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HomeVideos1971 वॉर वेटरन की बेटी के साथ ऐसा सुलूक? बंगाल की चुनावी लिस्ट में गड़बड़ी, नंदिता रॉय बोलीं, किसी के बाप का हिंदुस्तान नहीं है!

1971 वॉर वेटरन की बेटी के साथ ऐसा सुलूक? बंगाल की चुनावी लिस्ट में गड़बड़ी, नंदिता रॉय बोलीं, किसी के बाप का हिंदुस्तान नहीं है!

Written By: Aksha Choudhary
Last Updated: 2026-04-15 00:09:21

पश्चिम बंगाल की रहने वाली नंदिता रॉय, जो एक पीएचडी (PhD) होल्डर हैं और जिनके पिता 1971 के युद्ध में देश के लिए लड़े थे, ने आरोप लगाया है कि राज्य के चुनाव अधिकारियों ने उनका नाम मतदाता सूची (Voter List) से हटा दिया है, चौंकाने वाली बात यह है कि बीएलओ (BLO) ने उन्हें "Untraceable" (लापता) के रूप में चिह्नित किया रॉय के अनुसार, अधिकारी ने उनके घर आने के बजाय केवल फोन पर संपर्क करने की कोशिश की और फोन ना मिलने पर उनका नाम काट दिया, इस घटना से आहत नंदिता रॉय ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि वह इस अन्याय के खिलाफ कानूनी रास्ता अपनाएंगी.


Nandita Roy Bengal Voter List Name Deleted: यह मामला लोकतंत्र में व्यक्तिगत पहचान और प्रशासनिक जवाबदेही के संकट को दर्शाता है, चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार किसी का नाम हटाने से पहले ‘फिजिकल वेरिफिकेशन’ मौके पर जांच अनिवार्य है, केवल फोन कॉल ना उठाना नाम काटने का आधार नहीं हो सकता, एक प्रतिष्ठित और देशभक्त पृष्ठभूमि से आने वाली महिला के लिए यह केवल प्रशासनिक गलती नहीं, बल्कि उनके नागरिक होने के अस्तित्व पर प्रहार है, उनका बयान, किसी के बाप का हिंदुस्तान नहीं है, उनके गहरे गुस्से को दर्शाता है नंदिता रॉय ने स्पष्ट किया है कि वे इस मामले को अदालत में ले जाएंगी ताकि भविष्य में किसी अन्य नागरिक के साथ ऐसी लापरवाही ना हो, यह घटना उन हजारों लोगों की चिंताओं को स्वर देती है जिनके नाम अक्सर बिना किसी ठोस सूचना के मतदाता सूची से हटा दिए जाते हैं, खासकर चुनावों के करीब.

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Written By: Aksha Choudhary
Last Updated: 2026-04-15 00:09:21


Nandita Roy Bengal Voter List Name Deleted: यह मामला लोकतंत्र में व्यक्तिगत पहचान और प्रशासनिक जवाबदेही के संकट को दर्शाता है, चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार किसी का नाम हटाने से पहले ‘फिजिकल वेरिफिकेशन’ मौके पर जांच अनिवार्य है, केवल फोन कॉल ना उठाना नाम काटने का आधार नहीं हो सकता, एक प्रतिष्ठित और देशभक्त पृष्ठभूमि से आने वाली महिला के लिए यह केवल प्रशासनिक गलती नहीं, बल्कि उनके नागरिक होने के अस्तित्व पर प्रहार है, उनका बयान, किसी के बाप का हिंदुस्तान नहीं है, उनके गहरे गुस्से को दर्शाता है नंदिता रॉय ने स्पष्ट किया है कि वे इस मामले को अदालत में ले जाएंगी ताकि भविष्य में किसी अन्य नागरिक के साथ ऐसी लापरवाही ना हो, यह घटना उन हजारों लोगों की चिंताओं को स्वर देती है जिनके नाम अक्सर बिना किसी ठोस सूचना के मतदाता सूची से हटा दिए जाते हैं, खासकर चुनावों के करीब.

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