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Home > एस्ट्रो > भाद्रपद अमावस्या पर बन रहा विष योग, इन 3 राशियों को रहना होगा सावधान, धन से लेकर नौकरी तक बरतें सतर्कता

भाद्रपद अमावस्या पर बन रहा विष योग, इन 3 राशियों को रहना होगा सावधान, धन से लेकर नौकरी तक बरतें सतर्कता

Bhadrapada Amavasya 2026: 11 सितंबर 2026 की भाद्रपद अमावस्या के दौरान चंद्रमा के राशि परिवर्तन से चंद्रमा और शनि के बीच विष योग बनने की ज्योतिषीय मान्यता है. सिंह, तुला और कुंभ राशि वालों को इस दौरान धन, नौकरी और बड़े फैसलों में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है.

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Last Updated: September 10, 2026 19:05:50 IST

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Bhadrapada Amavasya 2026: भाद्रपद अमावस्या इस बार ज्योतिषीय दृष्टि से खास मानी जा रही है. 11 सितंबर को पड़ने वाली अमावस्या के दौरान चंद्रमा की राशि परिवर्तन से चंद्रमा और शनि के बीच एक विशेष संबंध बनने की बात कही जा रही है. ज्योतिषीय मान्यताओं में इसे विष योग कहा जाता है. माना जाता है कि इस योग का असर सभी राशियों पर एक जैसा नहीं होता. कुछ लोगों के लिए यह समय मानसिक दबाव, आर्थिक उलझन और कामकाज में रुकावट वाला हो सकता है. खास तौर पर सिंह, तुला और कुंभ राशि के जातकों को इस अवधि में पैसों से जुड़े फैसले लेने, कार्यस्थल पर विवाद और किसी भी तरह के जोखिम में सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है. हालांकि ज्योतिषीय फलादेश व्यक्ति की जन्मकुंडली, ग्रहों की स्थिति और दशा आदि के आधार पर अलग-अलग हो सकता है.

11 सितंबर को चंद्रमा बदलेगा राशि, शनि से बनेगा विशेष संबंध

भाद्रपद अमावस्या 11 सितंबर को है. पंचांग गणना के अनुसार अमावस्या तिथि 10 सितंबर को शुरू होकर 11 सितंबर की सुबह तक रहती है. वहीं चंद्रमा 11 सितंबर को सिंह राशि में रहने के बाद शाम के समय कन्या राशि में प्रवेश करेंगे. उत्तर भारत के कई हिस्सों में यह परिवर्तन करीब रात 8 बजे के आसपास बताया गया है, जबकि पश्चिमी भारत में समय करीब 7:08 बजे का है. ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार चंद्रमा को मन, भावनाओं और मानसिक स्थिति का कारक माना जाता है, जबकि शनि को कर्म, अनुशासन, देरी और कठिन परिस्थितियों से जोड़ा जाता है. चंद्रमा और शनि के बीच बनने वाले इस विशेष संबंध को कुछ राशियों के लिए चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है.

कितने समय तक रहेगा विष योग?

ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार विष योग का प्रभाव 11 सितंबर की रात से शुरू होकर 13 सितंबर की देर रात तक रह सकता है. इसी वजह से इस दौरान बड़े फैसले लेते समय जल्दबाजी से बचने की सलाह दी जा रही है. हालांकि अलग-अलग ज्योतिषीय गणनाओं में इसके प्रभाव की अवधि को लेकर अंतर हो सकता है. इसलिए इसे निश्चित भविष्यवाणी के बजाय ज्योतिषीय मान्यता के तौर पर ही देखना चाहिए. इस दौरान खासकर निवेश, बड़े वित्तीय लेनदेन और विवाद से जुड़े मामलों में सोच-समझकर कदम उठाने की सलाह दी जाती है.

सिंह राशि: धन और परिवार के मामले में रहें सतर्क

सिंह राशि के जातकों के लिए यह समय आर्थिक मामलों में सावधानी बरतने वाला माना जा रहा है. ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस दौरान चंद्रमा आपकी कुंडली के दूसरे भाव में और शनि आठवें भाव में रहेंगे. ऐसे में निवेश, संपत्ति या किसी बड़े वित्तीय लेनदेन से पहले पूरी जानकारी जुटाना बेहतर होगा. किसी व्यक्ति के कहने पर पैसा लगाने या बिना जांच-पड़ताल के आर्थिक फैसला लेने से बचें. परिवार से जुड़े मामलों में भी अपनी बात रखने से पहले परिस्थिति को समझना आपके लिए बेहतर हो सकता है.

