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Home > एस्ट्रो > Pitru Paksha 2026: पितृपक्ष में इन 3 चीजों को घर लाना पड़ सकता है भारी! जानें क्यों मानी जाती हैं अशुभ

Pitru Paksha 2026: पितृपक्ष में इन 3 चीजों को घर लाना पड़ सकता है भारी! जानें क्यों मानी जाती हैं अशुभ

Pitru Paksha 2026: पितृपक्ष इस साल 26 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर तक चलेगा. सर्वपितृ अमावस्या के साथ इसका समापन होगा. पितृपक्ष में तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध की परंपरा है. धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस दौरान झाड़ू, नमक और सरसों के तेल की खरीदारी से बचने की सलाह दी जाती है. इन चीजों को लेकर त्रिदोष जैसी मान्यताएं भी प्रचलित हैं, हालांकि इनका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है.

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Last Updated: September 15, 2026 23:27:51 IST

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Pitru Paksha 2026: पितृपक्ष शुरू होने वाला है. इस साल पितृपक्ष की शुरुआत 26 सितंबर से होगी और 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ इसका समापन होगा. इन दिनों में पितरों के तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध का विशेष महत्व माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृपक्ष के दौरान लोग अपने पूर्वजों का स्मरण करते हैं और उनके निमित्त श्राद्ध, तर्पण तथा दान-पुण्य करते हैं. पितृपक्ष से जुड़ी कई ऐसी मान्यताएं भी हैं, जिनमें इस दौरान कुछ चीजों की खरीदारी से बचने की सलाह दी जाती है. इनमें झाड़ू, नमक और सरसों का तेल प्रमुख हैं. ज्योतिषीय और लोक मान्यताओं में इन चीजों की खरीदारी को शुभ नहीं माना जाता और इसे त्रिदोष से जोड़कर देखा जाता है. हालांकि इन बातों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है और इन्हें धार्मिक मान्यता के रूप में ही देखना चाहिए.

पितृपक्ष में क्यों नहीं खरीदनी चाहिए नई झाड़ू?

झाड़ू को कई धार्मिक परंपराओं में मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है. इसी वजह से झाड़ू की खरीदारी को लेकर भी अलग-अलग मान्यताएं प्रचलित हैं. कहा जाता है कि पितृपक्ष के दौरान नई झाड़ू खरीदकर घर लाने से बचना चाहिए. लोक मान्यता के अनुसार, इस अवधि में झाड़ू खरीदने से घर की आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक असर पड़ सकता है. यही वजह है कि पितृपक्ष के दौरान कई लोग झाड़ू की खरीदारी को टालना पसंद करते हैं. हालांकि यह पूरी तरह धार्मिक विश्वास का विषय है, इसे निश्चित फल देने वाला नियम नहीं माना जा सकता.

नमक खरीदने और उधार लेने-देने से भी जुड़ी है मान्यता

पितृपक्ष में नमक को लेकर भी कुछ लोक मान्यताएं प्रचलित हैं. कहा जाता है कि श्राद्ध पक्ष के दौरान नया नमक खरीदने से बचना चाहिए. इतना ही नहीं, इस अवधि में किसी दूसरे व्यक्ति से नमक उधार लेने या किसी को नमक उधार देने से भी बचने की सलाह दी जाती है. धार्मिक मान्यताओं में नमक को कई तरह के प्रतीकात्मक अर्थों से जोड़ा गया है. इसी कारण पितृपक्ष के दौरान इसकी खरीदारी और लेन-देन को लेकर सावधानी बरतने की परंपरा कुछ जगहों पर देखने को मिलती है. हालांकि इन मान्यताओं को वैज्ञानिक तथ्य नहीं माना जा सकता.

सरसों के तेल को लेकर क्यों बरतते हैं सावधानी?

ज्योतिषीय मान्यताओं में सरसों के तेल का संबंध शनि देव से माना जाता है. शनिदेव की पूजा में तेल अर्पित करने की परंपरा भी कई स्थानों पर प्रचलित है. इसी वजह से पितृपक्ष के दौरान सरसों के तेल की खरीदारी को लेकर भी विशेष मान्यता बताई जाती है. कहा जाता है कि श्राद्ध पक्ष में सरसों का तेल खरीदकर घर लाने से बचना चाहिए. कुछ ज्योतिषीय मान्यताओं में इसे पितृ और शनि से जुड़े दोषों से जोड़कर देखा जाता है. हालांकि अलग-अलग परंपराओं और ज्योतिषीय मतों में इस बारे में अलग विचार मिल सकते हैं.

क्या है त्रिदोष और इससे क्यों जोड़ा जाता है खरीदारी को?

ज्योतिषीय मान्यताओं में त्रिदोष को जीवन में आने वाली कई तरह की परेशानियों से जोड़कर देखा जाता है. कहा जाता है कि इसका प्रभाव आर्थिक स्थिति, स्वास्थ्य, करियर और पारिवारिक जीवन पर पड़ सकता है. मान्यता के अनुसार, त्रिदोष के प्रभाव से व्यक्ति को मेहनत के बावजूद सफलता मिलने में देरी हो सकती है. कमाई के बाद भी धन टिकने में परेशानी, करियर में रुकावट या रिश्तों में तनाव जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है. हालांकि यह ज्योतिषीय मान्यता है और इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है.

पितृपक्ष में क्या करना माना जाता है शुभ?

