First Muslim Soldier From Village Indian Army: यह संघर्ष केवल एक नौकरी पाने का नहीं, बल्कि अपनी भारतीय पहचान को सिद्ध करने का है, समाज में फैली इस गलतफहमी को इस जवान ने जड़ से खत्म कर दिया कि भारतीय सेना किसी खास समुदाय के लिए नहीं है, भारतीय सेना समावेशिता और राष्ट्रीय एकता का सबसे बड़ा प्रतीक है, गांव के स्तर पर 'पाकिस्तानी' जैसे शब्द सुनना मानसिक रूप से बेहद पीड़ादायक होता है, लेकिन इस युवक ने उस नकारात्मकता को सकारात्मक में बदल दिया जब एक व्यक्ति तमाम सामाजिक विरोधों के बावजूद देश की सुरक्षा की शपथ लेता है, तो वह राष्ट्रवाद की सबसे शुद्ध परिभाषा होती है, इस जवान की सफलता अब उस गाँव के अन्य युवाओं के लिए भी सेना में जाने के रास्ते खोलेगी और पुरानी रूढ़ियों को खत्म करेगी.