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Haridwar Ganga News: 18 दिन बाद हरिद्वार में लौटी गंगा की रौनक, हर की पौड़ी समेत सभी घाटों पर बहने लगी धारा

Haridwar Ganga News: हरिद्वार में गंगा की 18 दिनों से चली आ रही वार्षिक बंदी समाप्त हो गई है. 7 नवंबर की रात गंगा में दोबारा पानी छोड़ा गया, जिसके बाद हर की पौड़ी समेत सभी गंगा घाटों पर जल प्रवाह शुरू हो गया. दशहरे से शुरू हुई बंदी के दौरान गंग नहर की सफाई, गाद निकालने और मरम्मत का काम किया गया. साथ ही अर्धकुंभ 2027 की तैयारियों के तहत करीब तीन किलोमीटर लंबे गंगा घाट का निर्माण कार्य भी हुआ.

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Published: November 8, 2026 07:22:20 IST
Last Updated: November 8, 2026 07:22:20 IST

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Haridwar Ganga News: हरिद्वार में 18 दिनों के इंतजार के बाद एक बार फिर मां गंगा की अविरल धारा घाटों पर बहने लगी है. दशहरे की रात से शुरू हुई गंगा की वार्षिक बंदी समाप्त हो गई है. 7 नवंबर की रात गंगा में दोबारा पानी छोड़ा गया, जिसके बाद हर की पौड़ी समेत हरिद्वार के सभी प्रमुख गंगा घाटों पर जल प्रवाह शुरू हो गया. दिवाली से ठीक पहले गंगा में पानी लौटने से घाटों की रौनक भी वापस आ गई है. अब श्रद्धालु पहले की तरह गंगा घाटों पर स्नान और पूजा-अर्चना कर सकेंगे.

दशहरे से दिवाली तक बंद रहती है गंगा की धारा

हरिद्वार में गंगा की वार्षिक बंदी एक निर्धारित परंपरा के तहत की जाती है. आमतौर पर दशहरे की रात से दिवाली तक गंग नहर में पानी का प्रवाह रोक दिया जाता है. इस दौरान नहर की सफाई, मरम्मत और दूसरे जरूरी काम पूरे किए जाते हैं. इस साल भी दशहरे की रात गंगा बंदी शुरू हुई थी, जो लगातार 18 दिनों तक चली. इस वजह से हर की पौड़ी समेत कई घाटों पर गंगा का जलस्तर काफी कम हो गया था.

21 अक्टूबर को हर की पौड़ी पर नहीं था गंगा का पानी

गंगा बंदी के दौरान हर की पौड़ी का नजारा पूरी तरह बदल गया था. 21 अक्टूबर को यहां गंगा की धारा दिखाई नहीं दे रही थी. इस दौरान हरिद्वार पहुंचे कई श्रद्धालुओं को गंगा स्नान किए बिना ही लौटना पड़ा था. हालांकि, कुछ श्रद्धालुओं ने उपलब्ध गंगाजल से आचमन कर अपनी आस्था व्यक्त की. गंगा में पानी का प्रवाह बंद होने के कारण घाटों पर सामान्य दिनों जैसी चहल-पहल भी नहीं थी.

गंग नहर की सफाई और मरम्मत का काम हुआ पूरा

वार्षिक गंगा बंदी के दौरान गंग नहर में जमा सिल्ट यानी मिट्टी और गाद को बाहर निकाला गया. इसके अलावा नहर की सफाई और जरूरी मरम्मत का काम भी किया गया. इन कार्यों का उद्देश्य नहर की जल प्रवाह क्षमता को बेहतर बनाए रखना और व्यवस्था को दुरुस्त करना है. निर्धारित समय के भीतर सभी जरूरी काम पूरे किए गए, जिसके बाद 7 नवंबर की रात गंगा में दोबारा पानी छोड़ दिया गया.

अर्धकुंभ 2027 की तैयारियों को भी मिली रफ्तार

इस बार गंगा बंदी के दौरान अर्धकुंभ 2027 की तैयारियों से जुड़े निर्माण कार्य भी किए गए. इसके तहत गंगा घाटों के विकास और निर्माण पर विशेष ध्यान दिया गया. जानकारी के मुताबिक, इस दौरान करीब तीन किलोमीटर लंबे गंगा घाट का निर्माण कार्य किया गया. अर्धकुंभ को देखते हुए हरिद्वार में बुनियादी सुविधाओं और घाटों को बेहतर बनाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है.