तुला राशि: नौकरी और कामकाज में गलती से बचें

तुला राशि वालों के लिए यह अवधि नौकरी और आर्थिक मामलों में अतिरिक्त सतर्कता बरतने वाली हो सकती है. ज्योतिषीय गणना के मुताबिक चंद्रमा आपके बारहवें भाव में और शनि छठे भाव में रहेंगे. इस दौरान कार्यस्थल पर विरोधियों या प्रतिस्पर्धियों से सावधान रहने की जरूरत हो सकती है. ऑफिस में किसी महत्वपूर्ण काम को जल्दबाजी में पूरा करने के बजाय उसे दोबारा जांच लेना बेहतर रहेगा. छोटी सी लापरवाही भी परेशानी का कारण बन सकती है. पैसों से जुड़े फैसलों में भी जल्दबाजी से बचने की सलाह दी जा रही है.

कुंभ राशि: अचानक परेशानी और मानसिक दबाव से रहें सावधान

कुंभ राशि के जातकों के लिए यह समय अपेक्षाकृत चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है. ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इस दौरान चंद्रमा आठवें भाव में और शनि दूसरे भाव में रहेंगे. इस स्थिति को अचानक आने वाली परेशानियों और मानसिक दबाव से जोड़कर देखा जाता है. आपको ऐसा महसूस हो सकता है कि मेहनत के मुताबिक परिणाम नहीं मिल रहा है. ऐसी स्थिति में निराश होने के बजाय धैर्य बनाए रखना जरूरी होगा. पैसों के मामले में भी सावधानी बरतें. किसी को बिना सोचे-समझे उधार देने, जोखिम भरे सौदे में शामिल होने या अनावश्यक खर्च करने से बचना बेहतर माना जा रहा है. इस समय बचत को प्राथमिकता देना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है.

भाद्रपद अमावस्या पर करें पितरों का स्मरण

भाद्रपद अमावस्या का धार्मिक दृष्टि से भी विशेष महत्व माना जाता है. इस दिन स्नान, दान, पितरों का स्मरण और तर्पण जैसी परंपराएं निभाई जाती हैं. लोग अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र, तिल और अन्य वस्तुओं का दान भी करते हैं. पंचांग परंपरा में अमावस्या को पितृ तर्पण और श्राद्ध जैसे कर्मों के लिए महत्वपूर्ण माना गया है. कई घरों में अमावस्या के दिन साफ-सफाई करने के बाद शाम को दीपक जलाने और ईश्वर का स्मरण करने की भी परंपरा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसे आत्मचिंतन, आत्मशुद्धि और पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का अवसर माना जाता है.

बड़े फैसलों में जल्दबाजी से बचें

विष योग की ज्योतिषीय मान्यता को देखते हुए सिंह, तुला और कुंभ राशि के जातकों को इस अवधि में बड़े आर्थिक जोखिम, अनावश्यक विवाद और जल्दबाजी में लिए गए फैसलों से बचने की सलाह दी जा रही है. हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि ज्योतिषीय फलादेश व्यक्ति की पूरी जन्मकुंडली और दशा आदि के आधार पर अलग-अलग हो सकता है. इसलिए किसी भी बड़े आर्थिक या व्यक्तिगत निर्णय को केवल राशिफल के आधार पर लेना उचित नहीं माना जाना चाहिए.

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Last Updated: September 10, 2026 19:05:50 IST

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Bhadrapada Amavasya 2026: भाद्रपद अमावस्या इस बार ज्योतिषीय दृष्टि से खास मानी जा रही है. 11 सितंबर को पड़ने वाली अमावस्या के दौरान चंद्रमा की राशि परिवर्तन से चंद्रमा और शनि के बीच एक विशेष संबंध बनने की बात कही जा रही है. ज्योतिषीय मान्यताओं में इसे विष योग कहा जाता है. माना जाता है कि इस योग का असर सभी राशियों पर एक जैसा नहीं होता. कुछ लोगों के लिए यह समय मानसिक दबाव, आर्थिक उलझन और कामकाज में रुकावट वाला हो सकता है. खास तौर पर सिंह, तुला और कुंभ राशि के जातकों को इस अवधि में पैसों से जुड़े फैसले लेने, कार्यस्थल पर विवाद और किसी भी तरह के जोखिम में सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है. हालांकि ज्योतिषीय फलादेश व्यक्ति की जन्मकुंडली, ग्रहों की स्थिति और दशा आदि के आधार पर अलग-अलग हो सकता है.

11 सितंबर को चंद्रमा बदलेगा राशि, शनि से बनेगा विशेष संबंध

भाद्रपद अमावस्या 11 सितंबर को है. पंचांग गणना के अनुसार अमावस्या तिथि 10 सितंबर को शुरू होकर 11 सितंबर की सुबह तक रहती है. वहीं चंद्रमा 11 सितंबर को सिंह राशि में रहने के बाद शाम के समय कन्या राशि में प्रवेश करेंगे. उत्तर भारत के कई हिस्सों में यह परिवर्तन करीब रात 8 बजे के आसपास बताया गया है, जबकि पश्चिमी भारत में समय करीब 7:08 बजे का है. ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार चंद्रमा को मन, भावनाओं और मानसिक स्थिति का कारक माना जाता है, जबकि शनि को कर्म, अनुशासन, देरी और कठिन परिस्थितियों से जोड़ा जाता है. चंद्रमा और शनि के बीच बनने वाले इस विशेष संबंध को कुछ राशियों के लिए चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है.

