवों में 306.1572 हेक्टेयर अतिरिक्त जमीन के अधिग्रहण का प्रस्ताव तैयार किया है. इस गलियारे के बनने से न सिर्फ एनसीआर के उद्योगों का विकेंद्रीकरण होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर लाखों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे.

उद्योगों का होगा विकेंद्रीकरण, एनसीआर से घटेगा बोझ

गंगा एक्सप्रेसवे का औद्योगिक गलियारा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) से उद्योगों के विकेंद्रीकरण में अहम भूमिका निभाएगा. पूर्वांचल, पश्चिम और बुंदेलखंड को एक सूत्र में पिरोने वाले इस एक्सप्रेसवे के जरिए माल ढुलाई (लॉजिस्टिक्स) बेहद तेज और सस्ती हो जाएगी. इससे वाहन संचालन लागत और ईंधन की भारी बचत होगी.

बेहतर कनेक्टिविटी के कारण संभल से बंदरगाहों, एयरपोर्ट और बड़े बाजारों तक पहुंच आसान हो जाएगी, जिससे देश-विदेश के लाखों-करोड़ों रुपये के निवेश आकर्षित होंगे. यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए एक्सप्रेसवे को ‘जीरो  एक्सीडेंट डिजाइन’ पर तैयार किया गया है, जिसमें क्रैश बैरियर और सीमित एंट्री-एग्जिट पॉइंट दिए गए हैं.

किसानों को मिला 387 करोड़, अब 306 हेक्टेयर का नया अधिग्रहण

औद्योगिक गलियारे के लिए तहसील संभल के 4 गांवों (खिरनी मोहिउद्दीनपुर, बसला, सारंगपुर व अलावती कुतुबपुर) में 239.1004 हेक्टेयर जमीन चिह्नित की गई थी. इसके एवज में 1047 किसानों को 387 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि का वितरण किया जा रहा है.

औद्योगिक इकाइयों की बढ़ती मांग को देखते हुए अब ग्राम सारंगपुर, अलावती कुतुबपुर, खरसपा, भमौरी पट्टी और सौधन मोहम्मदपुर में कुल 306.1572 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि का अधिग्रहण प्रस्तावित है. जिले में एक्सप्रेसवे कुल 31 गांवों (संभल तहसील के 17 और चंदौसी के 14) को प्रभावित कर रहा है. लोगों की सुविधा के लिए इसमें दो इंटरचेंज (लहरावन और खिरनी मोहिउद्दीनपुर) भी बनाए गए हैं.

मेंथा और कृषि उत्पादों को मिलेगी ग्लोबल मार्केट

संभल जिला मेंथा (पिपरमिंट), आलू, स्ट्रॉबेरी और मोती उत्पादन के लिए जाना जाता है. इसके अलावा यहां से मीट और बोन उत्पादों का भारी मात्रा में अन्य देशों को निर्यात होता है. औद्योगिक गलियारा बनने से यहां खाद्य प्रसंस्करण (फूड प्रोसेसिंग) से जुड़ी अनेक इकाइयां स्थापित हो सकेंगी.

वेयर हाउसिंग और कोल्ड चेन उद्योग की प्रबल संभावनाएं हैं, जिससे किसानों के फल, सब्जी और अनाज की सीधे बड़े बाजारों तक पहुंच सुनिश्चित होगी. मुख्यालय से मात्र 6 किलोमीटर दूर होने के कारण निर्यातकों और निवेशकों की समस्याओं का तत्काल निस्तारण भी संभव हो सकेगा.

रियल एस्टेट, पर्यटन और रोजगार में आएगा उछाल

औद्योगिक इकाइयों, लॉजिस्टिक हब और सर्विस सेंटर्स की स्थापना से जिले में क्षेत्रीय विकास तेजी से होगा. इसके साथ ही रियल एस्टेट और प्रॉपर्टी की कीमतों में भारी उछाल आने की उम्मीद है. यह एक्सप्रेसवे संभल को तीर्थाटन और पर्यटन के नए आयामों से भी जोड़ेगा.

बाहरी लोगों और व्यापारियों की आवाजाही बढ़ने से होटल उद्योग और स्थानीय व्यापार फलेगा-फूलेगा, जिससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बड़े पैमाने पर रोजगार का सृजन होगा और जिले की आर्थिक स्थिति बेहद मजबूत होगी.

Disclaimer: The article is a part of syndicated feed. Except for the headline, the content is not edited. Liability lies with the syndication partner for factual accuracy.

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Last Updated: May 1, 2026 21:07:47 IST

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Ganga Expressway News: उत्तर प्रदेश की महत्वाकांक्षी गंगा एक्सप्रेसवे परियोजना संभल जिले के लिए आर्थिक विकास और औद्योगिक क्रांति के नए द्वार खोलने जा रही है. जिले में एक्सप्रेस-वे का 38.65 किलोमीटर का हिस्सा 100 प्रतिशत बनकर तैयार हो चुका है. अब इस एक्सप्रेसवे के किनारे एक विशाल औद्योगिक गलियारा (इंडस्ट्रियल कॉरिडोर) विकसित करने की कवायद तेज हो गई है.

