Vastu Shastra: वास्तु शास्त्र में घर के अलग अलग कामों के लिए दिशाओं का विशेष महत्व बताया गया है. जिस तरह रसोई के लिए अग्नि तत्व से जुड़ी दिशा को उपयुक्त माना जाता है, उसी तरह भोजन करने की दिशा को लेकर भी कुछ मान्यताएं हैं. वास्तु के अनुसार, भोजन करते समय सही दिशा का ध्यान रखने से सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और पाचन से जुड़ी परेशानियों से भी बचाव हो सकता है. इसके साथ ही भारतीय परंपरा में जमीन पर बैठकर पालती मारकर भोजन करने की आदत को भी शरीर और भोजन की प्रक्रिया से जोड़कर देखा जाता है.
अग्नि तत्व की दिशा में भोजन करना माना जाता है शुभ
वास्तु के अनुसार, भोजन करने के लिए अग्नि तत्व से जुड़ी दिशाओं को उपयुक्त माना जाता है. दक्षिण पूर्व से दक्षिण दिशा तक के क्षेत्र को अग्नि तत्व से संबंधित माना जाता है. इसी वजह से इस दिशा में बैठकर भोजन करने को पाचन और ऊर्जा के लिहाज से अच्छा माना जाता है. पारंपरिक मान्यताओं में अग्नि को ऊर्जा और पाचन से जोड़ा गया है. हालांकि, दिशा और पाचन के बीच सीधे वैज्ञानिक संबंध को स्थापित करने वाले प्रमाण अलग विषय हैं.
सुबह का खाना पूर्व दिशा की ओर मुंह करके खाएं
वास्तु मान्यताओं के मुताबिक सुबह का भोजन पूर्व दिशा की ओर मुंह करके करना अच्छा माना जाता है. भारतीय परंपरा में पहले लोग अक्सर रसोई में ही जमीन पर बैठकर भोजन करते थे. समय के साथ घरों में डाइनिंग टेबल का चलन बढ़ गया, लेकिन भोजन करते समय दिशा और बैठने की मुद्रा को लेकर पारंपरिक मान्यताएं आज भी बनी हुई हैं. पूर्व दिशा को सकारात्मकता और ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता है, इसलिए सुबह के भोजन के लिए इसे विशेष महत्व दिया जाता है.
पालती मारकर जमीन पर बैठने की पुरानी परंपरा
भारतीय घरों में जमीन पर बैठकर पालती मारकर भोजन करने की परंपरा लंबे समय से रही है. इसे सिर्फ सांस्कृतिक परंपरा नहीं माना जाता, बल्कि शरीर की मुद्रा से भी जोड़ा जाता है. पालती मारकर बैठने पर शरीर अपेक्षाकृत स्थिर रहता है और व्यक्ति भोजन पर ध्यान केंद्रित करके धीरे धीरे खाने की ओर प्रवृत्त हो सकता है. भोजन को अच्छी तरह चबाना और आराम से खाना पाचन के लिए सामान्य रूप से उपयोगी आदतें मानी जाती हैं. इसलिए जहां सुविधा हो, जमीन पर बैठकर भोजन करने की परंपरा अपनाई जा सकती है.
पूर्व और पश्चिम दिशा भी मानी गई है ठीक
अग्नि तत्व से जुड़ी दिशाओं के अलावा वास्तु मान्यताओं में पूर्व और पश्चिम दिशा की ओर मुंह करके भोजन करने को भी स्वीकार्य माना गया है. खासतौर पर सुबह के समय पूर्व दिशा की ओर मुंह करके भोजन करने की परंपरा को शुभ माना जाता है. हालांकि, आधुनिक घरों में भोजन की जगह हमेशा वास्तु के अनुसार तय करना संभव नहीं होता. ऐसे में भोजन करते समय आरामदायक मुद्रा और स्वच्छ वातावरण को प्राथमिकता देना व्यावहारिक रूप से ज्यादा जरूरी है.
जल तत्व की दिशाओं को लेकर क्या कहता है वास्तु
वास्तु शास्त्र में उत्तर पश्चिम से उत्तर होते हुए उत्तर पूर्व तक के क्षेत्र को जल तत्व से जोड़ा जाता है. कुछ वास्तु मान्यताओं के अनुसार इन दिशाओं में बैठकर भोजन करने से पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. इसलिए भोजन के स्थान का चयन करते समय इन दिशाओं से बचने की सलाह दी जाती है. यह वास्तु की पारंपरिक मान्यता है, इसे चिकित्सा विज्ञान द्वारा स्थापित नियम नहीं माना जाना चाहिए.