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Atal Pension Yojana: हर महिने अकाउंट में आएंगे 10000! बस करना होगा ये काम; जानें कौन कर सकता है अप्लाई

Atal Pension Yojana: फाइनेंस मिनिस्ट्री और पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) इस प्रपोज़ल पर मिलकर काम कर रहे हैं. हो सकता है कि ऊपरी पेंशन लिमिट को ₹8,000 से बढ़ाकर ₹10,000 हर महीने कर दिया जाए. एक अधिकारी ने कहा, "इस बदलाव से स्कीम ज़्यादा अट्रैक्टिव बनेगी और बढ़ती महंगाई के हिसाब से ढल जाएगी."

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Last Updated: April 23, 2026 14:10:28 IST

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Atal Pension Yojana: भारत सरकार इनफॉर्मल वर्कर्स के लिए सोशल सिक्योरिटी कवरेज बढ़ाने की प्लानिंग कर रही है. बढ़ती महंगाई और रिटायर लोगों के बढ़ते खर्चों को देखते हुए, सरकार अटल पेंशन योजना (APY) के तहत मिनिमम पेंशन की ऊपरी लिमिट को बढ़ाकर ₹10,000 प्रति महीना करने पर विचार कर रही है. तीन अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर मिंट से बात की.

भारत में इनफॉर्मल वर्कर्स वे वर्कर्स हैं जो अनऑर्गनाइज्ड सेक्टर में काम करते हैं, जिनके पास जॉब सिक्योरिटी, फिक्स्ड सैलरी या सोशल सिक्योरिटी (PF, पेंशन, छुट्टी) नहीं होती. वे देश के कुल वर्कफोर्स का लगभग 90% हैं, जिसमें रेहड़ी-पटरी वाले, घरेलू कामगार, मजदूर और सेल्फ-एम्प्लॉयड लोग शामिल हैं.

यह बदलाव क्यों ज़रूरी है?

अटल पेंशन योजना मई 2015 में शुरू की गई थी. इसका मुख्य मकसद अनऑर्गनाइज्ड वर्कर्स, किसानों, दुकानदारों और छोटे बिजनेस करने वालों को उनके बुढ़ापे में फाइनेंशियल मदद देना है. अभी, यह स्कीम 60 साल की उम्र के बाद हर महीने ₹1,000 से ₹5,000 की गारंटीड पेंशन देती है. लेकिन, बढ़ती कीमतों की वजह से यह रकम कम पड़ रही है.

अभी क्या है हालात?

अटल पेंशन योजना (APY) से 90 मिलियन से ज़्यादा मेंबर जुड़ चुके हैं, लेकिन इनमें से लगभग आधे मेंबर ने रेगुलर कंट्रीब्यूशन देना बंद कर दिया है. अब तक के सबसे ज़्यादा 13.5 मिलियन नए मेंबर फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में जुड़ेंगे. सरकार का मानना ​​है कि पेंशन लिमिट बढ़ाने से नए मेंबर जुड़ेंगे और मौजूदा मेंबर बने रहेंगे.

नया प्रपोजल क्या है?

फाइनेंस मिनिस्ट्री और पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) इस प्रपोज़ल पर मिलकर काम कर रहे हैं. हो सकता है कि ऊपरी पेंशन लिमिट को ₹8,000 से बढ़ाकर ₹10,000 हर महीने कर दिया जाए. एक अधिकारी ने कहा, “इस बदलाव से स्कीम ज़्यादा अट्रैक्टिव बनेगी और बढ़ती महंगाई के हिसाब से ढल जाएगी.”

सरकार कितना कंट्रीब्यूट करेगी? 31 मार्च, 2016 से पहले जुड़ने वाले मेंबर्स को पहले पांच साल तक सरकार से को-कंट्रीब्यूशन मिलता था. यह रकम मेंबर के कंट्रीब्यूशन का 50% (हर साल ज़्यादा से ज़्यादा ₹1,000) थी. यह फ़ायदा सिर्फ़ उन लोगों को मिलता था जो इनकम टैक्स नहीं देते थे और किसी दूसरी सोशल सिक्योरिटी स्कीम में एनरोल नहीं थे.

स्कीम को कैसे बढ़ाया जाएगा?

सरकार की योजना ‘पेंशन सखी’ और बिज़नेस कॉरेस्पोंडेंट (BCs) के ज़रिए हर गांव तक स्कीम पहुंचाने की है. लगातार कंट्रीब्यूशन की चुनौती को भी सुलझाया जा रहा है. 26 जनवरी, 2026 को कैबिनेट ने इस स्कीम को फाइनेंशियल ईयर 2031 तक जारी रखने की मंज़ूरी दे दी. प्रमोशनल, डेवलपमेंट और गैप-फंडिंग एक्टिविटीज़ के लिए सपोर्ट भी जारी रहेगा.

