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HomeVideosभूख की याद ना आए, इसलिए लोरी सुनाकर सुला देते हैं, नोएडा के कर्मचारी का छलका दर्द,10 हजार की पगार में कैसे पलें बच्चे?

भूख की याद ना आए, इसलिए लोरी सुनाकर सुला देते हैं, नोएडा के कर्मचारी का छलका दर्द,10 हजार की पगार में कैसे पलें बच्चे?

Written By: Aksha Choudhary
Last Updated: 2026-04-15 15:52:39

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में नोएडा की गारमेंट फैक्ट्री में काम करने वाले एक कर्मचारी ने अपनी व्यथा बयां की है, कर्मचारी का कहना है कि उसे महीने के मात्र ₹10,000 मिलते हैं, जिसमें कमरे का किराया बिजली और राशन का खर्च उठाना नामुमकिन है, जब घर में दाना नहीं होता तो वह अपने बच्चों को लोरी सुनाकर इसलिए सुला देता है ताकि उन्हें भूख का अहसास ना हो, यह बयान भारत की उस चमकती हुई अर्थव्यवस्था की पोल खोलता है जहां 'न्यूनतम वेतन' के लिए संघर्ष कर रहे मजदूरों के पास अपने बच्चों को दो वक्त की रोटी देने तक की सामर्थ्य नहीं बची है.


Noida Worker Hunger Story: यह घटना दिखाती है कि आर्थिक विकास (Economic Growth) का लाभ समाज के सबसे निचले पायदान तक नहीं पहुंच रहा है, नोएडा जैसे महंगे शहर में ₹10,000 की सैलरी में एक परिवार का गुजर-बसर करना किसी ‘चमत्कार’ से कम नहीं है, जो अक्सर बच्चों के कुपोषण का कारण बनता है भूख भुलाने के लिए लोरी सुनाना आधुनिक भारत के विकास के दावों के बीच एक ऐसी मानवीय त्रासदी है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, यह बयान उन नीति-निर्माताओं के लिए एक चेतावनी है जो बड़े-बड़े मॉल और एक्सप्रेस-वे को ही विकास मान लेते हैं, जबकि बुनियादी खाद्य सुरक्षा अभी भी एक चुनौती बनी हुई है, वीडियो सामने आने के बाद लोग मांग कर रहे हैं कि नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में न्यूनतम वेतन को तुरंत प्रभावी रूप से बढ़ाया जाए और श्रम कानूनों का सख्ती से पालन हो.

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Written By: Aksha Choudhary
Last Updated: 2026-04-15 15:52:39


Noida Worker Hunger Story: यह घटना दिखाती है कि आर्थिक विकास (Economic Growth) का लाभ समाज के सबसे निचले पायदान तक नहीं पहुंच रहा है, नोएडा जैसे महंगे शहर में ₹10,000 की सैलरी में एक परिवार का गुजर-बसर करना किसी ‘चमत्कार’ से कम नहीं है, जो अक्सर बच्चों के कुपोषण का कारण बनता है भूख भुलाने के लिए लोरी सुनाना आधुनिक भारत के विकास के दावों के बीच एक ऐसी मानवीय त्रासदी है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, यह बयान उन नीति-निर्माताओं के लिए एक चेतावनी है जो बड़े-बड़े मॉल और एक्सप्रेस-वे को ही विकास मान लेते हैं, जबकि बुनियादी खाद्य सुरक्षा अभी भी एक चुनौती बनी हुई है, वीडियो सामने आने के बाद लोग मांग कर रहे हैं कि नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में न्यूनतम वेतन को तुरंत प्रभावी रूप से बढ़ाया जाए और श्रम कानूनों का सख्ती से पालन हो.

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