विदेश मंत्रालय (MEA) ने गुरुवार को घोषणा की कि इस वर्ष कैलाश मानसरोवर यात्रा जून और अगस्त के बीच आयोजित की जाएगी और इसे उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे और सिक्किम के नाथू ला दर्रे के माध्यम से आयोजित किया जाएगा. विदेश मंत्रालय द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार, तीर्थयात्रा के लिए कुल 20 जत्थे निर्धारित किए गए हैं। इनमें से प्रत्येक जत्थे में 50 तीर्थयात्री होंगे. विदेश मंत्रालय ने बताया कि यह यात्रा चीनी सरकार के समन्वय से आयोजित की जाएगी.
कैलाश पर्वत को भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है और सनातन धर्म में इस यात्रा की विशेष महिमा है. आइये जानते हैं कि इस यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया क्या है और यात्रा के दौरान किन-किन बातों का ध्यान रखना है.
डिजिटल रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया
विदेश मंत्रालय ने बताया कि यात्रा के पंजीकरण के लिए आधिकारिक वेबसाइट (kmy.gov.in) ऑनलाइन आवेदन के लिए खोल दी गई है. संपूर्ण पंजीकरण और चयन प्रक्रिया पूरी तरह से डिजिटल कर दी गई है, जिसके तहत आवेदकों को ऑनलाइन पंजीकरण करके अपने फॉर्म जमा करने होंगे. विदेश मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया कि आवेदकों को कोई फैक्स भेजने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि सभी संचार और प्रतिक्रिया वेबसाइट के माध्यम से ही की जाएगी. विज्ञप्ति में कहा गया है कि तीर्थयात्रियों का चयन “निष्पक्ष, कंप्यूटर-जनित, यादृच्छिक और लिंग-संतुलित चयन प्रक्रिया” के माध्यम से किया जाएगा. आवेदकों के पास दोनों मार्गों के लिए प्राथमिकता के साथ आवेदन करने या केवल एक मार्ग चुनने का विकल्प भी होगा. बता दें कि पंजीकरण की अंतिम तिथि 19 मई निर्धारित की गई है.
हिन्दू धर्मावलंबियों के लिए विशेष महत्त्व
कैलाश मानसरोवर यात्रा (KMY) अपने धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के लिए जानी जाती है. हर साल सैकड़ों लोग इस यात्रा में भाग लेते हैं. भगवान शिव के निवास स्थान के रूप में हिंदुओं के लिए महत्वपूर्ण होने के साथ-साथ, जैन और बौद्ध धर्म के लिए भी इसका धार्मिक महत्व है. इससे पहले मार्च में, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोक भवन में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले 555 तीर्थयात्रियों को 1 लाख रुपये की वित्तीय सहायता वितरित की थी. इस यात्रा का पैकेज दिनों के हिसाब से अलग-अलग है.