इसके लिए 4 गांवों के 1047 किसानों की 239.1004 हेक्टेयर जमीन को चिह्नित कर लगभग 387 करोड़ रुपये (3,87,23,27,562 रुपये) के मुआवजे का आंकलन किया गया है, जिसमें से 95 प्रतिशत भूमि की खरीद पूरी हो चुकी है.

भविष्य की संभावनाओं और बड़े निवेश को देखते हुए प्रशासन ने अब 5 अन्य गांवों में 306.1572 हेक्टेयर अतिरिक्त जमीन के अधिग्रहण का प्रस्ताव तैयार किया है. इस गलियारे के बनने से न सिर्फ एनसीआर के उद्योगों का विकेंद्रीकरण होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर लाखों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे.

उद्योगों का होगा विकेंद्रीकरण, एनसीआर से घटेगा बोझ

गंगा एक्सप्रेसवे का औद्योगिक गलियारा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) से उद्योगों के विकेंद्रीकरण में अहम भूमिका निभाएगा. पूर्वांचल, पश्चिम और बुंदेलखंड को एक सूत्र में पिरोने वाले इस एक्सप्रेसवे के जरिए माल ढुलाई (लॉजिस्टिक्स) बेहद तेज और सस्ती हो जाएगी. इससे वाहन संचालन लागत और ईंधन की भारी बचत होगी.

बेहतर कनेक्टिविटी के कारण संभल से बंदरगाहों, एयरपोर्ट और बड़े बाजारों तक पहुंच आसान हो जाएगी, जिससे देश-विदेश के लाखों-करोड़ों रुपये के निवेश आकर्षित होंगे. यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए एक्सप्रेसवे को ‘जीरो  एक्सीडेंट डिजाइन’ पर तैयार किया गया है, जिसमें क्रैश बैरियर और सीमित एंट्री-एग्जिट पॉइंट दिए गए हैं.

किसानों को मिला 387 करोड़, अब 306 हेक्टेयर का नया अधिग्रहण

औद्योगिक गलियारे के लिए तहसील संभल के 4 गांवों (खिरनी मोहिउद्दीनपुर, बसला, सारंगपुर व अलावती कुतुबपुर) में 239.1004 हेक्टेयर जमीन चिह्नित की गई थी. इसके एवज में 1047 किसानों को 387 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि का वितरण किया जा रहा है.

औद्योगिक इकाइयों की बढ़ती मांग को देखते हुए अब ग्राम सारंगपुर, अलावती कुतुबपुर, खरसपा, भमौरी पट्टी और सौधन मोहम्मदपुर में कुल 306.1572 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि का अधिग्रहण प्रस्तावित है. जिले में एक्सप्रेसवे कुल 31 गांवों (संभल तहसील के 17 और चंदौसी के 14) को प्रभावित कर रहा है. लोगों की सुविधा के लिए इसमें दो इंटरचेंज (लहरावन और खिरनी मोहिउद्दीनपुर) भी बनाए गए हैं.

मेंथा और कृषि उत्पादों को मिलेगी ग्लोबल मार्केट

संभल जिला मेंथा (पिपरमिंट), आलू, स्ट्रॉबेरी और मोती उत्पादन के लिए जाना जाता है. इसके अलावा यहां से मीट और बोन उत्पादों का भारी मात्रा में अन्य देशों को निर्यात होता है. औद्योगिक गलियारा बनने से यहां खाद्य प्रसंस्करण (फूड प्रोसेसिंग) से जुड़ी अनेक इकाइयां स्थापित हो सकेंगी.

वेयर हाउसिंग और कोल्ड चेन उद्योग की प्रबल संभावनाएं हैं, जिससे किसानों के फल, सब्जी और अनाज की सीधे बड़े बाजारों तक पहुंच सुनिश्चित होगी. मुख्यालय से मात्र 6 किलोमीटर दूर होने के कारण निर्यातकों और निवेशकों की समस्याओं का तत्काल निस्तारण भी संभव हो सकेगा.

रियल एस्टेट, पर्यटन और रोजगार में आएगा उछाल

औद्योगिक इकाइयों, लॉजिस्टिक हब और सर्विस सेंटर्स की स्थापना से जिले में क्षेत्रीय विकास तेजी से होगा. इसके साथ ही रियल एस्टेट और प्रॉपर्टी की कीमतों में भारी उछाल आने की उम्मीद है. यह एक्सप्रेसवे संभल को तीर्थाटन और पर्यटन के नए आयामों से भी जोड़ेगा.

बाहरी लोगों और व्यापारियों की आवाजाही बढ़ने से होटल उद्योग और स्थानीय व्यापार फलेगा-फूलेगा, जिससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बड़े पैमाने पर रोजगार का सृजन होगा और जिले की आर्थिक स्थिति बेहद मजबूत होगी.

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