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HomeVideosराशन नहीं, ‘शिक्षा’ बांटने पहुंची लखनऊ की बेटी, झुग्गी-झोपड़ियों में बच्चों का नाम-पता लिख रही लड़की ने जीता सबका दिल, देखें वीडियो!

राशन नहीं, ‘शिक्षा’ बांटने पहुंची लखनऊ की बेटी, झुग्गी-झोपड़ियों में बच्चों का नाम-पता लिख रही लड़की ने जीता सबका दिल, देखें वीडियो!

Written By: Aksha Choudhary
Last Updated: 2026-04-20 12:05:21

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के विकास नगर क्षेत्र में स्थित झुग्गी-झोपड़ियों में इन दिनों कई लोग मदद के लिए पहुंच रहे हैं, लेकिन हाल ही में वहां पहुंची एक युवती ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया, वह लड़की किसी राशन के पैकेट के साथ नहीं, बल्कि एक डायरी और पेन लेकर आई थी वह घर-घर जाकर बच्चों के नाम, उनकी कक्षा और उनके स्कूल की जानकारी जुटाने लगी जब स्थानीय लोगों ने उत्सुकता वश पूछा कि वह यह क्यों कर रही है, तो उसने मुस्कुराते हुए कहा कि वह चाहती है कि ये बच्चे गरीबी के कारण अपनी पढ़ाई ना छोड़ें, वह इन बच्चों के लिए किताबें, स्कूल ड्रेस और बैग की व्यवस्था करने की योजना बना रही है ताकि इनका भविष्य अंधकार में ना जाए.


Lucknow Girl Helps Slum Children Education: यह कहानी हमें सिखाती है कि दान केवल भौतिक वस्तुओं का नहीं, बल्कि अवसरों का भी होना चाहिए भोजन और कपड़ा तत्काल राहत देते हैं, लेकिन शिक्षा एक पूरे परिवार को गरीबी के चक्र से बाहर निकाल सकती है, युवती की यह सोच ‘सतत विकास’ (Sustainable Development) का बेहतरीन उदाहरण है, लड़की ने पाया कि कई बच्चे स्कूल तो जाना चाहते हैं, लेकिन कॉपी-किताबों के पैसे ना होने के कारण वे हतोत्साहित हो जाते हैं, युवती की इस पहल को देखकर अब इलाके के अन्य लोग भी उसके साथ जुड़ रहे हैं, लोग उसे ‘शिक्षा की परी’ कह रहे हैं यह घटना समाज के लिए एक बड़ा संदेश है कि हमें केवल आज की ज़रूरतें ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के सपनों का भी ख्याल रखना चाहिए.

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Written By: Aksha Choudhary
Last Updated: 2026-04-20 12:05:21


Lucknow Girl Helps Slum Children Education: यह कहानी हमें सिखाती है कि दान केवल भौतिक वस्तुओं का नहीं, बल्कि अवसरों का भी होना चाहिए भोजन और कपड़ा तत्काल राहत देते हैं, लेकिन शिक्षा एक पूरे परिवार को गरीबी के चक्र से बाहर निकाल सकती है, युवती की यह सोच ‘सतत विकास’ (Sustainable Development) का बेहतरीन उदाहरण है, लड़की ने पाया कि कई बच्चे स्कूल तो जाना चाहते हैं, लेकिन कॉपी-किताबों के पैसे ना होने के कारण वे हतोत्साहित हो जाते हैं, युवती की इस पहल को देखकर अब इलाके के अन्य लोग भी उसके साथ जुड़ रहे हैं, लोग उसे ‘शिक्षा की परी’ कह रहे हैं यह घटना समाज के लिए एक बड़ा संदेश है कि हमें केवल आज की ज़रूरतें ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के सपनों का भी ख्याल रखना चाहिए.

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