क्या सरकारी खजाने पर बोझ पड़ेगा?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस बदलाव से सरकारी खजाने पर ज़्यादा दबाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि अटल पेंशन योजना (APY) काफी हद तक मेंबर्स के अपने कंट्रीब्यूशन पर चलती है. ग्रांट थॉर्नटन के विवेक अय्यर कहते हैं, “APY एक तय योगदान वाला प्लान है. इसका मुख्य मकसद सुरक्षा है. इसलिए, इस बदलाव से सरकार पर कोई खास फाइनेंशियल दबाव नहीं पड़ेगा.”

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Atal Pension Yojana: भारत सरकार इनफॉर्मल वर्कर्स के लिए सोशल सिक्योरिटी कवरेज बढ़ाने की प्लानिंग कर रही है. बढ़ती महंगाई और रिटायर लोगों के बढ़ते खर्चों को देखते हुए, सरकार अटल पेंशन योजना (APY) के तहत मिनिमम पेंशन की ऊपरी लिमिट को बढ़ाकर ₹10,000 प्रति महीना करने पर विचार कर रही है. तीन अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर मिंट से बात की.

भारत में इनफॉर्मल वर्कर्स वे वर्कर्स हैं जो अनऑर्गनाइज्ड सेक्टर में काम करते हैं, जिनके पास जॉब सिक्योरिटी, फिक्स्ड सैलरी या सोशल सिक्योरिटी (PF, पेंशन, छुट्टी) नहीं होती. वे देश के कुल वर्कफोर्स का लगभग 90% हैं, जिसमें रेहड़ी-पटरी वाले, घरेलू कामगार, मजदूर और सेल्फ-एम्प्लॉयड लोग शामिल हैं.

यह बदलाव क्यों ज़रूरी है?

अटल पेंशन योजना मई 2015 में शुरू की गई थी. इसका मुख्य मकसद अनऑर्गनाइज्ड वर्कर्स, किसानों, दुकानदारों और छोटे बिजनेस करने वालों को उनके बुढ़ापे में फाइनेंशियल मदद देना है. अभी, यह स्कीम 60 साल की उम्र के बाद हर महीने ₹1,000 से ₹5,000 की गारंटीड पेंशन देती है. लेकिन, बढ़ती कीमतों की वजह से यह रकम कम पड़ रही है.

अभी क्या है हालात?

अटल पेंशन योजना (APY) से 90 मिलियन से ज़्यादा मेंबर जुड़ चुके हैं, लेकिन इनमें से लगभग आधे मेंबर ने रेगुलर कंट्रीब्यूशन देना बंद कर दिया है. अब तक के सबसे ज़्यादा 13.5 मिलियन नए मेंबर फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में जुड़ेंगे. सरकार का मानना ​​है कि पेंशन लिमिट बढ़ाने से नए मेंबर जुड़ेंगे और मौजूदा मेंबर बने रहेंगे.

नया प्रपोजल क्या है?

फाइनेंस मिनिस्ट्री और पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) इस प्रपोज़ल पर मिलकर काम कर रहे हैं. हो सकता है कि ऊपरी पेंशन लिमिट को ₹8,000 से बढ़ाकर ₹10,000 हर महीने कर दिया जाए. एक अधिकारी ने कहा, “इस बदलाव से स्कीम ज़्यादा अट्रैक्टिव बनेगी और बढ़ती महंगाई के हिसाब से ढल जाएगी.”

सरकार कितना कंट्रीब्यूट करेगी? 31 मार्च, 2016 से पहले जुड़ने वाले मेंबर्स को पहले पांच साल तक सरकार से को-कंट्रीब्यूशन मिलता था. यह रकम मेंबर के कंट्रीब्यूशन का 50% (हर साल ज़्यादा से ज़्यादा ₹1,000) थी. यह फ़ायदा सिर्फ़ उन लोगों को मिलता था जो इनकम टैक्स नहीं देते थे और किसी दूसरी सोशल सिक्योरिटी स्कीम में एनरोल नहीं थे.

स्कीम को कैसे बढ़ाया जाएगा?

सरकार की योजना ‘पेंशन सखी’ और बिज़नेस कॉरेस्पोंडेंट (BCs) के ज़रिए हर गांव तक स्कीम पहुंचाने की है. लगातार कंट्रीब्यूशन की चुनौती को भी सुलझाया जा रहा है. 26 जनवरी, 2026 को कैबिनेट ने इस स्कीम को फाइनेंशियल ईयर 2031 तक जारी रखने की मंज़ूरी दे दी. प्रमोशनल, डेवलपमेंट और गैप-फंडिंग एक्टिविटीज़ के लिए सपोर्ट भी जारी रहेगा.

क्या सरकारी खजाने पर बोझ पड़ेगा?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस बदलाव से सरकारी खजाने पर ज़्यादा दबाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि अटल पेंशन योजना (APY) काफी हद तक मेंबर्स के अपने कंट्रीब्यूशन पर चलती है. ग्रांट थॉर्नटन के विवेक अय्यर कहते हैं, “APY एक तय योगदान वाला प्लान है. इसका मुख्य मकसद सुरक्षा है. इसलिए, इस बदलाव से सरकार पर कोई खास फाइनेंशियल दबाव नहीं पड़ेगा.”

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