पितृपक्ष में पितरों की तिथि के अनुसार श्राद्ध और तर्पण करने की परंपरा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धा और विधि-विधान से पितरों का स्मरण करना चाहिए. श्राद्ध कर्म के बाद गरीब और जरूरतमंद लोगों को भोजन, अन्न या अपनी सामर्थ्य के अनुसार धन का दान करने की भी परंपरा है. इस दौरान पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने और जरूरतमंदों की सहायता करने को विशेष महत्व दिया जाता है. झाड़ू, नमक और सरसों के तेल की खरीदारी से जुड़ी मान्यताओं को भी इसी धार्मिक परंपरा के संदर्भ में देखना चाहिए, न कि इन्हें निश्चित रूप से होने वाली शुभ-अशुभ घटनाओं की गारंटी मानना चाहिए.

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Last Updated: September 15, 2026 23:27:51 IST

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Pitru Paksha 2026: पितृपक्ष शुरू होने वाला है. इस साल पितृपक्ष की शुरुआत 26 सितंबर से होगी और 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ इसका समापन होगा. इन दिनों में पितरों के तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध का विशेष महत्व माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृपक्ष के दौरान लोग अपने पूर्वजों का स्मरण करते हैं और उनके निमित्त श्राद्ध, तर्पण तथा दान-पुण्य करते हैं. पितृपक्ष से जुड़ी कई ऐसी मान्यताएं भी हैं, जिनमें इस दौरान कुछ चीजों की खरीदारी से बचने की सलाह दी जाती है. इनमें झाड़ू, नमक और सरसों का तेल प्रमुख हैं. ज्योतिषीय और लोक मान्यताओं में इन चीजों की खरीदारी को शुभ नहीं माना जाता और इसे त्रिदोष से जोड़कर देखा जाता है. हालांकि इन बातों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है और इन्हें धार्मिक मान्यता के रूप में ही देखना चाहिए.

पितृपक्ष में क्यों नहीं खरीदनी चाहिए नई झाड़ू?

झाड़ू को कई धार्मिक परंपराओं में मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है. इसी वजह से झाड़ू की खरीदारी को लेकर भी अलग-अलग मान्यताएं प्रचलित हैं. कहा जाता है कि पितृपक्ष के दौरान नई झाड़ू खरीदकर घर लाने से बचना चाहिए. लोक मान्यता के अनुसार, इस अवधि में झाड़ू खरीदने से घर की आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक असर पड़ सकता है. यही वजह है कि पितृपक्ष के दौरान कई लोग झाड़ू की खरीदारी को टालना पसंद करते हैं. हालांकि यह पूरी तरह धार्मिक विश्वास का विषय है, इसे निश्चित फल देने वाला नियम नहीं माना जा सकता.

नमक खरीदने और उधार लेने-देने से भी जुड़ी है मान्यता

पितृपक्ष में नमक को लेकर भी कुछ लोक मान्यताएं प्रचलित हैं. कहा जाता है कि श्राद्ध पक्ष के दौरान नया नमक खरीदने से बचना चाहिए. इतना ही नहीं, इस अवधि में किसी दूसरे व्यक्ति से नमक उधार लेने या किसी को नमक उधार देने से भी बचने की सलाह दी जाती है. धार्मिक मान्यताओं में नमक को कई तरह के प्रतीकात्मक अर्थों से जोड़ा गया है. इसी कारण पितृपक्ष के दौरान इसकी खरीदारी और लेन-देन को लेकर सावधानी बरतने की परंपरा कुछ जगहों पर देखने को मिलती है. हालांकि इन मान्यताओं को वैज्ञानिक तथ्य नहीं माना जा सकता.

सरसों के तेल को लेकर क्यों बरतते हैं सावधानी?

ज्योतिषीय मान्यताओं में सरसों के तेल का संबंध शनि देव से माना जाता है. शनिदेव की पूजा में तेल अर्पित करने की परंपरा भी कई स्थानों पर प्रचलित है. इसी वजह से पितृपक्ष के दौरान सरसों के तेल की खरीदारी को लेकर भी विशेष मान्यता बताई जाती है. कहा जाता है कि श्राद्ध पक्ष में सरसों का तेल खरीदकर घर लाने से बचना चाहिए. कुछ ज्योतिषीय मान्यताओं में इसे पितृ और शनि से जुड़े दोषों से जोड़कर देखा जाता है. हालांकि अलग-अलग परंपराओं और ज्योतिषीय मतों में इस बारे में अलग विचार मिल सकते हैं.

क्या है त्रिदोष और इससे क्यों जोड़ा जाता है खरीदारी को?

ज्योतिषीय मान्यताओं में त्रिदोष को जीवन में आने वाली कई तरह की परेशानियों से जोड़कर देखा जाता है. कहा जाता है कि इसका प्रभाव आर्थिक स्थिति, स्वास्थ्य, करियर और पारिवारिक जीवन पर पड़ सकता है. मान्यता के अनुसार, त्रिदोष के प्रभाव से व्यक्ति को मेहनत के बावजूद सफलता मिलने में देरी हो सकती है. कमाई के बाद भी धन टिकने में परेशानी, करियर में रुकावट या रिश्तों में तनाव जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है. हालांकि यह ज्योतिषीय मान्यता है और इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है.

पितृपक्ष में क्या करना माना जाता है शुभ?

पितृपक्ष में पितरों की तिथि के अनुसार श्राद्ध और तर्पण करने की परंपरा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धा और विधि-विधान से पितरों का स्मरण करना चाहिए. श्राद्ध कर्म के बाद गरीब और जरूरतमंद लोगों को भोजन, अन्न या अपनी सामर्थ्य के अनुसार धन का दान करने की भी परंपरा है. इस दौरान पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने और जरूरतमंदों की सहायता करने को विशेष महत्व दिया जाता है. झाड़ू, नमक और सरसों के तेल की खरीदारी से जुड़ी मान्यताओं को भी इसी धार्मिक परंपरा के संदर्भ में देखना चाहिए, न कि इन्हें निश्चित रूप से होने वाली शुभ-अशुभ घटनाओं की गारंटी मानना चाहिए.

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