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HomeVideosअपनी ही ‘नौकरी’ का कत्ल कर रहे हैं मजदूर, माथे पर लगे कैमरों से AI को सिखा रहे हैं अपना हुनर, देखें तकनीक!

अपनी ही ‘नौकरी’ का कत्ल कर रहे हैं मजदूर, माथे पर लगे कैमरों से AI को सिखा रहे हैं अपना हुनर, देखें तकनीक!

Written By: Aksha Choudhary
Last Updated: 2026-04-14 17:11:58

औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों की निगरानी के लिए इस्तेमाल किए जा रहे वियरेबल कैमरे (Wearable Cameras) अब एक नए विवाद का केंद्र हैं, विशेषज्ञों का दावा है कि ये कैमरे केवल सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि AI (Artificial Intelligence) और रोबोटिक्स को प्रशिक्षित करने के लिए मजदूरों के सूक्ष्म कौशल, हाथ की गति और काम करने के सटीक तरीकों को रिकॉर्ड कर रहे हैं, जिस दिन यह डेटा पर्याप्त हो जाएगा कंपनियां इन मजदूरों की जगह सस्ते और बिना छुट्टी मांगने वाले रोबोट्स को तैनात कर देंगी, सबसे दुखद यह है कि मजदूरों को इस 'डिजिटल विस्थापन' का अंदाजा तक नहीं है.


AI Training Using Labour Data: यह मुद्दा तकनीक, नैतिकता और मानवाधिकारों के चौराहे पर खड़ा है एक मजदूर वर्षों के अनुभव से जो हुनर सीखता है, तकनीक उसे कुछ ही महीनों में डेटा के रूप में चुराकर मशीनों में डाल रही है, बिना कर्मचारी की सहमति या उन्हें भविष्य के खतरे के बारे में बताए उनके डेटा का उपयोग करना ‘डेटा प्राइवेसी’ और ‘श्रम अधिकारों’ का उल्लंघन है, पारंपरिक ट्रेड यूनियनें अब भी पुराने मुद्दों में उलझी हैं, जबकि ‘डिजिटल विस्थापन’ का खतरा दरवाजे पर दस्तक दे रहा है, सरकार के पास भी AI से पैदा होने वाली बेरोजगारी से निपटने के लिए कोई ठोस रोडमैप नहीं है, कम वेतन और बेरोजगारी के डर से मजदूर मालिकों के हर उस आदेश को मानने को मजबूर हैं जो उनके ही अस्तित्व को खत्म कर देगा.

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Written By: Aksha Choudhary
Last Updated: 2026-04-14 17:11:58


AI Training Using Labour Data: यह मुद्दा तकनीक, नैतिकता और मानवाधिकारों के चौराहे पर खड़ा है एक मजदूर वर्षों के अनुभव से जो हुनर सीखता है, तकनीक उसे कुछ ही महीनों में डेटा के रूप में चुराकर मशीनों में डाल रही है, बिना कर्मचारी की सहमति या उन्हें भविष्य के खतरे के बारे में बताए उनके डेटा का उपयोग करना ‘डेटा प्राइवेसी’ और ‘श्रम अधिकारों’ का उल्लंघन है, पारंपरिक ट्रेड यूनियनें अब भी पुराने मुद्दों में उलझी हैं, जबकि ‘डिजिटल विस्थापन’ का खतरा दरवाजे पर दस्तक दे रहा है, सरकार के पास भी AI से पैदा होने वाली बेरोजगारी से निपटने के लिए कोई ठोस रोडमैप नहीं है, कम वेतन और बेरोजगारी के डर से मजदूर मालिकों के हर उस आदेश को मानने को मजबूर हैं जो उनके ही अस्तित्व को खत्म कर देगा.

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