Liquor Party in Government Office: सरकारी दफ्तर या शराब पार्टी का अड्डा! पहासू ब्लॉक का वीडियो वायरल होते ही मचा हड़कंपउत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के पहासू ब्लॉक विकास कार्यालय से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां एडीओ पंचायत के कार्यालय में कथित तौर पर शराब पार्टी किए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. वीडियो में टेबल पर शराब की बोतलें, गिलास और नमकीन रखे दिखाई दे रहे हैं. टेबल के चारों ओर कुछ लोग बैठे नजर आ रहे हैं. सरकारी कार्यालय के भीतर इस तरह का नजारा सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल मच गई है. हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है.
एडीओ पंचायत के कार्यालय में शराब पार्टी का वीडियो वायरल
वायरल वीडियो पहासू ब्लॉक विकास कार्यालय का बताया जा रहा है. इसमें एडीओ पंचायत एआर रहमान के कार्यालय के कमरों के अंदर टेबल पर शराब की बोतलें और गिलास रखे दिखाई दे रहे हैं. वीडियो में कुछ कर्मचारी और बाहरी लोग टेबल के आसपास बैठे नजर आते हैं. आरोप है कि कार्यालय के भीतर ही शराब पार्टी की जा रही थी. सरकारी कार्यालय में इस तरह की गतिविधि का वीडियो सामने आने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है. हालांकि, वीडियो कब रिकॉर्ड किया गया और इसमें दिखाई दे रहे लोग कौन हैं, इसकी आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है.
शाम होते ही दफ्तर में महफिल जमने का आरोप
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि शाम ढलने के बाद ब्लॉक कार्यालय के कुछ कमरों में अक्सर इस तरह की गतिविधियां होती हैं. उनका कहना है कि कार्यालय में शराब पार्टी किए जाने की चर्चा पहले भी होती रही है, लेकिन इस बार वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला सामने आ गया. लोगों का सवाल है कि जिस सरकारी कार्यालय में आम जनता के काम होने चाहिए, वहां अगर इस तरह की गतिविधियां हो रही हैं तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है. हालांकि, स्थानीय लोगों के इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
वीडियो वायरल होने के बाद विभाग में मचा हड़कंप
वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद विभाग में हलचल मची हुई है. सरकारी कार्यालय के भीतर शराब की बोतलें और गिलास दिखाई देने से कर्मचारियों की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं. अब इस मामले में प्रशासनिक स्तर पर जांच और कार्रवाई को लेकर लोगों की नजरें टिकी हैं. फिलहाल, वायरल वीडियो के आधार पर किसी कर्मचारी की भूमिका या आरोपों को अंतिम रूप से सही नहीं माना जा सकता. मामले में संबंधित अधिकारियों की ओर से जांच या आधिकारिक बयान सामने आने पर ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.