कितने समय तक रहेगा विष योग?

ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार विष योग का प्रभाव 11 सितंबर की रात से शुरू होकर 13 सितंबर की देर रात तक रह सकता है. इसी वजह से इस दौरान बड़े फैसले लेते समय जल्दबाजी से बचने की सलाह दी जा रही है. हालांकि अलग-अलग ज्योतिषीय गणनाओं में इसके प्रभाव की अवधि को लेकर अंतर हो सकता है. इसलिए इसे निश्चित भविष्यवाणी के बजाय ज्योतिषीय मान्यता के तौर पर ही देखना चाहिए. इस दौरान खासकर निवेश, बड़े वित्तीय लेनदेन और विवाद से जुड़े मामलों में सोच-समझकर कदम उठाने की सलाह दी जाती है.

सिंह राशि: धन और परिवार के मामले में रहें सतर्क

सिंह राशि के जातकों के लिए यह समय आर्थिक मामलों में सावधानी बरतने वाला माना जा रहा है. ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस दौरान चंद्रमा आपकी कुंडली के दूसरे भाव में और शनि आठवें भाव में रहेंगे. ऐसे में निवेश, संपत्ति या किसी बड़े वित्तीय लेनदेन से पहले पूरी जानकारी जुटाना बेहतर होगा. किसी व्यक्ति के कहने पर पैसा लगाने या बिना जांच-पड़ताल के आर्थिक फैसला लेने से बचें. परिवार से जुड़े मामलों में भी अपनी बात रखने से पहले परिस्थिति को समझना आपके लिए बेहतर हो सकता है.

तुला राशि: नौकरी और कामकाज में गलती से बचें

तुला राशि वालों के लिए यह अवधि नौकरी और आर्थिक मामलों में अतिरिक्त सतर्कता बरतने वाली हो सकती है. ज्योतिषीय गणना के मुताबिक चंद्रमा आपके बारहवें भाव में और शनि छठे भाव में रहेंगे. इस दौरान कार्यस्थल पर विरोधियों या प्रतिस्पर्धियों से सावधान रहने की जरूरत हो सकती है. ऑफिस में किसी महत्वपूर्ण काम को जल्दबाजी में पूरा करने के बजाय उसे दोबारा जांच लेना बेहतर रहेगा. छोटी सी लापरवाही भी परेशानी का कारण बन सकती है. पैसों से जुड़े फैसलों में भी जल्दबाजी से बचने की सलाह दी जा रही है.

कुंभ राशि: अचानक परेशानी और मानसिक दबाव से रहें सावधान

कुंभ राशि के जातकों के लिए यह समय अपेक्षाकृत चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है. ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इस दौरान चंद्रमा आठवें भाव में और शनि दूसरे भाव में रहेंगे. इस स्थिति को अचानक आने वाली परेशानियों और मानसिक दबाव से जोड़कर देखा जाता है. आपको ऐसा महसूस हो सकता है कि मेहनत के मुताबिक परिणाम नहीं मिल रहा है. ऐसी स्थिति में निराश होने के बजाय धैर्य बनाए रखना जरूरी होगा. पैसों के मामले में भी सावधानी बरतें. किसी को बिना सोचे-समझे उधार देने, जोखिम भरे सौदे में शामिल होने या अनावश्यक खर्च करने से बचना बेहतर माना जा रहा है. इस समय बचत को प्राथमिकता देना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है.

भाद्रपद अमावस्या पर करें पितरों का स्मरण

भाद्रपद अमावस्या का धार्मिक दृष्टि से भी विशेष महत्व माना जाता है. इस दिन स्नान, दान, पितरों का स्मरण और तर्पण जैसी परंपराएं निभाई जाती हैं. लोग अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र, तिल और अन्य वस्तुओं का दान भी करते हैं. पंचांग परंपरा में अमावस्या को पितृ तर्पण और श्राद्ध जैसे कर्मों के लिए महत्वपूर्ण माना गया है. कई घरों में अमावस्या के दिन साफ-सफाई करने के बाद शाम को दीपक जलाने और ईश्वर का स्मरण करने की भी परंपरा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसे आत्मचिंतन, आत्मशुद्धि और पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का अवसर माना जाता है.

बड़े फैसलों में जल्दबाजी से बचें

विष योग की ज्योतिषीय मान्यता को देखते हुए सिंह, तुला और कुंभ राशि के जातकों को इस अवधि में बड़े आर्थिक जोखिम, अनावश्यक विवाद और जल्दबाजी में लिए गए फैसलों से बचने की सलाह दी जा रही है. हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि ज्योतिषीय फलादेश व्यक्ति की पूरी जन्मकुंडली और दशा आदि के आधार पर अलग-अलग हो सकता है. इसलिए किसी भी बड़े आर्थिक या व्यक्तिगत निर्णय को केवल राशिफल के आधार पर लेना उचित नहीं माना जाना चाहिए.

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