दिवाली से पहले लौट आई घाटों की रौनक

18 दिनों तक बंद रहने के बाद गंगा में पानी छोड़े जाने से हरिद्वार के घाटों का नजारा फिर बदल गया है. हर की पौड़ी समेत सभी गंगा घाटों पर जल प्रवाह शुरू हो गया है. गंगा की धारा लौटने से श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में खुशी है. दिवाली से पहले गंगा में पानी आने से अब घाटों पर स्नान, पूजा और धार्मिक गतिविधियां भी सामान्य रूप से शुरू हो सकेंगी.

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Published: November 8, 2026 07:22:20 IST
Last Updated: November 8, 2026 07:22:20 IST

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Haridwar Ganga News: हरिद्वार में 18 दिनों के इंतजार के बाद एक बार फिर मां गंगा की अविरल धारा घाटों पर बहने लगी है. दशहरे की रात से शुरू हुई गंगा की वार्षिक बंदी समाप्त हो गई है. 7 नवंबर की रात गंगा में दोबारा पानी छोड़ा गया, जिसके बाद हर की पौड़ी समेत हरिद्वार के सभी प्रमुख गंगा घाटों पर जल प्रवाह शुरू हो गया. दिवाली से ठीक पहले गंगा में पानी लौटने से घाटों की रौनक भी वापस आ गई है. अब श्रद्धालु पहले की तरह गंगा घाटों पर स्नान और पूजा-अर्चना कर सकेंगे.

दशहरे से दिवाली तक बंद रहती है गंगा की धारा

हरिद्वार में गंगा की वार्षिक बंदी एक निर्धारित परंपरा के तहत की जाती है. आमतौर पर दशहरे की रात से दिवाली तक गंग नहर में पानी का प्रवाह रोक दिया जाता है. इस दौरान नहर की सफाई, मरम्मत और दूसरे जरूरी काम पूरे किए जाते हैं. इस साल भी दशहरे की रात गंगा बंदी शुरू हुई थी, जो लगातार 18 दिनों तक चली. इस वजह से हर की पौड़ी समेत कई घाटों पर गंगा का जलस्तर काफी कम हो गया था.

21 अक्टूबर को हर की पौड़ी पर नहीं था गंगा का पानी

गंगा बंदी के दौरान हर की पौड़ी का नजारा पूरी तरह बदल गया था. 21 अक्टूबर को यहां गंगा की धारा दिखाई नहीं दे रही थी. इस दौरान हरिद्वार पहुंचे कई श्रद्धालुओं को गंगा स्नान किए बिना ही लौटना पड़ा था. हालांकि, कुछ श्रद्धालुओं ने उपलब्ध गंगाजल से आचमन कर अपनी आस्था व्यक्त की. गंगा में पानी का प्रवाह बंद होने के कारण घाटों पर सामान्य दिनों जैसी चहल-पहल भी नहीं थी.

गंग नहर की सफाई और मरम्मत का काम हुआ पूरा

वार्षिक गंगा बंदी के दौरान गंग नहर में जमा सिल्ट यानी मिट्टी और गाद को बाहर निकाला गया. इसके अलावा नहर की सफाई और जरूरी मरम्मत का काम भी किया गया. इन कार्यों का उद्देश्य नहर की जल प्रवाह क्षमता को बेहतर बनाए रखना और व्यवस्था को दुरुस्त करना है. निर्धारित समय के भीतर सभी जरूरी काम पूरे किए गए, जिसके बाद 7 नवंबर की रात गंगा में दोबारा पानी छोड़ दिया गया.

अर्धकुंभ 2027 की तैयारियों को भी मिली रफ्तार

इस बार गंगा बंदी के दौरान अर्धकुंभ 2027 की तैयारियों से जुड़े निर्माण कार्य भी किए गए. इसके तहत गंगा घाटों के विकास और निर्माण पर विशेष ध्यान दिया गया. जानकारी के मुताबिक, इस दौरान करीब तीन किलोमीटर लंबे गंगा घाट का निर्माण कार्य किया गया. अर्धकुंभ को देखते हुए हरिद्वार में बुनियादी सुविधाओं और घाटों को बेहतर बनाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है.

दिवाली से पहले लौट आई घाटों की रौनक

18 दिनों तक बंद रहने के बाद गंगा में पानी छोड़े जाने से हरिद्वार के घाटों का नजारा फिर बदल गया है. हर की पौड़ी समेत सभी गंगा घाटों पर जल प्रवाह शुरू हो गया है. गंगा की धारा लौटने से श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में खुशी है. दिवाली से पहले गंगा में पानी आने से अब घाटों पर स्नान, पूजा और धार्मिक गतिविधियां भी सामान्य रूप से शुरू हो सकेंगी.

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