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Home > देश > आसाराम को गुजरात हाईकोर्ट से झटका, अस्थायी जमानत अर्जी खारिज, पत्नी से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कर सकेंगे बात

आसाराम को गुजरात हाईकोर्ट से झटका, अस्थायी जमानत अर्जी खारिज, पत्नी से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कर सकेंगे बात

Asaram temporary bail plea rejected : गुजरात हाईकोर्ट ने आसाराम की पत्नी से मिलने के लिए मांगी गई 20 दिन की अस्थायी जमानत याचिका खारिज कर दी. अदालत ने पुलिस रिपोर्ट और डॉक्टरों की जानकारी के आधार पर माना कि उनकी पत्नी की हालत स्थिर है और जल्द अस्पताल से छुट्टी मिलने की संभावना है. हालांकि, आसाराम को जेल अधीक्षक की अनुमति से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पत्नी से बात करने की इजाजत दी गई है. यह आवेदन 2013 के दुष्कर्म मामले में उनकी लंबित अपील से जुड़ा है.

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Last Updated: September 30, 2026 18:55:38 IST

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Asaram temporary bail plea rejected: गुजरात हाईकोर्ट ने आसाराम को अपनी बीमार पत्नी से मिलने के लिए मांगी गई 20 दिन की अस्थायी जमानत देने से इनकार कर दिया है. जस्टिस गीता गोपी और जस्टिस एलएस पीरजादा की डिवीजन बेंच ने बुधवार को यह फैसला सुनाया. हालांकि, अदालत ने आसाराम को जेल अधीक्षक से अनुमति लेकर अपनी पत्नी से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात करने की इजाजत दी है.

पत्नी की तबीयत को लेकर मांगी थी राहत

आसाराम के वकील ने अदालत में कहा कि उनकी उम्र 86 वर्ष है और उनकी पत्नी 83 वर्ष की हैं. पत्नी इस समय अस्पताल में इलाज करा रही हैं, इसलिए मानवीय आधार पर आसाराम को 20 दिनों के लिए जेल से बाहर आने की अनुमति दी जानी चाहिए. इस याचिका पर अदालत ने पहले स्थानीय पुलिस को उनकी पत्नी की स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी जुटाकर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था. सुनवाई के दौरान SIT/महिला अपराध प्रकोष्ठ के सहायक पुलिस आयुक्त ने अस्पताल का पत्र और पत्नी का इलाज कर रहे दो डॉक्टरों के बयान अदालत में पेश किए. रिपोर्ट में बताया गया कि इलाज का असर हो रहा है और उनकी हालत स्थिर है. डॉक्टरों के मुताबिक, उन्हें दो से तीन दिनों के भीतर अस्पताल से छुट्टी दिए जाने की संभावना थी.

कोर्ट ने क्यों नहीं दी अस्थायी जमानत?

सरकारी वकील ने दलील दी कि पत्नी की स्थिति स्थिर है और उन्हें मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल में इलाज मिल रहा है. साथ ही उनके रिश्तेदार और निजी डॉक्टर भी उनकी देखभाल कर रहे हैं. अदालत ने पुलिस रिपोर्ट और डॉक्टरों की राय को ध्यान में रखते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में जेल में बंद आवेदक को अस्थायी जमानत देने का पर्याप्त आधार नहीं बनता.

वीडियो कॉल के जरिए पत्नी से कर सकेंगे बात

अदालत ने हालांकि आसाराम को पूरी तरह राहत से वंचित नहीं किया. उन्हें जेल अधीक्षक से अनुमति लेने के बाद पत्नी से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बातचीत करने की अनुमति दी गई है. यानी वह फिलहाल जेल से बाहर नहीं आ सकेंगे, लेकिन पत्नी से वीडियो कॉल के जरिए संपर्क कर सकते हैं.

यह याचिका किस मामले से जुड़ी है?

यह आवेदन आसाराम की उस अपील से जुड़ा है, जिसमें वह 2013 के दुष्कर्म मामले में गांधीनगर सत्र अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को चुनौती दे रहे हैं. सितंबर 2026 की शुरुआत में भी गुजरात हाईकोर्ट उनकी 20 दिन की अस्थायी जमानत की एक अन्य अर्जी खारिज कर चुका है.

राजस्थान हाईकोर्ट ने अगस्त में दी थी 20 दिन की पैरोल

अगस्त 2026 में राजस्थान हाईकोर्ट ने एक अलग नाबालिग से दुष्कर्म मामले में आसाराम को 20 दिन की पैरोल दी थी. यह राहत उनकी उम्र और लंबे समय से जेल में रहने के आधार पर दी गई थी. वहीं, जून 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सजा पर रोक लगाने से इनकार किया था, हालांकि उनकी स्थिति बिगड़ने पर फिर अदालत का रुख करने की छूट दी थी. गुजरात हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद आसाराम को अपनी पत्नी से मिलने के लिए अस्थायी जमानत नहीं मिली है. हालांकि जेल अधीक्षक की अनुमति के जरिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बातचीत का रास्ता खुला है. मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया उनकी लंबित अपील के साथ जारी रहेगी.

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Asaram temporary bail plea rejected: गुजरात हाईकोर्ट ने आसाराम को अपनी बीमार पत्नी से मिलने के लिए मांगी गई 20 दिन की अस्थायी जमानत देने से इनकार कर दिया है. जस्टिस गीता गोपी और जस्टिस एलएस पीरजादा की डिवीजन बेंच ने बुधवार को यह फैसला सुनाया. हालांकि, अदालत ने आसाराम को जेल अधीक्षक से अनुमति लेकर अपनी पत्नी से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात करने की इजाजत दी है.

पत्नी की तबीयत को लेकर मांगी थी राहत

आसाराम के वकील ने अदालत में कहा कि उनकी उम्र 86 वर्ष है और उनकी पत्नी 83 वर्ष की हैं. पत्नी इस समय अस्पताल में इलाज करा रही हैं, इसलिए मानवीय आधार पर आसाराम को 20 दिनों के लिए जेल से बाहर आने की अनुमति दी जानी चाहिए. इस याचिका पर अदालत ने पहले स्थानीय पुलिस को उनकी पत्नी की स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी जुटाकर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था. सुनवाई के दौरान SIT/महिला अपराध प्रकोष्ठ के सहायक पुलिस आयुक्त ने अस्पताल का पत्र और पत्नी का इलाज कर रहे दो डॉक्टरों के बयान अदालत में पेश किए. रिपोर्ट में बताया गया कि इलाज का असर हो रहा है और उनकी हालत स्थिर है. डॉक्टरों के मुताबिक, उन्हें दो से तीन दिनों के भीतर अस्पताल से छुट्टी दिए जाने की संभावना थी.

कोर्ट ने क्यों नहीं दी अस्थायी जमानत?

सरकारी वकील ने दलील दी कि पत्नी की स्थिति स्थिर है और उन्हें मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल में इलाज मिल रहा है. साथ ही उनके रिश्तेदार और निजी डॉक्टर भी उनकी देखभाल कर रहे हैं. अदालत ने पुलिस रिपोर्ट और डॉक्टरों की राय को ध्यान में रखते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में जेल में बंद आवेदक को अस्थायी जमानत देने का पर्याप्त आधार नहीं बनता.

वीडियो कॉल के जरिए पत्नी से कर सकेंगे बात

अदालत ने हालांकि आसाराम को पूरी तरह राहत से वंचित नहीं किया. उन्हें जेल अधीक्षक से अनुमति लेने के बाद पत्नी से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बातचीत करने की अनुमति दी गई है. यानी वह फिलहाल जेल से बाहर नहीं आ सकेंगे, लेकिन पत्नी से वीडियो कॉल के जरिए संपर्क कर सकते हैं.

यह याचिका किस मामले से जुड़ी है?

यह आवेदन आसाराम की उस अपील से जुड़ा है, जिसमें वह 2013 के दुष्कर्म मामले में गांधीनगर सत्र अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को चुनौती दे रहे हैं. सितंबर 2026 की शुरुआत में भी गुजरात हाईकोर्ट उनकी 20 दिन की अस्थायी जमानत की एक अन्य अर्जी खारिज कर चुका है.

राजस्थान हाईकोर्ट ने अगस्त में दी थी 20 दिन की पैरोल

अगस्त 2026 में राजस्थान हाईकोर्ट ने एक अलग नाबालिग से दुष्कर्म मामले में आसाराम को 20 दिन की पैरोल दी थी. यह राहत उनकी उम्र और लंबे समय से जेल में रहने के आधार पर दी गई थी. वहीं, जून 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सजा पर रोक लगाने से इनकार किया था, हालांकि उनकी स्थिति बिगड़ने पर फिर अदालत का रुख करने की छूट दी थी. गुजरात हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद आसाराम को अपनी पत्नी से मिलने के लिए अस्थायी जमानत नहीं मिली है. हालांकि जेल अधीक्षक की अनुमति के जरिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बातचीत का रास्ता खुला है. मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया उनकी लंबित अपील के साथ जारी रहेगी.

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